रीजनल रिपोर्टर

सरोकारों से साक्षात्कार

अंबिका जोशी की स्मृति में आयोजित हुआ नवोदित काव्योत्सव

डा.कुकरेती की नवीन पुस्तक लुप्त होती धरोहरें का लोकार्पण
गिर्दा और अवनीन्द्र उनियाल के योगदान का किया स्मरण

नगर निगम सभागार में श्रीनगर के बहुआयामी व्यक्तित्व अंबिका प्रसाद जोशी की पुण्यतिथि पर ‘रीजनल रिपोर्टर’ तथा ‘श्री कम्युनिकेशन’ की ओर से नवोदित काव्योत्सव का आयोजन किया गया।

इस कार्यक्रम में वरिष्ठ साहित्यकार डा.विष्णुदत्त कुकरेती द्वारा लिखित पुस्तक ‘लुप्त होती धरोहरें (कुटरियां)’ का विमोचन भी किया गया।

वक्ताओं ने नाथपंथ साहित्य लेखन में डा.विष्णुदत्त कुकरेती द्वारा लिखे गए इतिहास को अद्भुत कौशल का लेखन बताया।

इस मौके पर उत्तराखंड की व्यवस्था को साहित्य से आइना दिखाने वाले ‘गिर्दा’ तथा श्रीनगर में साहित्यिक गतिविधियों के केंद्र में रहे व्यंग्यकार अवनींद्र उनियाल के विशेष योगदान का स्मरण किया गया।

दीप प्रज्जवलित करती हुई महापौर आरती भंडारी

मुख्य अतिथि साहित्यकार बीना बेंजवाल ने कहा कि नव रचनाकारों ने इस प्रशाल में हो रहे आयोजन को बुलंदियां दी हैं। उन्होंने कहा कि “नाथपंथः गढ़वाल के परिप्रेक्ष्य में” पुस्तक से उन्होंने डा.विष्णुदत्त कुकरेती को जाना। यह पुस्तक न सिर्फ कई मायनों में महत्त्वपूर्ण है, बल्कि उत्तराखंड में नाथपंथ के वास्तविक इतिहास को भी उजागर करती है।

विशिष्ट अतिथि नगर निगम मेयर आरती भंडारी ने कहा कि इन नवोदित कवियों के रूप में श्रीनगर को आने वाले समय में रचनाशील युवा मिल रहे हैं। निसंदेह आने वाले समय में ये कवि अपने विचारों से बड़ा बदलाव लेकर आएंगे।

लेखक डा.विष्णुदत्त कुकरेती ने कहा कि उत्तराखंड के विभिन्न गांवों में उनके ग्रामीण देवता उपस्थित हैं और उनके जागर भी। इसलिए उनके जागरों का संकलन कर दिया जाना चाहिए। इससे कई नई-नई चीजें संसार में आ जाएंगी। विज्ञान, इतिहास, समाजशास्त्र, भूगोल और भी कई विषय इससे जुड़े हुए हैं।

लुप्त होती धरोहरें (कुटरियाँ) पुस्तक लोकार्पण

कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे प्रो.संपूर्ण सिंह रावत ने कहा कि किसी भी पुस्तक को तैयार करना एक बड़ी जद्दोजहद का काम है और डा.कुकरेती इस उम्र में भी इसे बखूबी निभा रहे हैं, जो नई पीढ़ी के लिए बड़ी सीख है।

नवोदित काव्योत्सव की चयन समिति में शामिल रहीं शिक्षिका ममता मिश्रा ने कहा कि मंचासीन कवियों के लिए निर्णय लेना एक दुष्कर कार्य था। क्योंकि चयन समिति के पास एक से बढ़कर एक कविता सामने रहीं। आज का काव्योत्सव इसका प्रत्यक्ष प्रमाण है। उन्होंने अपनी कविता ‘पुस्तक’ के माध्यम से पुस्तक महत्त्व को शानदार काव्यात्मक प्रस्तुति के साथ सबके समक्ष रखा।

रीजनल रिपोर्टर के संपादकीय सहयोगी सीताराम बहुगुणा ने सभी अतिथियों का अभिनंदन किया तथा डा.अरूण कुकसाल ने कार्यक्रम के संपन्न होने तक उपस्थित विशाल जनसमुदाय का आभार जताया।

अतिथियों का अभिनंदन करते हुए सीताराम बहुगुणा

नवोदित काव्योत्सव में नवोदित कवियों ने बांधा समां

नगर निगम सभागार में आयोजित नवोदित काव्योत्सव में कवियों ने अपनी स्वरचित कविताओं के पाठ से समां बांध दिया। अपनी कविताओं में बाल एवं किशोर कवियों ने आज के बदलते परिवेश में तमाम संघर्षों के बावजूद उम्मीद की रोशनी दिखाई।

मार्शल पब्लिक स्कूल के नन्हे छात्र प्रद्युम्न उनियाल ने सूरज दादा कविता के माध्यम से सूरज से संघर्ष करने का ढंग सीखने की जरूरत बताई, तो रेनबो पब्लिक स्कूल के ईशान बेंजवाल ने ‘सपने देखे कुछ लोगों ने, कितनों से वह भी नहीं हो पाया’ कविता से वर्तमान समय में संघर्षों की स्थिति पर बात की। श्रेया दत्त ने देशप्रेम कविता, तो अनुराधा लिंगवाल ने “जीत जाऊंगी मैं एक दिन” कविता से श्रोताओं को रोमांचित किया।

कविता वाचन करते हुए बालकवि प्रद्युम्न उनियाल

शेमफोर्ड फ्यूचेरिस्टिक की अनुष्का विलियम ने “देखो जरा ये कैसी सदी हमारे सामने खड़ी है“ से महिलाओं के साथ हो रही दुर्दांत घटनाओं का जिक्र किया। अक्षिता ने ”अब द्रोपदी बन चुकी हुंकार है“ कविता का पाठ किया। अंजलि रावत ने उत्तराखंड के दुख उत्तराखंड की जवानी प्रस्तुत करते हुए ‘उत्तराखंड ने हिमाचल से पूछा- ’कविता सुनाई।

एसजीआरआर की रिया ने ‘ड्रीम्स, क्वेशचन्स, कन्फ्यूजन एंड फ्रीडम, दीज फोर वर्ड्स डिस्क्राइब द जर्नी ऑफ लाइफ’ अंग्रेजी पोएम के साथ टीनेजर्स की वर्तमान परिस्थितियों को रखा।

कविता वाचन करते हुए ईशान बेंजवाल

राजकीय पॉलीटेक्निक के आयुष नेगी ने ‘बहुत गर्मी हो रही है, कलम-दवातें सो रही हैं’ कविता से लोकतंत्र की धज्जियां उड़ाते विभिन्न स्तंभों पर सवाल दागे। राजकीय बालिका इंटर कॉलेज की दृष्टि भंडारी ने ‘मां’ कविता सभी श्रोताओं को भावुक कर दिया।

गढ़वाल विवि की काजल चक्रवर्ती ने दिन प्रतिदिन फैलाव हो रहा भ्रष्टाचार की सत्ता का कविता से गरीब की स्थिति पर वास्तविक हालात प्रस्तुत किए।

इस मौके पर वरिष्ठ रंगकर्मी विमल बहुगुणा, प्रो.रामानंद गैरोला, प्राविधिक शिक्षा के पूर्व उप निदेशक डा.एसके बिजल्वाण, सामाजिक कार्यकर्ता अनिल स्वामी, वरिष्ठ कवि जेके माटी, देवेंद्र उनियाल, संदीप रावत, साइनी उनियाल, मेनका सुशांत, भगवती मेमोरियल की प्रधानाचार्य प्रभा बहुगुणा, आर सी मेमोरियल की प्रधानाचार्य कुसुमलता बिष्ट, शुभांगी भट्ट, रोटेरियन नवलकिशोर जोशी, डा.जीएस दानू, डा.योगेंद्र कांडपाल, दीपा थपलियाल, पुष्पा जोशी, रेशमा पंवार, प्रियंका भंडारी, नीता जोशी, भगवती प्रसाद पुरी, अजीम प्रेमजी से प्रदीप अंथवाल, रमेश प्रसाद भट्ट, सभासद अंजना डोभाल, शुभम् प्रभाकर, नीता काला, आदि उपस्थित रहे।

सभागार में उपस्थित श्रोतागण
कविता वाचन करती हुई दृष्टि भंडारी
https://regionalreporter.in/sunita-uniyal-and-mamta-bhatt-were-honored/

https://youtu.be/DOr9xIQE7b8?si=odzpAH1AtaUk51ld
amishagoswami2305@gmail.com
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