31 लापता बच्चे परिवारों से मिले
पौड़ी गढ़वाल जनपद में महिला एवं बाल संरक्षण को मजबूत करने के लिए विभाग ने बीते वित्तीय वर्ष में सराहनीय काम किए।
पुनर्वास, संरक्षण और सामाजिक सुरक्षा योजनाओं से जरूरतमंद महिलाओं और बच्चों को नया जीवन आधार मिला।
28 संवासिनियों को मिला सुरक्षित आश्रय
कोटद्वार स्थित महिला कल्याण पुनर्वास केंद्र में 28 संवासिनियों को आश्रय दिया गया।
इनमें पॉक्सो से प्रभावित बालिकाएं भी शामिल रहीं।
सभी को सुरक्षित माहौल, काउंसलिंग और शिक्षा की सुविधा दी गई।
इससे उनका आत्मविश्वास मजबूत हुआ।
इनमें से 22 संवासिनियों का सफल पुनर्वास परिवारों के साथ कराया गया।

183 मामलों का निस्तारण, 31 बच्चे परिवारों से मिले
जिला बाल कल्याण समिति के समक्ष आए 183 मामलों का समयबद्ध निस्तारण किया गया।
इस दौरान शून्य लंबितता सुनिश्चित की गई।
विभाग ने 31 लापता बच्चों को उनके परिजनों से मिलाया।
साथ ही 56 बच्चों को बाल श्रम से मुक्त कराया गया।
पुलिस, चाइल्ड हेल्पलाइन 1098 और किशोर न्याय बोर्ड के समन्वय से त्वरित सहायता दी गई।
55 जागरूकता अभियान और पेंशन का बड़ा लाभ
विभाग ने 55 जनजागरूकता अभियान चलाए। इन अभियानों में बाल विवाह, साइबर अपराध और सामाजिक कुरीतियों पर लोगों को जागरूक किया गया।
समाज कल्याण विभाग के समन्वय से 16,922 विधवा महिलाओं को पेंशन का लाभ मिला।
इसके अलावा परित्यक्ता महिलाओं को भी पेंशन योजनाओं से जोड़ा गया।

बच्चों के भविष्य को आर्थिक सुरक्षा
मुख्यमंत्री वात्सल्य योजना और स्पॉन्सरशिप योजनाओं के तहत जरूरतमंद बच्चों को आर्थिक सहायता दी गई।
इससे उनके भविष्य को सुरक्षित बनाने में मदद मिली।
‘पुअर प्रिजनर स्कीम’ के तहत आर्थिक रूप से कमजोर बंदियों को भी विधिक सहायता देने पर काम हुआ।
डीएम ने कहा- आत्मनिर्भर बनाना लक्ष्य
जिलाधिकारी स्वाति एस. भदौरिया ने कहा कि महिला और बाल संरक्षण सर्वोच्च प्राथमिकता में है।
उन्होंने कहा कि लक्ष्य सिर्फ सहायता देना नहीं है। बल्कि हर लाभार्थी को आत्मनिर्भर बनाकर मुख्यधारा से जोड़ना है।
जिला परिवीक्षा अधिकारी अरविंद कुमार ने कहा कि हर मामले में काउंसलिंग और पुनर्वास पर फोकस किया जा रहा है।




















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