संविधान संशोधन विधेयक पर बढ़ी हलचल
मानसून सत्र से पहले स्पीकर को सौंपी जाएगी रिपोर्ट
राजनीति के अपराधीकरण पर रोक लगाने और संवैधानिक नैतिकता को मजबूत करने के उद्देश्य से लाए गए
संविधान (130वां संशोधन) विधेयक, 2025 पर गठित संयुक्त संसदीय समिति (JPC) अपनी रिपोर्ट 17 जुलाई तक
लोकसभा अध्यक्ष को सौंपेगी। रिपोर्ट मानसून सत्र से ठीक पहले प्रस्तुत की जाएगी।
देशभर से लिए गए सुझाव
जेपीसी की अध्यक्ष अपराजिता सारंगी ने बताया कि समिति ने देश के विभिन्न वर्गों, शिक्षण संस्थानों, विश्वविद्यालयों, लॉ कॉलेजों,
गैर-सरकारी संगठनों (NGO) और राज्य सरकारों से सुझाव आमंत्रित किए थे।
समिति के अनुसार, अधिकांश प्रतिनिधियों ने विधेयक के उद्देश्य का समर्थन किया और राजनीति में अपराधीकरण रोकने की आवश्यकता पर सहमति जताई।
42 संस्थानों से किया गया विचार-विमर्श
सूत्रों के अनुसार, समिति ने अब तक 42 संस्थानों से सुझाव प्राप्त किए हैं।
इसके अलावा 11 एनडीए शासित राज्यों का दौरा कर वहां के प्रतिनिधियों से भी चर्चा की गई।
कई अन्य राज्यों ने लिखित सुझाव भेजे हैं, जबकि आंध्र प्रदेश ने दो मामूली संशोधन प्रस्तावित किए हैं।
विधेयक में क्या है प्रस्ताव?
संविधान (130वां संशोधन) विधेयक, 2025 के अनुसार यदि कोई मंत्री ऐसे अपराध में आरोपी है,
जिसमें पांच वर्ष या उससे अधिक की सजा का प्रावधान है, या वह 30 दिनों से अधिक समय तक जेल में रहता है,
तो उसे पद से हटाया जा सकता है। राष्ट्रपति या राज्यपाल, प्रधानमंत्री अथवा मुख्यमंत्री की सलाह पर उसे पद से हटा सकेंगे।
यदि ऐसा नहीं होता, तो 31वें दिन मंत्री का पद स्वतः समाप्त होने का प्रावधान प्रस्तावित किया गया है।
संसद में पारित होने के लिए चाहिए दो-तिहाई बहुमत
हालांकि, यह अभी स्पष्ट नहीं है कि सरकार आगामी मानसून सत्र में इस विधेयक को संसद में पेश करेगी या नहीं।
संवैधानिक संशोधन होने के कारण इसे पारित कराने के लिए संसद में दो-तिहाई बहुमत की आवश्यकता होगी।
विपक्ष ने पहले किया था विरोध
यह विधेयक नवंबर 2025 में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह द्वारा संसद में पेश किया गया था,
लेकिन विपक्षी दलों ने इसका विरोध करते हुए हंगामा किया था। इसके बाद दिसंबर 2025 में 31 सदस्यीय संयुक्त संसदीय
समिति का गठन किया गया। विपक्ष के कई दलों ने समिति में शामिल होने से इनकार कर दिया था।
रिपोर्ट के बाद सरकार लेगी अगला फैसला
अब समिति अपनी अंतिम रिपोर्ट तैयार कर रही है। रिपोर्ट सौंपे जाने के बाद सरकार आगे की रणनीति तय करेगी।
यदि यह विधेयक संसद से पारित हो जाता है, तो गंभीर आपराधिक मामलों का सामना कर रहे मंत्रियों को लेकर देश की
राजनीति में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है।















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