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पुणे में अपना हाल-ए-दिल बयां कर गए राहुल

नेहा सिंह राठौर से राहुल गांधी का दो टूक जवाब, बोले- ‘मुझे भी गालियां पड़ती हैं, मैं भी नहीं सुधर रहा’

‘छात्रों की गूंज’ के मंच पर छात्राओं की सुरक्षा और युवाओं के मुद्दों पर चर्चा के बीच एक छोटा-सा संवाद अचानक सुर्खियों में आ गया।

भोजपुरी लोकगायिका नेहा सिंह राठौर ने जब मंच से बताया कि सत्ता और व्यवस्था पर सवाल उठाने की वजह

से उन्हें लगातार गालियां और आलोचनाएं झेलनी पड़ती हैं, तो राहुल गांधी ने अपने अनुभव का जिक्र करते हुए कहा-“मुझे भी वर्षों से गालियां पड़ रही हैं… मैं भी नहीं सुधर रहा।”

राहुल गांधी का यह जवाब कुछ सेकंड का था, लेकिन इसके बाद सोशल मीडिया से लेक

राजनीतिक गलियारों तक इसकी चर्चा शुरू हो गई।

नेहा सिंह राठौर ने मंच से क्या कहा

22 अगस्त को पुणे में आयोजित ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम में बड़ी संख्या में छात्राएं मौजूद थीं।

कार्यक्रम के दौरान नेहा सिंह राठौर भी मंच पर पहुंचीं।

उन्होंने अपनी बात रखते हुए कहा कि सरकार और व्यवस्था पर सवाल उठाने के कारण उन्हें लगातार आलोचना और गालियों का सामना करना पड़ता है।

हालांकि, इन चीजों के बावजूद वह अपनी बात कहना बंद नहीं करेंगी।

यही बात राहुल गांधी से जुड़ गई।

राहुल गांधी का जवाब- ‘मैं भी नहीं सुधर रहा’

नेहा की बात सुनने के बाद राहुल गांधी ने कहा कि उन्हें भी लंबे समय से गालियां मिल रही हैं,

लेकिन वह भी अपनी राह बदलने वाले नहीं हैं।

उनका यह जवाब भले ही छोटा था, लेकिन राजनीतिक संदर्भ में इसे राहुल गांधी की उस छवि से जोड़कर देखा जाने लगा,

जिसे लेकर पिछले एक दशक से सोशल मीडिया पर लगातार बहस होती रही है।

‘पप्पू’ से लेकर आज के राहुल गांधी तक

2014 के बाद राहुल गांधी सोशल मीडिया की राजनीति में लगातार निशाने पर रहे।

उनके भाषणों और राजनीतिक बयानों को लेकर मीम बनाए गए और उन्हें ‘पप्पू’ जैसे तंज के जरिए खारिज करने की कोशिश होती रही।

लेकिन समय के साथ राहुल गांधी की राजनीति का फोकस भी बदला। बेरोजगारी, शिक्षा, सामाजिक न्याय, युवाओं और आम लोगों के मुद्दे उनकी सार्वजनिक राजनीति में ज्यादा प्रमुख दिखाई देने लगे।

‘छात्रों की गूंज’ भी इसी बदले हुए राजनीतिक संवाद का हिस्सा है, जहां राहुल गांधी सीधे छात्रों और युवाओं से बातचीत कर रहे हैं।

पुणे में छात्राओं से सुरक्षा और आजादी पर संवाद

पुणे का कार्यक्रम खास तौर पर छात्राओं पर केंद्रित था।

राहुल गांधी ने महिलाओं की सुरक्षा, स्वतंत्र पहचान, शिक्षा और अवसरों जैसे मुद्दों पर बात की।

उन्होंने कहा कि महिलाओं की पहचान सिर्फ बेटी, पत्नी या मां के रिश्ते तक सीमित नहीं होनी चाहिए। उनके अपने सपने, अपनी सोच और अपनी पहचान है।

राहुल गांधी ने छात्राओं से समाज में मौजूद उस ‘कंट्रोल’ की मानसिकता पर भी सवाल उठाने को कहा,

जिसके जरिए कई बार महिलाओं के फैसलों को प्रभावित करने की कोशिश की जाती है।

कुछ सेकंड का संवाद, बड़ा राजनीतिक संदेश

नेहा सिंह राठौर और राहुल गांधी के बीच हुई बातचीत को सिर्फ एक हल्के-फुल्के संवाद के तौर पर देखना आसान है। ले

किन इसके पीछे एक बड़ा राजनीतिक संदर्भ भी नजर आता है।

दोनों ने अपने-अपने तरीके से यह बात कही कि आलोचना, ट्रोलिंग और गालियां उन्हें अपनी बात कहने से रोक नहीं सकतीं।

राहुल गांधी का “मैं भी नहीं सुधर रहा” वाला जवाब इसी संदर्भ में देखा जा रहा है। यानी आलोचना होती रहे, लेकिन राजनीतिक दिशा नहीं बदलेगी।

क्या राहुल गांधी की छवि बदल रही है

राहुल गांधी की छवि कितनी बदली है और इसका राजनीतिक फायदा कितना मिलेगा, यह आने वाले चुनाव तय करेंगे।

लेकिन इतना जरूर है कि उनकी मौजूदा राजनीति में युवा, छात्र, बेरोजगारी, शिक्षा और सामाजिक मुद्दे लगातार केंद्र में हैं।

पुणे में नेहा सिंह राठौर के साथ हुआ यह छोटा-सा संवाद इसी बदलाव की चर्चा को फिर सामने ले आया।

कभी सोशल मीडिया पर ‘पप्पू’ कहकर निशाना बनाए जाने वाले राहुल गांधी

आज उसी युवाओं के बीच खड़े होकर उनके सवाल सुनने की कोशिश कर रहे हैं।

ऐसे में उनका एक वाक्य-“मुझे भी वर्षों से गालियां पड़ रही हैं… मैं भी नहीं सुधर रहा”

सिर्फ जवाब नहीं, बल्कि अपनी राजनीतिक राह पर कायम रहने का संदेश भी माना जा रहा है।

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