उत्तराखंड में समान नागरिक संहिता (UCC) लागू होने के बाद वसीयत पंजीकरण की प्रक्रिया पूरी तरह ऑनलाइन कर दी गई है।
हालांकि, इस नई व्यवस्था के चलते अब कई व्यावहारिक समस्याएं सामने आ रही हैं, जिससे आम लोगों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
रजिस्ट्रेशन में देरी, प्रक्रिया हो रही जटिल
कई मामलों में वसीयत के पंजीकरण में काफी समय लग रहा है। ऑनलाइन प्रक्रिया के दौरान दस्तावेज अपलोड,
सत्यापन और सर्वर की धीमी गति जैसी समस्याएं सामने आ रही हैं, जिससे पूरी प्रक्रिया प्रभावित हो रही है।
वकीलों की भूमिका लगभग खत्म
नई व्यवस्था में अधिवक्ताओं की भूमिका लगभग नगण्य हो गई है। इससे वसीयत में विधिक भाषा का सही उपयोग
नहीं हो पा रहा, जिससे भविष्य में उत्तराधिकारियों के लिए कानूनी जटिलताएं बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।
CSC के माध्यम से हो रहा पंजीकरण
यूसीसी के तहत वसीयत का रजिस्ट्रेशन अब कॉमन सर्विस सेंटर (CSC) के जरिए किया जा रहा है।
इसमें वसीयत करने वाले व्यक्ति के फिंगरप्रिंट लिए जाते हैं और गवाहों के वीडियो बयान भी रिकॉर्ड किए जाते हैं।
साथ ही, आधार से जुड़े मोबाइल नंबर पर OTP के जरिए प्रक्रिया पूरी होती है।
पहले आसान थी ऑफलाइन प्रक्रिया
पहले वसीयत कराने वाला व्यक्ति अपने वकील के साथ सीधे रजिस्ट्रार के पास जाकर आसानी से पंजीकरण करवा सकता था।
अब ऑनलाइन सिस्टम ने प्रक्रिया को तकनीकी रूप से जटिल बना दिया है।
ऑफलाइन विकल्प की मांग तेज
अधिवक्ताओं ने इस प्रक्रिया को आंशिक रूप से ऑफलाइन रखने की मांग की है।
उनका कहना है कि ऑनलाइन पोर्टल में लगातार तकनीकी समस्याएं आ रही हैं, जिससे काम प्रभावित हो रहा है।
सरकार जल्द करेगी समाधान पर चर्चा
गृह विभाग के सचिव शैलेश बगौली ने बताया कि इस संबंध में शासन को सुझाव प्राप्त हुए हैं।
जल्द ही बार काउंसिल के पदाधिकारियों के साथ बैठक कर इस समस्या का समाधान निकाला















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