9 किमी पैदल चलने को मजबूर सकंड गांव के लोग
सड़क सुविधा से वंचित कर्णप्रयाग विकासखंड के सकंड गांव के ग्रामीणों का सब्र अब जवाब देने लगा है।
लंबे समय से सड़क की मांग पूरी नहीं होने पर ग्रामीणों ने खुद ही सड़क निर्माण का जिम्मा उठा लिया है।
ग्राम प्रधान शिवानी चौधरी के नेतृत्व में ग्रामीण गेती, फावड़ा, बेलचा और अन्य औजार लेकर सड़क कटिंग में जुट गए हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि उन्होंने सड़क की मांग को लेकर शासन-प्रशासन, जिलाधिकारी, विधायक और संबंधित अधिकारियों से कई बार पत्राचार किया।
इसके बावजूद उन्हें अब तक सिर्फ आश्वासन ही मिले हैं।
ग्रामीणों के मुताबिक गांव को सड़क से जोड़ने के लिए कई बार सर्वे भी किए गए, लेकिन निर्माण कार्य शुरू नहीं हो पाया।
बीमार और बुजुर्गों को सबसे ज्यादा परेशानी
सड़क नहीं होने के कारण सकंड गांव के लोगों को आज भी करीब नौ किलोमीटर की पैदल दूरी तय करनी पड़ती है।
रोजमर्रा के सामान से लेकर कृषि उपज को बाजार तक पहुंचाने में ग्रामीणों को परेशानी होती है।
सबसे ज्यादा दिक्कत बीमार, बुजुर्गों, महिलाओं और बच्चों को होती है।
किसी व्यक्ति के बीमार पड़ने पर उसे पैदल सड़क तक पहुंचाना पड़ता है।
इसके बाद ही वाहन से उसे कर्णप्रयाग अस्पताल या अन्य स्थानों तक ले जाया जा सकता है।

जनवरी में भी किया था आंदोलन
ग्रामीणों ने बताया कि सड़क की मांग को लेकर पांच और छह जनवरी को आंदोलन किया गया था।
विधायक अनिल नौटियाल के आश्वासन के बाद ग्रामीणों ने दो दिन बाद आंदोलन समाप्त कर दिया था।
ग्रामीणों के अनुसार विधायक ने तीन महीने के भीतर सड़क का सर्वे कराने और जल्द सड़क कटिंग शुरू कराने का आश्वासन दिया था।
हालांकि, समय बीतने के बाद भी सड़क निर्माण शुरू नहीं हुआ।
वन भूमि में सड़क बनाने पर प्रशासन की नजर
ग्रामीणों के खुद सड़क बनाने का मामला सामने आने के बाद प्रशासन ने भी जानकारी जुटानी शुरू कर दी है।
उपजिलाधिकारी कर्णप्रयाग अल्केश नौटियाल ने बताया कि ग्रामीणों द्वारा अपने संसाधनों से सड़क निर्माण किए जाने की जानकारी उनके संज्ञान में आई है।
उन्होंने कहा कि जिस स्थान पर ग्रामीण सड़क बना रहे हैं, वह वन भूमि के अंतर्गत आता है।
मामले की जानकारी संबंधित विभागों को भी दी जा रही है।
‘सरकार को आइना दिखाने के लिए उठाया कदम’
ग्रामीणों का कहना है कि वर्षों से मांग करने के बाद भी जब सरकारी स्तर पर सड़क नहीं बनी,
तो उन्होंने अपने संसाधनों और श्रमदान से काम शुरू करने का फैसला लिया।
उनका कहना है कि यह कदम सरकार और शासन-प्रशासन को उनकी समस्या का आइना दिखाने के लिए उठाया गया है।
सड़क निर्माण में वीरेंद्र सिंह, दाताराम, देवली, रघुवीर सिंह, गजेंद्र सिंह, उषा देवी, सरस्वती देवी समेत कई ग्रामीण जुटे हैं।
ग्रामीणों ने शासन-प्रशासन से जल्द सरकारी स्तर पर सड़क को स्वीकृति देने और निर्माण कार्य शुरू कराने की मांग की है।
ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि अगर आगामी विधानसभा चुनाव से पहले गांव को सड़क से नहीं जोड़ा गया तो वे वर्ष 2027 के विधानसभा चुनाव का बहिष्कार करेंगे।
ग्रामीणों ने कहा कि ऐसी स्थिति में इसकी पूरी जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी।
















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