कोयला आवंटन मामले में बंद हुआ केस
CBI की क्लोजर रिपोर्ट स्वीकार, ट्रायल कोर्ट का समन आदेश रद्द
पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह को कथित कोयला ब्लॉक आवंटन मामले में सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है।
शीर्ष अदालत ने CBI की क्लोजर रिपोर्ट स्वीकार करते हुए मामले को बंद कर दिया। साथ ही 2015 में ट्रायल कोर्ट द्वारा जारी समन आदेश को भी रद्द कर दिया।
क्या कहा सुप्रीम कोर्ट ने
मामले की सुनवाई सूर्यकांत, जॉयमाल्या बागची और वी. मोहन की पीठ ने की।
अदालत ने कहा कि सेशंस जज के पास CBI की क्लोजर रिपोर्ट को खारिज करने और मामले का संज्ञान लेने के पर्याप्त आधार नहीं थे।
इसलिए विशेष अनुमति याचिका (SLP) स्वीकार करते हुए ट्रायल कोर्ट के आदेश को निरस्त किया जाता है।
सुप्रीम कोर्ट ने CBI की क्लोजर रिपोर्ट को मेरिट के आधार पर स्वीकार करते हुए पूरे मामले को समाप्त कर दिया।
क्या था पूरा मामला
यह मामला ओडिशा की तलाबीरा कोयला खदान के आवंटन से जुड़ा है।
आरोप था कि वर्ष 2004-05 के दौरान कोयला ब्लॉकों का आवंटन पारदर्शी प्रक्रिया का पालन किए बिना निजी कंपनियों को किया गया।
इस विवाद के चलते तत्कालीन प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह का नाम भी जांच के दायरे में आया था।
हालांकि जांच के दौरान CBI को उनके खिलाफ कोई ठोस सबूत नहीं मिला। एजेंसी ने 2014 में दो बार क्लोजर रिपोर्ट दाखिल कर केस बंद करने की सिफारिश की थी।
2015 में जारी हुआ था समन
CBI की क्लोजर रिपोर्ट के बावजूद 2015 में ट्रायल कोर्ट ने उसे खारिज करते हुए डॉ. मनमोहन सिंह को समन जारी कर दिया था।
इसके बाद उन्होंने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया। शीर्ष अदालत ने 1 अप्रैल 2015 को समन पर रोक लगा दी थी और अब अंतिम फैसला सुनाते हुए मामला पूरी तरह बंद कर दिया है।
कपिल सिब्बल ने रखा था पक्ष
सुप्रीम कोर्ट में पूर्व प्रधानमंत्री की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल और अभिषेक मनु सिंघवी ने पक्ष रखा।
उन्होंने दलील दी थी कि कोयला ब्लॉक आवंटन एक प्रशासनिक निर्णय था और इसमें कोई गैर-कानूनी कार्रवाई नहीं हुई।
डेढ़ साल बाद बंद हुआ मामला
डॉ. मनमोहन सिंह का निधन 26 दिसंबर 2024 को हो चुका है।
उनके निधन के डेढ़ वर्ष से अधिक समय बाद सुप्रीम कोर्ट ने उनकी याचिका स्वीकार करते हुए ट्रायल कोर्ट के
समन आदेश को रद्द किया और CBI की क्लोजर रिपोर्ट को मंजूरी देकर मामले का पटाक्षेप कर दिया।















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