बदरीनाथ धाम के पास स्थित प्रसिद्ध धार्मिक एवं पर्यटन स्थल वसुधारा ट्रैक को प्लास्टिक कचरे से बचाने के लिए बड़ा कदम
उठाया गया है। अब इस ट्रैक की नियमित साफ-सफाई और संरक्षण की जिम्मेदारी माणा गांव की इको डेवलपमेंट कमेटी
(EDC) को सौंपी जाएगी। नंदा देवी राष्ट्रीय पार्क प्रशासन का उद्देश्य स्थानीय समुदाय की भागीदारी से पर्यावरण संरक्षण को
बढ़ावा देना और हिमालयी बुग्यालों को प्लास्टिक प्रदूषण से सुरक्षित रखना है।
चारधाम यात्रा के दौरान बढ़ रही कचरे की समस्या
चारधाम यात्रा के दौरान हर साल बड़ी संख्या में श्रद्धालु और पर्यटक वसुधारा जलप्रपात तक पहुंचते हैं।
इस दौरान ट्रैक पर प्लास्टिक की बोतलें, चिप्स के रैपर और अन्य कचरा बिखर जाता है।
तेज हवाओं के कारण यह प्लास्टिक आसपास के बुग्यालों तक पहुंचकर वहां की नाजुक पारिस्थितिकी और जैव विविधता को नुकसान पहुंचा रहा है।
स्थानीय युवाओं को मिलेगा रोजगार
नंदा देवी राष्ट्रीय पार्क प्रशासन के अनुसार, माणा गांव की ईडीसी के गठन से ट्रैक की सफाई व्यवस्था बेहतर होगी।
इसके साथ ही स्थानीय युवाओं को रोजगार के अवसर भी मिलेंगे। समिति नियमित रूप से ट्रैक की निगरानी,
कचरा संग्रहण और पर्यावरण संरक्षण से जुड़े कार्यों को अंजाम देगी।
पर्यटकों ने भी जताई चिंता
वसुधारा पहुंचे कई श्रद्धालुओं और पर्यटकों ने ट्रैक पर फैले प्लास्टिक कचरे पर चिंता व्यक्त की।
उनका कहना है कि यदि समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो हिमालयी बुग्यालों और प्राकृतिक सौंदर्य पर इसका गंभीर असर पड़ सकता है।
पर्यावरण संरक्षण को मिलेगी मजबूती
नंदा देवी राष्ट्रीय पार्क के प्रभागीय वनाधिकारी अभिमन्यु ने बताया कि स्थानीय समुदाय की भागीदारी से प्लास्टिक कचरे पर
प्रभावी नियंत्रण किया जाएगा। इस पहल से पर्यावरण संरक्षण को मजबूती मिलने के साथ-साथ वसुधारा ट्रैक को स्वच्छ और
सुरक्षित बनाए रखने में मदद मिलेगी।
धार्मिक और प्राकृतिक महत्व का केंद्र है वसुधारा
समुद्र तल से करीब 12 हजार फीट की ऊंचाई पर स्थित वसुधारा जलप्रपात अपनी लगभग 400 फीट ऊंची जलधारा,
प्राकृतिक सौंदर्य और धार्मिक मान्यताओं के लिए प्रसिद्ध है। मान्यता है कि इसी क्षेत्र में पांडव पुत्र सहदेव ने अपने प्राण त्यागे
थे, जिसके कारण यह स्थान श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र भी माना जाता है।















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