बिहार में कथित वोट चोरी और वोटर लिस्ट से नाम हटाने के आरोपों के बीच चुनाव आयोग की भूमिका पर सवाल उठते जा रहे हैं।
इस मुद्दे पर विपक्ष ने तीखा रुख अपनाया है और अब मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव लाने की तैयारी की खबरें सामने आ रही हैं। संसद के मानसून सत्र में यह मुद्दा गरमा सकता है।
विपक्षी दलों की बैठक में चर्चा
18 अगस्त को कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के कार्यालय में हुई INDIA गठबंधन की बैठक में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव लाने पर गंभीर विचार हुआ। सूत्रों के अनुसार, विपक्ष का आरोप है कि CEC का व्यवहार पक्षपातपूर्ण है और संवैधानिक मर्यादा के विपरीत है।
कांग्रेस सांसद सैयद नासिर हुसैन ने कहा कि अगर जरूरत पड़ी तो पार्टी संविधान के तहत उपलब्ध सभी लोकतांत्रिक उपायों को अपनाने के लिए तैयार है। हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि अभी तक पार्टी स्तर पर औपचारिक चर्चा नहीं हुई है।
हलफनामे की मांग पर घमासान
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने हाल ही में मीडिया को संबोधित करते हुए कांग्रेस सांसद राहुल गांधी द्वारा लगाए गए “वोट चोरी” के आरोपों को खारिज किया और उन्हें या तो सात दिन में हलफनामा देने या देश से माफी मांगने को कहा।
CEC ने कहा, “तीसरा कोई विकल्प नहीं है। यदि सात दिनों के भीतर हलफनामा प्राप्त नहीं होता, तो यह माना जाएगा कि आरोप निराधार हैं।”
इस पर राहुल गांधी ने पलटवार करते हुए कहा कि चुनाव आयोग भाजपा सांसद अनुराग ठाकुर से हलफनामा नहीं मांग रहा, जबकि उन्होंने भी यही आरोप लगाए थे। उन्होंने चुनाव आयोग पर “भाजपा के साथ पक्षपात करने” का आरोप लगाया।
विपक्षी दलों का संसद परिसर में विरोध प्रदर्शन
INDIA गठबंधन के सांसदों ने संसद परिसर में बिहार में चल रही स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) प्रक्रिया और कथित वोट चोरी के विरोध में प्रदर्शन किया। कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई ने कहा कि मुख्य चुनाव आयुक्त द्वारा प्रेस कॉन्फ्रेंस कर संवैधानिक पद की गरिमा को ठेस पहुंचाई गई है। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि CEC ने केवल विपक्ष से ही जवाब मांगा, जबकि भाजपा से कोई सवाल नहीं किया।
17 अगस्त को प्रेस कॉन्फ्रेंस में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने कहा कि चुनाव आयोग किसी पक्ष या विपक्ष में नहीं है। उन्होंने कहा, “हर राजनीतिक दल हमारे लिए बराबर है, क्योंकि सभी का पंजीकरण चुनाव आयोग में ही होता है।” उन्होंने यह भी कहा कि आयोग संविधान के अनुसार कार्य करता है और भविष्य में भी निष्पक्षता बनाए रखेगा।
महाभियोग प्रस्ताव की प्रक्रिया
भारत के संविधान के अनुसार, मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने के लिए संसद के दोनों सदनों में विशेष बहुमत से महाभियोग प्रस्ताव पारित करना होता है।
- इसके लिए सदन के कुल सदस्यों का कम-से-कम 50% उपस्थित होना चाहिए,
- और उपस्थित एवं मतदान करने वाले दो-तिहाई सदस्यों का समर्थन जरूरी है।
इस लिहाज से विपक्ष के लिए यह एक कठिन प्रक्रिया होगी, विशेषकर तब जब संसद में एनडीए का बहुमत है।
















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