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सरोकारों से साक्षात्कार

चारपाई पर ढोकर सड़क तक पहुंचाई गई बुजुर्ग महिला, 26 साल बाद भी सड़क का इंतजार कर रहा पणचुरा गांव

विकास के दावों के बीच सल्ट विकासखंड की जाख ग्रामसभा का पणचुरा तोक आज भी सड़क जैसी बुनियादी सुविधा से वंचित है।

इसका दर्द उस समय फिर सामने आया, जब एक 75 वर्षीय बुजुर्ग महिला को उपचार के लिए ग्रामीणों को चारपाई पर लिटाकर करीब तीन किलोमीटर पैदल सड़क तक पहुंचाना पड़ा।

बीमार बुजुर्ग महिला को चारपाई पर ले गए ग्रामीण

जानकारी के अनुसार, पणचुरा गांव निवासी भागुली देवी अपने बुजुर्ग पति के साथ रहती हैं। कुछ महीने पहले वह घर के चबूतरे से गिरकर घायल हो गई थीं।

सड़क सुविधा न होने के कारण उन्हें समय पर अस्पताल नहीं पहुंचाया जा सका और उनका उपचार घर पर ही चलता रहा।

हाल ही में उनकी तबीयत अधिक बिगड़ने पर परिजनों ने उन्हें बेहतर इलाज के लिए बाहर ले जाने का निर्णय लिया।

तीन किलोमीटर पैदल सफर के बाद पहुंचीं सड़क तक

ग्रामीणों और परिजनों ने भागुली देवी को चारपाई पर लिटाकर दुर्गम पहाड़ी रास्तों से मुख्य सड़क तक पहुंचाया।

ऊबड़-खाबड़ पगडंडियों और कठिन चढ़ाई-उतराई वाले लगभग तीन किलोमीटर लंबे रास्ते को पार करने में ग्रामीणों को करीब दो घंटे का समय लगा।

सड़क तक पहुंचने के बाद उन्हें वाहन से उपचार के लिए रवाना किया गया।

सड़क न होने से हर दिन झेलनी पड़ती हैं परेशानियां

ग्रामीणों का कहना है कि यह कोई पहली घटना नहीं है। गांव में सड़क सुविधा के अभाव में बीमार लोगों, गर्भवती महिलाओं और बुजुर्गों को अक्सर चारपाई या डंडी-कंडी के सहारे अस्पताल पहुंचाना पड़ता है।

वहीं राशन, गैस सिलेंडर और अन्य आवश्यक सामान भी लोगों को पैदल ढोकर गांव तक पहुंचाना पड़ता है।

पलायन की बड़ी वजह बनी सड़क की कमी

स्थानीय निवासी जगत सिंह के अनुसार सड़क न होने के कारण गांव के अधिकांश लोग रोजगार और बेहतर सुविधाओं की तलाश में पलायन कर चुके हैं।

गांव में अब मुख्य रूप से बुजुर्ग, महिलाएं और बच्चे ही रह गए हैं। उनका कहना है कि भागुली देवी को चारपाई पर सड़क तक ले जाना क्षेत्र की वास्तविक स्थिति को दर्शाता है।

26 वर्षों बाद भी अधूरा है सड़क का सपना

युवा ग्रामीण राहुल रावत ने बताया कि पिछले 26 वर्षों में सड़क जाख तक तो पहुंच गई,

लेकिन उससे आगे मात्र तीन किलोमीटर दूर स्थित पणचुरा गांव तक आज भी नहीं पहुंच सकी है।

इसका खामियाजा ग्रामीणों को रोजाना भुगतना पड़ रहा है।

‘सड़क नहीं तो वोट नहीं’ का भी नहीं हुआ असर

ग्रामीणों का कहना है कि सड़क निर्माण की मांग को लेकर वे वर्षों से संघर्ष कर रहे हैं।

पंचायत चुनाव के दौरान उन्होंने “सड़क नहीं तो वोट नहीं” का नारा देते हुए मतदान बहिष्कार तक किया था।

बावजूद इसके सड़क निर्माण की दिशा में कोई ठोस पहल नहीं हो सकी।

ग्रामीणों ने फिर उठाई सड़क निर्माण की मांग

भागुली देवी की घटना के बाद ग्रामीणों ने एक बार फिर शासन-प्रशासन से गांव को सड़क सुविधा से जोड़ने की मांग की है।

उनका कहना है कि जब तक गांव तक सड़क नहीं पहुंचेगी, तब तक क्षेत्र के लोगों को इसी तरह कठिन परिस्थितियों का सामना करना पड़ता रहेगा।

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