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‘मुकदमा ही बन जाता है सज़ा’ फ्री स्पीच पर पूर्व CJI का कड़ा संदेश

अभिव्यक्ति की आज़ादी पर सबसे बड़ा खतरा: केस की देरी और लंबी न्यायिक प्रक्रिया

पूर्व मुख्य न्यायाधीश बी.आर. गवई ने फ्री स्पीच से जुड़े मामलों पर ऐसा बयान दिया है,

जिसने न्यायिक व्यवस्था, सरकार और समाज तीनों को सोचने पर मजबूर कर दिया है।

उन्होंने साफ कहा कि अगर बोलने की आज़ादी से जुड़े केस सालों तक चलते रहें, तो मुकदमा अपने आप में ही सज़ा बन जाता है।

मुंबई में आयोजित जस्टिस के.टी. देसाई मेमोरियल लेक्चर में उन्होंने कहा

“भले ही कोई व्यक्ति अंत में बरी क्यों न हो जाए, लेकिन वर्षों तक चली कानूनी लड़ाई उसकी आज़ादी, रोज़गार और सामाजिक इज़्ज़त को बर्बाद कर देती है।”

देरी का असर: कोर्ट से पहले सज़ा भुगतना

पूर्व CJI ने चिंता जताई कि आज अदालतों में ऐसे केस बढ़ते जा रहे हैं, जिनमें:

  • FIR तुरंत हो जाती है
  • जमानत मिलने में महीनों-साल लगते हैं
  • ट्रायल की कोई निश्चित समय-सीमा नहीं होती
  • आरोपी लंबे समय तक जेल में रहता है

गवई ने कहा कि ये सब मिलकर अभिव्यक्ति की आज़ादी को कुचलने का हथियार बन जाते हैं

जब अदालत से राहत देरी से मिले, तो न्याय भी अपना प्रभाव खो देता है।

प्रेस और पत्रकारिता पर बढ़ता दबाव

अपने भाषण में उन्होंने विशेष रूप से पत्रकारों का ज़िक्र किया। उन्होंने कहा कि डिजिटल युग में पत्रकार ही वह कड़ी हैं, जो लोकतंत्र और जनता को सच से जोड़ते हैं।

उनका साफ संदेश था —
“अगर पत्रकार डर में लिखने लगें, तो लोकतंत्र दम तोड़ देता है।”

उन्होंने कहा कि अदालतों को यह सुनिश्चित करना होगा कि:

  • आलोचनात्मक आवाज़ दबाई न जाए
  • ‘राजद्रोह’ जैसे आरोपों का दुरुपयोग न हो
  • कानून डर पैदा करने का औज़ार न बने

इंटरनेट पर भी बोलने का अधिकार

पूर्व CJI ने इंटरनेट की भूमिका को भी बेहद अहम बताया।

उन्होंने कहा कि आज अगर किसी की आवाज़ दबानी हो, तो उसे ऑनलाइन चुप कर देना सबसे आसान तरीका बन गया है।

उन्होंने पिछली सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणियों को याद दिलाया कि:

  • इंटरनेट आज बोलने की आज़ादी का माध्यम है
  • लंबे समय तक इंटरनेट बंद रखना असंवैधानिक है
  • सूचना तक पहुंच लोकतांत्रिक अधिकार है

‘बरी होना हार नहीं मिटाता’

उन्होंने सबसे तीखा बयान देते हुए कहा —

“बाद में बरी होना, पहले झेले गए अपमान, कैद और आर्थिक नुकसान को नहीं मिटा सकता।”

पूर्व CJI गवई का मानना है कि आज सबसे बड़ा सुधार यह होना चाहिए कि:

  • फ्री-स्पीच केसों का फास्ट-ट्रैक ट्रायल
  • गिरफ्तारी से पहले ठोस जांच
  • बोलने को अपराध मानने की मानसिकता खत्म हो
  • जमानत को नियम और जेल को अपवाद बनाया जाए
https://regionalreporter.in/meeting-of-bhagirathi-kala-sangam-at-srinagar-garhwal/
https://youtu.be/YRWlr0OJc7M?si=CzIqRcNyKhrsqT2f
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