शिक्षक भर्ती पर रोक और सैनिक स्कूल की फिर कवायद
उत्तराखंड में शिक्षा व्यवस्था से जुड़ी दो अहम खबरें सामने आई हैं।
एक तरफ अशासकीय महाविद्यालयों में शिक्षकों की भर्ती फिलहाल रोक दी गई है और नई नियमावली बनने तक नियुक्तियां स्थगित रहेंगी।
वहीं दूसरी ओर राज्य में प्रस्तावित पहले बालिका सैनिक स्कूल की योजना चार साल बाद भी धरातल पर नहीं उतर पाई है।
अब शिक्षा विभाग ने इस मामले में जिलों से नए सिरे से प्रस्ताव मांगे हैं।
अशासकीय महाविद्यालयों में शिक्षक भर्ती पर रोक
उत्तराखंड के अशासकीय महाविद्यालयों में शिक्षकों की नियमित भर्ती फिलहाल स्थगित कर दी गई है।
उच्च शिक्षा निदेशक प्रो. वीएन खाली ने इस संबंध में आदेश जारी किया है।
विभाग का कहना है कि भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता को लेकर लगातार शिकायतें मिल रही थीं।
कई मामलों में चहेतों को नियुक्ति देने के आरोप भी सामने आए हैं।
नई नियमावली बनने तक रुकी रहेगी भर्ती
भर्ती प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के लिए विभाग नई नियमावली तैयार कर रहा है। जब तक यह नियमावली तैयार नहीं हो जाती,
तब तक अशासकीय महाविद्यालयों में नियमित शिक्षक भर्ती नहीं होगी।
भर्ती पर रोक ऐसे समय लगी है जब प्रदेश के कई अशासकीय महाविद्यालय पहले से शिक्षकों की कमी से जूझ रहे हैं।
कुछ कॉलेजों में स्वीकृत पदों के मुकाबले 40 फीसदी से भी कम शिक्षक उपलब्ध बताए जा रहे हैं।
इससे विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित होने की चिंता भी बनी हुई है।
अस्थायी व्यवस्था से जारी रहेगी पढ़ाई
नियमित भर्ती स्थगित रहने के दौरान पठन-पाठन प्रभावित न हो,
इसके लिए संबंधित कॉलेजों के प्राचार्य और प्रबंध समितियों को अपने खर्च पर अस्थायी व्यवस्था करने के निर्देश दिए गए हैं।
अशासकीय विद्यालयों और महाविद्यालयों में भर्ती के लिए आयोग के माध्यम से नियुक्ति कराने का प्रस्ताव भी सामने आया था,
लेकिन यह मामला अभी तक लंबित है। फिलहाल विभाग का फोकस नई भर्ती नियमावली तैयार करने पर है।
चार साल से अटका बालिका सैनिक स्कूल का प्रस्ताव
दूसरी ओर, उत्तराखंड में बेटियों के लिए पहला बालिका सैनिक स्कूल खोलने की योजना भी लंबे समय से अटकी हुई है।
इस योजना को लेकर वर्ष 2022 में पहल शुरू हुई थी, लेकिन चार साल बाद भी स्कूल की स्थापना को लेकर अंतिम फैसला नहीं हो सका है।
2022 में दिए गए थे प्रस्ताव तैयार करने के निर्देश
शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने 1 जुलाई 2022 को सचिव विद्यालयी शिक्षा को बालिका सैनिक स्कूल की स्थापना के लिए प्रस्ताव तैयार करने के निर्देश दिए थे।
इसके बाद 11 जुलाई 2022 को शासन ने शिक्षा महानिदेशक विद्यालयी शिक्षा से राज्य में बालिका सैनिक स्कूल की स्थापना के लिए स्पष्ट प्रस्ताव मांगा था।
हालांकि, प्रस्ताव तैयार होकर शासन तक नहीं पहुंच सका और मामला आगे नहीं बढ़ पाया।
अब सभी जिलों से मांगे गए प्रस्ताव
करीब चार साल बाद माध्यमिक शिक्षा विभाग ने इस मामले में फिर से कार्रवाई शुरू की है।
माध्यमिक शिक्षा निदेशक विनोद प्रसाद सिमल्टी ने 21 जुलाई 2026 को सभी मुख्य शिक्षा अधिकारियों को निर्देश जारी किए हैं।
जिलों से उनकी आवश्यकता के अनुसार बालिका सैनिक स्कूल और अन्य सैनिक स्कूलों की स्थापना के लिए प्रस्ताव मांगे गए हैं।
जिलों से प्रस्ताव मिलने के बाद उन्हें शासन को भेजा जाएगा और आगे की कार्रवाई की जाएगी।
बेटियों को सैन्य शिक्षा से जोड़ने की पहल
उत्तराखंड सैन्य परंपरा के लिए जाना जाता है।
ऐसे में बालिकाओं के लिए सैनिक स्कूल की स्थापना को बेटियों को सैन्य शिक्षा और रक्षा क्षेत्र में करियर के लिए तैयार करने की अहम पहल माना जा रहा है।
फिलहाल दोनों मामलों में शिक्षा विभाग की अगली कार्रवाई महत्वपूर्ण होगी। एक तरफ शिक्षक भर्ती के लिए नई नियमावली का इंतजार है,
तो दूसरी तरफ बालिका सैनिक स्कूल के लिए जिलों से प्रस्ताव आने का इंतजार किया जा रहा है।















Leave a Reply