नए पैरामेडिकल कोर्स की तैयारी; प्राचार्य डॉ. C.M.S. रावत ने बताई संस्थान की पूरी तस्वीर
श्रीनगर मेडिकल कॉलेज में मेडिकल शिक्षा से लेकर मरीजों की सुविधाओं तक लगातार विस्तार किया जा रहा है।
वीर चंद्र सिंह गढ़वाली राजकीय आयुर्विज्ञान एवं शोध संस्थान, श्रीनगर के प्राचार्य एवं डीन डॉ. C.M.S. रावत ने
‘रीजनल रिपोर्टर’ से बातचीत में संस्थान की उपलब्धियों, मेडिकल सीटों में बढ़ोतरी, जांच सुविधाओं,
आउटसोर्सिंग और PPP व्यवस्था के साथ-साथ नए पैरामेडिकल कोर्स शुरू करने की तैयारियों की जानकारी दी।
डॉ. C.M.S. रावत VCSGGIMS&R में Principal और Dean के साथ Community Medicine विभाग में Professor के रूप में भी दर्ज हैं।
राष्ट्रीय और संस्थागत दस्तावेजों में भी उन्हें संस्थान के Principal & Dean के रूप में दर्ज किया गया है।
2007 में शुरू हुआ था मेडिकल कॉलेज
डॉ. रावत के मुताबिक, श्रीनगर मेडिकल कॉलेज उत्तराखंड का पहला सरकारी मेडिकल कॉलेज है और इसकी शुरुआत वर्ष 2007 में हुई थी।
पिछले वर्षों में संस्थान ने मेडिकल शिक्षा, मरीजों की सुविधाओं और चिकित्सा जांच के क्षेत्र में लगातार विस्तार किया है।
मेडिकल कॉलेज की स्थापना के बाद से यहां MBBS शिक्षा के साथ PG और पैरामेडिकल प्रशिक्षण की सुविधाएं भी विकसित हुई हैं।
संस्थान की शैक्षणिक स्थिति को लेकर पुराने आधिकारिक दस्तावेजों में भी डॉ. C.M.S. रावत को Principal & Dean के रूप में दर्ज किया गया है।
MBBS की 100 से 150 और PG सीटें 4 से बढ़कर 64
प्राचार्य डॉ. रावत ने बताया कि मेडिकल कॉलेज में MBBS की सीटें 100 से बढ़कर 150 हो चुकी हैं।
वहीं PG सीटों में भी बड़ा विस्तार हुआ है और उनके मुताबिक PG सीटें 4 से बढ़कर 64 हो गई हैं।
उन्होंने बताया कि अब तक 65 विद्यार्थी PG की पढ़ाई पूरी कर चुके हैं।
इसके अलावा पैरामेडिकल क्षेत्र में भी 99 सीटें उपलब्ध हैं।
मेडिकल शिक्षा के विस्तार का असर संस्थान के विभिन्न विभागों पर भी दिखाई दे रहा है।
अधिक सीटों और विद्यार्थियों के साथ अस्पताल और मेडिकल कॉलेज में मानव संसाधन तथा आधारभूत सुविधाओं की जरूरत भी लगातार बढ़ रही है।
पैथोलॉजी, माइक्रोबायोलॉजी और बायोकेमिस्ट्री की जांचों में कई गुना बढ़ोतरी
डॉ. रावत ने बताया कि वर्ष 2009 की तुलना में वर्ष 2025 तक मेडिकल कॉलेज में पैथोलॉजी,
माइक्रोबायोलॉजी और बायोकेमिस्ट्री की जांचों की संख्या में कई गुना वृद्धि हुई है।
उनके मुताबिक, इसके पीछे बढ़ती आबादी और मरीजों की संख्या के साथ जांच सुविधाओं की गुणवत्ता,
उपलब्ध मैनपावर और अस्पताल की सेवाओं का विस्तार प्रमुख कारण हैं।
यानी मेडिकल कॉलेज में सिर्फ मेडिकल सीटों का विस्तार नहीं हुआ, बल्कि मरीजों के लिए जांच और उपचार से जुड़ी सुविधाओं का दायरा भी बढ़ा है।
आउटसोर्सिंग पर बोले प्राचार्य- यह supplementary व्यवस्था
मेडिकल कॉलेज में कुछ जांच और सेवाओं को आउटसोर्स किए जाने को लेकर भी सवाल किया गया।
इस पर डॉ. रावत ने कहा कि आउटसोर्सिंग को supplementary यानी पूरक व्यवस्था के तौर पर इस्तेमाल किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि जहां इन-हाउस व्यवस्था उपलब्ध है, वहां उसका उपयोग किया जा रहा है,
जबकि जरूरत के अनुसार आउटसोर्स सेवाओं की मदद ली जा रही है।
उन्होंने यह भी कहा कि आयुष्मान योजना के तहत पात्र मरीजों को उपलब्ध सेवाएं मुफ्त दी जाती हैं।
रेडियोलॉजी में इन-हाउस और आउटसोर्स दोनों व्यवस्था
रेडियोलॉजी सेवाओं को लेकर डॉ. रावत ने बताया कि फिलहाल इन-हाउस और आउटसोर्स दोनों व्यवस्थाएं चल रही हैं।
उनके मुताबिक, जैसे-जैसे मेडिकल कॉलेज की अपनी रेडियोलॉजी व्यवस्था पूरी तरह विकसित होगी, उसके बाद आउटसोर्स व्यवस्था को हटाने या उसमें बदलाव करने पर विचार किया जा सकता है।
PPP मोड पर डायलिसिस यूनिट की तैयारी
डायलिसिस यूनिट को लेकर भी प्राचार्य ने महत्वपूर्ण जानकारी दी। उन्होंने बताया कि डायलिसिस सेवाओं को PPP मोड पर
संचालित करने के लिए हंस फाउंडेशन के साथ MOU की प्रक्रिया चल रही है।
प्राचार्य के मुताबिक, PPP मॉडल के जरिए डायलिसिस सेवाओं की गुणवत्ता और निरंतरता बनाए रखने में मदद मिल सकती है।
हालांकि, MOU और PPP व्यवस्था को अंतिम रूप मिलने के बाद ही इसकी आधिकारिक स्थिति स्पष्ट होगी।
श्रीनगर और हरिद्वार मेडिकल कॉलेज की तुलना पर बोले डॉ. रावत
श्रीनगर और हरिद्वार मेडिकल कॉलेज की तुलना को लेकर डॉ. रावत ने कहा कि दोनों संस्थानों की परिस्थितियां और विकास का चरण अलग-अलग हैं।
उन्होंने बताया कि उन्होंने श्रीनगर मेडिकल कॉलेज में लंबे समय तक सेवाएं दी हैं और इसके बाद करीब 11 महीने हरिद्वार मेडिकल कॉलेज में भी काम किया।
उनके मुताबिक, श्रीनगर मेडिकल कॉलेज करीब 18 वर्षों से संचालित संस्थान है और इसकी अपनी एक स्थापित व्यवस्था है,
जबकि हरिद्वार मेडिकल कॉलेज अभी विकास के शुरुआती चरण में है।
डॉ. रावत ने उम्मीद जताई कि समय के साथ हरिद्वार मेडिकल कॉलेज भी उत्तराखंड के बेहतर मेडिकल संस्थानों में शामिल होगा।
पुराने प्राचार्य के कार्यों का भी किया जिक्र
श्रीनगर मेडिकल कॉलेज में दोबारा जिम्मेदारी मिलने के बाद संस्थान में आए बदलावों पर डॉ. रावत ने अपने पूर्ववर्ती प्राचार्य प्रोफेसर आर.एस. सयाना के कार्यों का भी उल्लेख किया।
उन्होंने कहा कि उनके जाने के बाद प्रोफेसर आर.एस. सयाना ने कॉलेज की कई कमियों को दूर करने की दिशा में काम किया।
इनमें अस्पताल को नई मान्यता दिलाने, PRO सेक्शन की व्यवस्था, निर्माण कार्यों और आउटडोर गतिविधियों को बढ़ाने जैसे काम शामिल रहे।
अब डॉ. रावत के मुताबिक, मेडिकल कॉलेज में मैनपावर, निर्माण और दूसरी व्यवस्थाओं से जुड़े जो गैप बाकी हैं, उन्हें शासन के स्तर पर दूर करने की दिशा में काम किया जाएगा।
अगले सत्र से शुरू हो सकते हैं नए पैरामेडिकल कोर्स
मेडिकल कॉलेज में Allied Health Sciences के तहत नए पैरामेडिकल कोर्स शुरू करने की तैयारी भी की जा रही है।
प्राचार्य के मुताबिक, प्रस्तावित पाठ्यक्रमों में-
- Respiratory Technician
- Dialysis Technician
- Dietetics and Nutrition
- Health Informatics
जैसे कोर्स शामिल हैं।
इन पाठ्यक्रमों के लिए शासन से अनुमति और विश्वविद्यालय स्तर पर आवश्यक स्वीकृति लेने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।
कॉलेज प्रशासन का प्रयास है कि यदि सभी जरूरी मंजूरियां समय पर मिलती हैं तो इन पाठ्यक्रमों को अगले सत्र से शुरू किया जा सके।
नए कोर्स से स्थानीय युवाओं को मिलेगा अवसर
डॉ. रावत के मुताबिक, नए पैरामेडिकल कोर्स शुरू होने से स्थानीय विद्यार्थियों को मेडिकल क्षेत्र में नए शैक्षणिक और रोजगार के अवसर मिलेंगे।
साथ ही मेडिकल कॉलेज और अस्पताल को प्रशिक्षित पैरामेडिकल मानव संसाधन उपलब्ध होगा।
इससे पैथोलॉजी, माइक्रोबायोलॉजी, बायोकेमिस्ट्री, ऑपरेशन थिएटर और रेडियोलॉजी जैसे विभागों को भी प्रशिक्षित स्टाफ मिलने में मदद मिल सकती है।
उन्होंने बताया कि इससे पहले शुरू किए गए पैरामेडिकल पाठ्यक्रमों से भी इन विभागों को मानव संसाधन उपलब्ध हुआ है।
राजनीतिक दखल के सवाल पर बोले प्राचार्य
श्रीनगर मेडिकल कॉलेज में दोबारा प्राचार्य की जिम्मेदारी मिलने को लेकर राजनीतिक दखल के सवाल पर
डॉ. रावत ने कहा कि उनका ट्रांसफर और तैनाती शासन की सामान्य प्रशासनिक प्रक्रिया का हिस्सा है।
उन्होंने कहा कि किसी प्राचार्य या चिकित्सक का एक संस्थान से दूसरे संस्थान में स्थानांतरण शासन स्तर पर लिया गया निर्णय होता है और वह शासन के निर्णय का पालन करते हैं।
डॉ. रावत ने खुद को Academician, Administrator और Manager बताते हुए कहा कि उनका फोकस मेडिकल कॉलेज
की Teaching, Training, Research और मरीजों की बेहतर देखभाल पर है।
उनके मुताबिक मेडिकल कॉलेज और अस्पताल टीम अप्रोच से चलते हैं और उनका काम किसी राजनीतिक दृष्टिकोण से नहीं, बल्कि संस्थान और मरीजों की जरूरत के हिसाब से होना चाहिए।
18 साल बाद भी निर्माण क्यों
मेडिकल कॉलेज में पिछले करीब 18 वर्षों से लगातार निर्माण कार्य चलने को लेकर भी सवाल किया गया।
इस पर डॉ. रावत ने कहा कि किसी बड़े मेडिकल संस्थान में निर्माण और विस्तार एक सतत प्रक्रिया है।
जैसे-जैसे विद्यार्थियों, डॉक्टरों, रेजिडेंट और अन्य कर्मचारियों की संख्या बढ़ती है,
वैसे-वैसे आवासीय और संस्थागत सुविधाओं की जरूरत भी बढ़ती जाती है।
प्राचार्य के मुताबिक, संस्थान में करीब 150 फैकल्टी, 300 रेजिडेंट, 750 विद्यार्थी, 150 इंटर्न, 99 पैरामेडिकल विद्यार्थी और करीब 800 सपोर्टिंग स्टाफ हैं।
इतने बड़े मानव संसाधन के लिए हॉस्टल, आवास, विभागीय भवन और दूसरी संस्थागत सुविधाओं का विस्तार जरूरी है।
सुपर स्पेशियलिटी सेवाओं के लिए भी बढ़ेगा ढांचा
डॉ. रावत ने बताया कि आने वाले समय में सुपर स्पेशियलिटी सेवाओं का विस्तार होने के साथ
अतिरिक्त फैकल्टी और रेजिडेंट की जरूरत भी होगी।
इसके लिए मेडिकल कॉलेज के आधारभूत ढांचे का विस्तार जरूरी है।
उन्होंने बताया कि इसके लिए GVK की जमीन का भी इस्तेमाल किया जा रहा है।
यानी मेडिकल कॉलेज का विस्तार केवल मौजूदा जरूरतों तक सीमित नहीं है, बल्कि भविष्य में बढ़ने वाली मेडिकल और स्वास्थ्य सेवाओं को ध्यान में रखकर भी किया जा रहा है।
गढ़वाल के लिए क्यों महत्वपूर्ण है श्रीनगर मेडिकल कॉलेज
श्रीनगर मेडिकल कॉलेज गढ़वाल क्षेत्र के लिए एक महत्वपूर्ण स्वास्थ्य संस्थान है। पहाड़ी जिलों से बड़ी संख्या में मरीज इलाज के लिए श्रीनगर बेस अस्पताल पहुंचते हैं।
चारधाम यात्रा मार्ग पर स्थित होने के कारण यात्रा सीजन में भी इसकी भूमिका महत्वपूर्ण हो जाती है।
गंभीर मरीजों के लिए विशेषज्ञ चिकित्सा सुविधाओं का स्थानीय स्तर पर उपलब्ध होना पूरे गढ़वाल क्षेत्र के लिए बड़ी जरूरत है।
मेडिकल कॉलेज में कार्डियक कैथ लैब जैसी सुविधाओं का विस्तार भी इसी दिशा में महत्वपूर्ण कदम रहा है।
जुलाई 2024 में राज्यपाल ने VCSG मेडिकल कॉलेज में कार्डियक कैथ लैब का उद्घाटन किया था।
सीटों से लेकर सुविधाओं तक विस्तार, अब नई चुनौतियां
श्रीनगर मेडिकल कॉलेज ने पिछले वर्षों में मेडिकल शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में विस्तार किया है।
MBBS और PG सीटों में बढ़ोतरी से लेकर जांच सुविधाओं, पैरामेडिकल शिक्षा और विशेषज्ञ सेवाओं तक संस्थान का दायरा बढ़ा है।
अब नए Allied Health Sciences पाठ्यक्रम, डायलिसिस यूनिट का प्रस्तावित PPP संचालन, इन-हाउस सेवाओं का विस्तार और निर्माण कार्य मेडिकल कॉलेज के अगले चरण की दिशा तय करेंगे।
लेकिन विस्तार के साथ सवाल भी कम नहीं हैं-मैनपावर की जरूरत, आउटसोर्सिंग पर निर्भरता,
PPP मॉडल, निर्माण कार्यों की गति और मरीजों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराना आने वाले समय में संस्थान की बड़ी चुनौतियां रहेंगी।
श्रीनगर मेडिकल कॉलेज की तस्वीर अब सिर्फ एक मेडिकल कॉलेज की नहीं, बल्कि गढ़वाल क्षेत्र के बड़े स्वास्थ्य और मेडिकल एजुकेशन हब के रूप में विकसित होते संस्थान की है।















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