डोईवाला थाना क्षेत्र में सरकारी शिक्षिका सृष्टि कंडारी की संदिग्ध मौत के मामले में
कथित आरोपी सास प्रवीणा खत्री को एक बार फिर कोर्ट से राहत नहीं मिली है।
प्रभारी सत्र न्यायाधीश महेश चंद्र कौशिक की अदालत ने प्रवीणा खत्री की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी।
अदालत ने मामले की गंभीरता और विवेचना में सामने आए तथ्यों को देखते हुए अग्रिम जमानत देने का पर्याप्त आधार नहीं माना।
इस मामले में इससे पहले भी 1 अगस्त को प्रवीणा खत्री की अंतरिम अग्रिम जमानत याचिका खारिज हो चुकी है।
अब दोबारा अग्रिम जमानत से राहत नहीं मिलने के बाद आरोपी पक्ष के सामने आगे की कानूनी प्रक्रिया का रास्ता बचा है।
नवंबर 2025 में हुई थी सृष्टि की शादी
पौड़ी गढ़वाल के श्रीकोट निवासी सृष्टि कंडारी सरकारी शिक्षिका थीं।
उनका विवाह नवंबर 2025 में देहरादून के हर्रावाला क्षेत्र निवासी सौरभ खत्री से हुआ था।
सौरभ खत्री के उत्तराखंड सचिवालय में निजी सचिव के पद पर कार्यरत होने की जानकारी सामने आई है।
शादी के करीब आठ महीने बाद सृष्टि की मौत हो गई।
29 जुलाई को हुई थी सृष्टि की मौत
29 जुलाई 2026 को सृष्टि अपने ससुराल में संदिग्ध परिस्थितियों में मृत मिली थीं।
ससुराल पक्ष की ओर से इसे आत्महत्या बताया गया, जबकि मायके पक्ष ने सृष्टि की मौत को लेकर गंभीर सवाल उठाए
और दहेज प्रताड़ना समेत कई आरोप लगाए।
मृतका की मां की शिकायत के आधार पर पुलिस ने पति सौरभ खत्री, सास प्रवीणा खत्री
और ननद चारू के खिलाफ मामला दर्ज किया था।
उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 80(2) के तहत
दहेज मृत्यु का मुकदमा दर्ज किया और जांच की जिम्मेदारी पुलिस अधिकारी को सौंपी गई थी।
मौत से पहले सामने आया था वीडियो
इस मामले ने उस समय ज्यादा तूल पकड़ा जब सृष्टि की मौत से पहले रिकॉर्ड किया गया एक वीडियो सामने आया।
रिपोर्टों के मुताबिक वीडियो में सृष्टि ने अपने परिवार को संबोधित करते हुए
ससुराल में मानसिक प्रताड़ना और कथित तौर पर ‘मनहूस’ कहे जाने की बात कही थी।
इसी वीडियो को मामले की जांच में अहम कड़ी के तौर पर देखा जा रहा है।
अभियोजन पक्ष ने अदालत में भी इसी वीडियो का हवाला दिया।
अभियोजन के मुताबिक सृष्टि ने आत्महत्या से पहले अपनी मां को व्हाट्सऐप के जरिए करीब छह मिनट का वीडियो भेजा था,
जिसमें उसने पति, सास और ननद पर प्रताड़ना के आरोप लगाए थे।
मायके पक्ष ने लगाए दहेज प्रताड़ना के आरोप
सृष्टि के मायके पक्ष ने आरोप लगाया कि शादी के बाद से ही उसे दहेज और अन्य बातों को लेकर प्रताड़ित किया जा रहा था।
विवेचना के दौरान सृष्टि की बहन रुचि, जीजा पंकज सिंह राणा और भाई देवांशु उर्फ गुंजन खंडूरी के बयान भी दर्ज किए गए हैं।
अभियोजन के अनुसार इन बयानों में भी सृष्टि को कथित तौर पर दहेज की मांग को लेकर प्रताड़ित किए जाने और ताने दिए जाने की बात सामने आई है।
हालांकि, ये सभी आरोप फिलहाल विवेचना और न्यायिक प्रक्रिया का हिस्सा हैं, और इन आरोपों की अंतिम पुष्टि अदालत के निर्णय से ही होगी।
सास ने आरोपों को बताया गलत
वहीं प्रवीणा खत्री की ओर से कोर्ट में आरोपों को गलत बताया गया।
बचाव पक्ष ने कहा कि एफआईआर गलत तथ्यों पर आधारित है और सृष्टि को दहेज के लिए प्रताड़ित नहीं किया गया।
बचाव पक्ष ने यह भी दलील दी कि प्रवीणा खत्री की उम्र 66 वर्ष से अधिक है और वह शिक्षा विभाग में लेक्चरर पद से सेवानिवृत्त हैं।
पति की बीमारी और मौत का भी दिया गया हवाला
अग्रिम जमानत याचिका में प्रवीणा खत्री के पति मनोहर खत्री की गंभीर बीमारी का भी हवाला दिया गया।
बचाव पक्ष के मुताबिक वह ब्रेन कैंसर की चौथी स्टेज में थे।
जनवरी 2026 में तबीयत बिगड़ने के बाद उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया था और बाद में दिल्ली रेफर किया गया।
बचाव पक्ष के अनुसार मनोहर खत्री का 26 जुलाई 2026 को निधन हुआ था। इसके बाद 29 जुलाई को सृष्टि की मौत हुई।
सरकार ने CB-CID जांच के दिए आदेश
मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच को लेकर भी बड़ा कदम उठाया गया है।
रिपोर्टों के मुताबिक सृष्टि की संदिग्ध मौत और उससे जुड़े आरोपों की जांच
CB-CID से कराने के लिखित आदेश जारी किए गए हैं। इससे मामले की जांच का दायरा और महत्वपूर्ण हो गया है।
CB-CID जांच के दौरान सामने आए तथ्यों, वीडियो, परिवार के बयानों,
पुलिस की अब तक की विवेचना और अन्य साक्ष्यों की पड़ताल की जाएगी।
कोर्ट ने क्यों नहीं दी अग्रिम जमानत
अदालत ने मामले की परिस्थितियों और उपलब्ध रिकॉर्ड को देखते हुए आरोपी सास को अग्रिम जमानत देने से इनकार किया।
कोर्ट ने इस बात को भी महत्वपूर्ण माना कि सृष्टि की शादी को अभी सात वर्ष पूरे नहीं हुए थे और उसकी मौत ससुराल में असामान्य परिस्थितियों में हुई।
मामले की विवेचना अभी जारी है। ऐसे में कोर्ट ने उपलब्ध सामग्री के आधार पर अग्रिम जमानत के लिए पर्याप्त आधार नहीं पाया और प्रवीणा खत्री की याचिका खारिज कर दी।
पहले भी मिल चुकी है कोर्ट से राहत नहीं
प्रवीणा खत्री की ओर से इससे पहले 1 अगस्त को अंतरिम अग्रिम जमानत के लिए याचिका दायर की गई थी।
उस समय भी अदालत ने मामले की गंभीरता को देखते हुए अंतरिम राहत देने से इनकार कर दिया था।
इसके बाद 10 अगस्त को जमानत से जुड़ी सुनवाई हुई और अब एक बार फिर अग्रिम जमानत याचिका खारिज हो गई है।
आगे क्या होगा
फिलहाल मामले की विवेचना जारी है और CB-CID जांच के बाद सामने आने वाले तथ्यों पर सभी की नजर रहेगी।
सृष्टि की मौत से जुड़े आरोपों की वास्तविकता जांच और न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगी।
वहीं, आरोपी पक्ष को भी अदालत में अपना बचाव रखने का पूरा कानूनी अधिकार है।















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