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कोटद्वार ‘बाबा दुकान’ विवाद: हाईकोर्ट से दीपक कुमार को झटका, याचिका खारिज

जांच में सहयोग के निर्देश, सोशल मीडिया से दूरी बनाने को कहा

उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने कोटद्वार के चर्चित ‘बाबा दुकान’ प्रकरण में खुद को ‘मोहम्मद दीपक’

बताने वाले जिम संचालक दीपक कुमार की याचिका पर सुनवाई करते हुए उन्हें बड़ा झटका दिया है।

न्यायमूर्ति राकेश थपलियाल की एकलपीठ ने याचिका को निस्तारित करते हुए स्पष्ट किया कि याचिकाकर्ता को जांच में पुलिस के साथ पूरा सहयोग करना होगा।

साथ ही अदालत ने उन्हें अनावश्यक रूप से सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म से दूर रहने की हिदायत दी, ताकि जांच प्रभावित न हो।

याचिकाकर्ता का पक्ष: पुलिस ने नहीं की कार्रवाई

सुनवाई के दौरान दीपक कुमार के अधिवक्ता ने अदालत को बताया कि उनके मुवक्किल

ने अज्ञात लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया था, लेकिन पुलिस ने उस पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं की।

उनका कहना था कि घटना में शामिल लोगों के नाम बताए जाने के बावजूद पुलिस ने उन्हें नामजद नहीं किया,

जबकि दीपक कुमार मौके पर भीड़ को शांत कराने गए थे। इसके उलट पुलिस ने उन्हीं के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर दिया।

सरकार का पक्ष: वीडियो में दिखे आरोपी, 22 लोगों पर केस

राज्य सरकार की ओर से कहा गया कि घटना के समय दीपक कुमार मौके पर मौजूद थे और

उनका भीड़ के साथ धक्का-मुक्की करते हुए वीडियो वायरल हुआ है।

इसी आधार पर पुलिस ने दीपक कुमार सहित 22 लोगों की पहचान कर उनके खिलाफ मुकदमा दर्ज किया है।

अब तक इस प्रकरण में कुल पांच मुकदमे दर्ज किए जा चुके हैं और जांच जारी है।

अदालत का रुख: राहत नहीं, याचिका निस्तारित

दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ता को कोई राहत नहीं दी और याचिका को निस्तारित कर दिया।

अदालत ने साफ किया कि जांच प्रक्रिया को प्रभावित करने की अनुमति नहीं दी जा सकती।

पहले भी लगी थी फटकार

19 मार्च की सुनवाई के दौरान भी अदालत ने दीपक कुमार को फटकार लगाई थी।

अदालत ने पूछा था कि जब याचिकाकर्ता स्वयं एक ‘संदिग्ध आरोपी’ है तो वह पुलिस सुरक्षा कैसे मांग सकता है।

अदालत ने ऐसी याचिकाओं को जांच एजेंसियों पर दबाव बनाने और मामले को सनसनीखेज बनाने की कोशिश बताया था।

पुलिस पर कार्रवाई की मांग भी खारिज

याचिका में पुलिस अधिकारियों के खिलाफ विभागीय जांच की मांग भी की गई थी,

लेकिन अदालत ने कहा कि रिकॉर्ड में ऐसे कोई ठोस सबूत नहीं हैं, जिनके आधार पर कार्रवाई की जा सके।

जांच लंबित रहते इस प्रकार की मांग करना प्रक्रिया को प्रभावित करने का प्रयास प्रतीत होता है।

दान और वायरल वीडियो भी बना मुद्दा

सुनवाई के दौरान यह भी सामने आया कि वायरल वीडियो के बाद दीपक कुमार को लोगों का समर्थन मिला

और उन्हें 100 से 500 रुपये तक के छोटे-छोटे चंदे मिले।

उनके अनुसार कुल करीब 80 हजार रुपये प्राप्त हुए, जिसके बाद उन्होंने अपने खाते की गतिविधि बंद कर दी।

क्या है पूरा मामला?

गौरतलब है कि 26 जनवरी 2026 को कोटद्वार में ‘बाबा’ नाम की दुकान को लेकर विवाद हुआ था।

कुछ संगठनों के कार्यकर्ताओं ने नाम पर आपत्ति जताई, जिसके बाद विवाद बढ़ गया।

इसी दौरान दीपक कुमार दुकानदार के समर्थन में सामने आए और भीड़ के पूछने पर खुद को ‘मोहम्मद दीपक’ बताया।

इसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद मामला प्रदेश और देशभर में चर्चा का विषय बन गया।

https://regionalreporter.in/bageshwar-khadiya-mining-highcourt-order-uttarakhand/
https://youtu.be/5u7clTgUP8w?si=pKkVnUcK0NB0N5g1
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