उमड़ा आस्था का सैलाब
बसंत नवरात्र अष्टमी-नवमी पर भक्ति और संस्कृति का संगम
प्रकृति की सुरम्य वादियों के बीच स्थित 11 गांवों की आराध्य देवी भगवती राज-राजेश्वरी
की तपस्थली तालतोली में दो दिवसीय पारंपरिक मेले का विधिवत शुभारंभ हो गया है।
बसंत नवरात्रों की अष्टमी एवं नवमी के अवसर पर आयोजित यह मेला हर वर्ष क्षेत्रीय आस्था और सांस्कृतिक एकता का प्रतीक बनकर सामने आता है।
पूजा-अर्चना के साथ हुआ मेले का शुभारंभ
मेले के प्रथम दिन वैदिक मंत्रोच्चारण और विधि-विधान के साथ मंदिर परिसर में पूजा-अर्चना की गई।
इस दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु भगवती राज-राजेश्वरी के दर्शन के लिए पहुंचे और लंबी कतारों में खड़े होकर माता के चरणों में शीश नवाया।
श्रद्धालुओं ने क्षेत्र में सुख-शांति, समृद्धि और परिवार की कुशलता की कामना की।
पूरे मंदिर परिसर में भक्ति, आस्था और उल्लास का वातावरण बना रहा।
11 गांवों की अधिष्ठात्री देवी के रूप में पूजित हैं भगवती
स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, तालतोली स्थित भगवती राज-राजेश्वरी 11 गांवों की अधिष्ठात्री देवी हैं। श्रद्धा है कि माता की कृपा से क्षेत्र में सुख-समृद्धि और शांति बनी रहती है।
मेले के दौरान देवी के प्रति गहरी आस्था और विश्वास श्रद्धालुओं के उत्साह में साफ दिखाई दिया।

लोक संस्कृति और झांकियों ने बढ़ाई मेले की रौनक
मेले में पारंपरिक झांकियां, धार्मिक अनुष्ठान और लोक सांस्कृतिक कार्यक्रम मुख्य आकर्षण बने हुए हैं।
महिला मंगल दलों और स्थानीय कलाकारों द्वारा प्रस्तुत भजन-कीर्तन एवं लोक गीतों ने पूरे वातावरण को भक्तिमय बना दिया।
राज्यमंत्री चंडी प्रसाद भट्ट ने किए दर्शन
राज्यमंत्री चंडी प्रसाद भट्ट ने भी तालतोली पहुंचकर भगवती राज-राजेश्वरी के दर्शन किए और आशीर्वाद प्राप्त किया।
उन्होंने क्षेत्र की खुशहाली, विश्व शांति और समृद्धि की कामना की।
उन्होंने कहा कि ऐसे धार्मिक आयोजन हमारी संस्कृति और परंपराओं को जीवित रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
साथ ही उन्होंने मेले के सफल आयोजन के लिए स्थानीय जनता और मंदिर समिति की सराहना की।

व्यवस्थाओं के साथ सुचारू आयोजन
मेले के सफल संचालन हेतु मंदिर समिति एवं ग्रामीणों द्वारा आवश्यक व्यवस्थाएं की गई हैं। सुरक्षा, भीड़ प्रबंधन और आयोजन व्यवस्था को लेकर विशेष ध्यान रखा गया है।
मेले के दूसरे दिन भी विभिन्न धार्मिक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे, जिसमें हजारों श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना है।
मंदिर समिति ने दी जानकारी
मंदिर समिति अध्यक्ष कलम सिंह राणा ने बताया कि 11 गांवों के ग्रामीणों एवं मंदिर समिति द्वारा हर वर्ष बसंत नवरात्रों की अष्टमी और नवमी पर दो दिवसीय मेले का आयोजन किया जाता है।
इनकी रही उपस्थिति
पंडित चंद्रशेखर पारकोटी, उपाध्यक्ष दयाल सिंह राणा, मंत्री दौलत सिंह रावत, उपमंत्री आनंद सिंह नेगी, कोषाध्यक्ष देवी प्रसाद बगवाड़ी, प्रधान सरिता रावत सहित कई जनप्रतिनिधि, ग्रामीण एवं हजारों श्रद्धालु मौजूद रहे।

















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