मेलखेत हाइड्रो प्रोजेक्ट पर पर्यावरणीय नियमों की अनदेखी के गंभीर सवाल
चमोली में संचालित परियोजना के खिलाफ स्थानीय लोगों में बढ़ा आक्रोश
Chamoli जिले में संचालित Melkhet Hydro Project पर पर्यावरणीय नियमों की अनदेखी के गंभीर आरोप लग रहे हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि Pindar River में भारी मशीनों के माध्यम से बड़े पैमाने पर खनन किया जा रहा है, जिससे नदी के प्राकृतिक स्वरूप और पर्यावरणीय संतुलन पर खतरा उत्पन्न हो गया है।
आठ से अधिक पोकलैंड मशीनों से दिन-रात खनन का आरोप
ग्रामीणों के अनुसार परियोजना क्षेत्र में आठ से अधिक पोकलैंड मशीनें लगातार नदी के भीतर काम कर रही हैं।
इन मशीनों के जरिए बड़े पैमाने पर आरबीएम (River Bed Material) निकाला जा रहा है।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि यह गतिविधियां National Green Tribunal (एनजीटी) के
दिशा-निर्देशों की भावना के विपरीत हैं, जिनमें नदी क्षेत्रों में नियंत्रित और सीमित खनन की बात कही गई है।
पिंडर नदी के प्राकृतिक स्वरूप पर खतरा
पिंडर नदी, जो अलकनन्दा की प्रमुख सहायक नदियों में से एक है, उसके बहाव क्षेत्र में लगातार हस्तक्षेप किए जाने के आरोप लगाए जा रहे हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि नदी की धारा को मोड़ा जा रहा है, जिससे नदी तटों के कटाव, भू-संतुलन में परिवर्तन और भविष्य में आपदा की आशंका बढ़ सकती है।
अनुमति, सीमांकन और राजस्व को लेकर उठे सवाल
मामले में कई महत्वपूर्ण प्रश्न उठ रहे हैं-
- क्या भारी मशीनों के संचालन की विधिवत अनुमति दी गई है?
- क्या निर्धारित प्रतिभूति राशि जमा कराई गई है?
- क्या खनन क्षेत्र का सीमांकन किया गया है?
- प्रतिदिन निकाले जा रहे आरबीएम की वास्तविक मात्रा कितनी है?
- सरकार को इससे कितना राजस्व प्राप्त हो रहा है?
स्थानीय लोगों का आरोप है कि जमीनी स्तर पर बड़े पैमाने पर खनन हो रहा है, जबकि सरकारी अभिलेखों में अपेक्षाकृत कम रॉयल्टी दर्ज दिखाई जाती है।
पर्यावरणविदों ने जताई गंभीर चिंता
पर्यावरण विशेषज्ञों का मानना है कि यदि नदी के भीतर इसी प्रकार भारी मशीनों से खनन जारी रहा तो पिंडर नदी की पारिस्थितिकी पर दूरगामी प्रभाव पड़ सकते हैं।
इससे जलीय जीवों के आवास, भू-जल स्तर, नदी तंत्र और आसपास के संवेदनशील हिमालयी भूभाग पर नकारात्मक असर पड़ने की आशंका है।
प्रशासन और खनन विभाग की भूमिका पर सवाल
पूरे मामले में जिला प्रशासन और संबंधित विभागों की निगरानी व्यवस्था भी सवालों के घेरे में है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि प्रशासन की जानकारी में होने के बावजूद अब तक कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई है, जिससे सरकारी तंत्र की कार्यप्रणाली पर प्रश्नचिह्न लग रहे हैं।
जांच और कार्रवाई की मांग
ग्रामीणों और सामाजिक संगठनों ने मामले की निष्पक्ष जांच कराए जाने
और यदि अनियमितताएं पाई जाएं तो तत्काल कार्रवाई की मांग की है।
अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि प्रशासन और खनन विभाग इस मामले को कितनी गंभीरता से लेते हैं और पिंडर नदी के संरक्षण के लिए क्या कदम उठाए जाते हैं।















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