सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई के दौरान की गई टिप्पणी
भारत के चीफ जस्टिस सूर्यकांत की एक टिप्पणी को लेकर देशभर में चर्चा तेज हो गई है। सुप्रीम कोर्ट में एक वकील की
याचिका पर सुनवाई के दौरान CJI ने बेरोजगार युवाओं और कुछ एक्टिविस्ट्स को लेकर विवादित टिप्पणी की, जिसके बाद सोशल मीडिया पर बहस शुरू हो गई।
‘सीनियर एडवोकेट’ बनाए जाने की मांग पर सुनवाई
मामला एक वकील की याचिका से जुड़ा था, जिसमें उन्होंने खुद को ‘सीनियर एडवोकेट’ घोषित किए जाने की मांग की थी।
सुनवाई के दौरान वकील की दलीलों और आक्रामक रवैये पर नाराजगी जताते हुए सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने कड़ी टिप्पणी की।
बेरोजगार युवाओं को लेकर की गई टिप्पणी
सुनवाई के दौरान CJI सूर्यकांत ने कहा कि कुछ बेरोजगार लोग “कॉकरोच” और “परजीवी” की तरह सिस्टम पर हमला करने
लगते हैं तथा मीडिया, सोशल मीडिया और RTI एक्टिविज्म के जरिए विवाद पैदा करते हैं।
इस बयान के सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं।
कोर्ट ने ‘सीनियर एडवोकेट’ प्रक्रिया पर भी दी टिप्पणी
बेंच ने कहा कि ‘सीनियर एडवोकेट’ का दर्जा कोई स्टेटस सिंबल नहीं बल्कि योग्यता और प्रतिष्ठा के आधार पर दिया जाने वाला सम्मान है।
कोर्ट ने याचिकाकर्ता के व्यवहार और सोशल मीडिया गतिविधियों पर भी नाराजगी जताई।
वकीलों की डिग्री जांच का भी जिक्र
सुनवाई के दौरान CJI ने यह भी कहा कि कई वकीलों की डिग्रियों की जांच कराए जाने की जरूरत महसूस होती है।
उन्होंने संकेत दिए कि कुछ मामलों में वकालत की डिग्रियों की सत्यता पर सवाल खड़े होते हैं।
सोशल मीडिया पर तेज हुई बहस
CJI की टिप्पणी के बाद सोशल मीडिया और राजनीतिक गलियारों में बहस तेज हो गई है।
कई लोगों ने बयान की आलोचना की, जबकि कुछ लोगों ने इसे कोर्ट की सख्त टिप्पणी बताते हुए समर्थन भी किया।



















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