एक माह बाद भी जांच अधर में
ऊखीमठ–उनियाणा–रासी मोटर मार्ग पर राऊंलैक क्षेत्र में चीड़ के पेड़ों के कथित अवैध पातन का मामला लगातार तूल पकड़ता जा रहा है।
घटना को लगभग एक माह बीत जाने के बावजूद जांच प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ने से वन विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
स्थानीय लोगों ने वन विभाग के अधिकारियों पर मामले को दबाने और मिलीभगत के आरोप लगाते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की है।
सड़क किनारे हरे चीड़ के पेड़ों का हुआ कथित अवैध पातन
मद्महेश्वर घाटी से मिली जानकारी के अनुसार राऊंलैक क्षेत्र में मोटर मार्ग के किनारे खड़े
कई हरे चीड़ के पेड़ों का अवैध रूप से पातन किया गया था। मामले की सूचना तत्काल वन विभाग को दी गई थी।
आरोप है कि सूचना मिलने के बाद विभागीय टीम मौके पर पहुंची,
लेकिन इसके बाद मामला केवल कागजी कार्रवाई तक सीमित रह गया।
एक माह बाद भी नहीं हुई ठोस कार्रवाई
स्थानीय लोगों का कहना है कि घटना के एक माह बाद भी न तो दोषियों के खिलाफ कोई ठोस कार्रवाई हुई है
और न ही जांच रिपोर्ट सार्वजनिक की गई है।
ग्रामीणों का आरोप है कि यदि वन विभाग समय रहते सख्ती दिखाता,
तो वन संपदा को नुकसान पहुंचाने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई संभव थी।
विभागीय मिलीभगत के लगाए आरोप
क्षेत्रवासियों ने आरोप लगाया कि सड़क किनारे इतने बड़े स्तर पर पेड़ों का कटान बिना विभागीय मिलीभगत के संभव नहीं है।
उन्होंने पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच कराने और दोषियों के खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई की मांग उठाई है।
पर्यावरणीय संतुलन पर बढ़ता खतरा
ग्रामीणों ने कहा कि पर्वतीय क्षेत्रों में वन संपदा पर्यावरण संतुलन का प्रमुख आधार है।
लगातार हो रहे अवैध कटान से पर्यावरणीय खतरे बढ़ते जा रहे हैं, जिसका असर आने वाले समय में गंभीर हो सकता है।
उन्होंने शासन और उच्चाधिकारियों से मामले का संज्ञान लेकर जांच प्रक्रिया जल्द पूरी कराने की मांग की है।
रेंज अधिकारी से नहीं हो पाया संपर्क
इस संबंध में अगस्त्यमुनि रेंज के रेंज अधिकारी हरि शंकर रावत से संपर्क करने का प्रयास किया गया,
लेकिन उनसे संपर्क नहीं हो पाया।














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