मद्महेश्वर धाम के कपाट खुलने के बाद श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ने लगी है।
द्वितीय केदार के रूप में प्रसिद्ध इस पवित्र धाम में मात्र दो दिनों के भीतर 2200 से अधिक तीर्थ यात्री दर्शन के लिए पहुंच चुके हैं।
देश-विदेश से आए श्रद्धालु 16 किलोमीटर की कठिन पैदल यात्रा तय कर बाबा मद्महेश्वर के दर्शनों के लिए धाम पहुंच रहे हैं।
यात्रियों की बढ़ती संख्या से पूरी मद्महेश्वर घाटी और यात्रा पड़ावों में रौनक लौट आई है।
यात्रा पड़ावों पर लौटी चहल-पहल
ऊखीमठ से शुरू होने वाली इस यात्रा में रांसी, गौंडार, बंतोली और नानूं जैसे प्रमुख
पड़ावों पर श्रद्धालुओं की चहल-पहल लगातार बढ़ रही है।
यात्रा शुरू होने से स्थानीय दुकानदारों, होटल व्यवसायियों, घोड़ा-खच्चर संचालकों और होम-स्टे संचालकों के चेहरे भी खिल उठे हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यात्रा से क्षेत्र की अर्थव्यवस्था को बड़ा सहारा मिलता है।
प्राकृतिक सौंदर्य के बीच कठिन यात्रा
श्रद्धालु सुबह तड़के रांसी से पैदल यात्रा शुरू कर घने जंगलों, पहाड़ी घाटियों और जलधाराओं
के बीच से गुजरते हुए मद्महेश्वर धाम पहुंच रहे हैं।
कठिन चढ़ाई के बावजूद श्रद्धालुओं की आस्था और उत्साह में कोई कमी नहीं दिखाई दे रही है।
धाम पहुंचने के बाद श्रद्धालु भगवान मद्महेश्वर के दर्शन कर स्वयं को धन्य महसूस कर रहे हैं।
मंदिर परिसर “हर हर महादेव” और “जय बाबा मद्महेश्वर” के जयघोषों से गूंज रहा है।
धार्मिक अनुष्ठानों का दौर जारी
धाम में सुबह से देर शाम तक पूजा-अर्चना, रुद्राभिषेक और विभिन्न धार्मिक अनुष्ठान आयोजित किए जा रहे हैं।
श्रद्धालु हिमालय की गोद में बसे इस पवित्र धाम के आध्यात्मिक और प्राकृतिक सौंदर्य से अभिभूत नजर आ रहे हैं।
स्थानीय आर्थिकी को मिल रही संजीवनी
शिव सिंह रावत ने कहा कि मद्महेश्वर यात्रा क्षेत्र की आर्थिकी की रीढ़ है।
यात्रा शुरू होने से सीमांत गांवों में फिर से रौनक लौट आई है।
उन्होंने सरकार से यात्रा मार्गों के सुदृढ़ीकरण और मूलभूत सुविधाओं के विस्तार की भी मांग की।

















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