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देहदान कर समाज को दे गईं अमूल्य संदेश: 85 वर्षीय राधिका तिवारी का निधन

हेम कांडपाल

मेडिकल कॉलेज को दान की देह

समाजसेवा और मानवता की मिसाल पेश करते हुए 85 वर्षीय राधिका तिवारी का निधन हो गया।

उन्होंने जीवनकाल में ही अपनी देह मेडिकल कॉलेज को दान करने का संकल्प लिया था।

निधन के बाद उनकी अंतिम इच्छा का सम्मान करते हुए उनकी देह मेडिकल कॉलेज अल्मोड़ा को सौंप दी गई,

जहां इसका उपयोग भावी चिकित्सकों के अध्ययन और प्रशिक्षण में किया जाएगा।

बहू नहीं, बेटी जैसा था रिश्ता

राधिका तिवारी, स्वर्गीय धारा बल्लभ तिवारी की पत्नी एवं बसभीड़ा निवासी शिक्षिका व समाजसेवी दीपा तिवारी की सास थीं।

परिवार और स्थानीय लोगों के अनुसार दोनों का रिश्ता सास-बहू का नहीं, बल्कि मां और बेटी जैसा था।

उनके स्नेह और आत्मीयता की झलक कई सामाजिक कार्यक्रमों और वीडियो में भी देखने को मिली थी।

बहू की गोद में ली अंतिम सांस

परिवार के लिए भावुक क्षण तब आया जब राधिका तिवारी ने अपनी अंतिम सांस अपनी बहू दीपा तिवारी की गोद में ली।

इस घटना ने परिवार और उन्हें जानने वाले सभी लोगों को भावुक कर दिया।

मेडिकल शिक्षा के लिए प्रेरणादायी योगदान

राधिका तिवारी का देहदान समाज के लिए एक प्रेरणादायी उदाहरण माना जा रहा है।

उनकी देह मेडिकल कॉलेज अल्मोड़ा में अध्ययनरत मेडिकल छात्रों के प्रशिक्षण में उपयोग की जाएगी,

जिससे भविष्य में बेहतर चिकित्सकों के निर्माण में योगदान मिलेगा।

समाज में शोक की लहर

राधिका तिवारी के निधन पर क्षेत्र में शोक की लहर है।

सामाजिक संगठनों, शिक्षकों और स्थानीय लोगों ने उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उनके परिजनों के प्रति गहरी संवेदना

व्यक्त की है। लोगों ने उनके देहदान के निर्णय को समाज के लिए प्रेरणा बताया है।

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https://youtu.be/xdaFOe9t2fU?si=JiunRqyOOD9EmaKd
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