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केतन हत्याकांड के बीच क्यों याद आ रहे हैं भवानी भाई? जातिवाद के खिलाफ जीवनभर लड़ने वाले गांधीवादी समाजसेवी की कहानी

प्रतापनगर के देवल गांव में जन्मे भवानी भाई ने चिपको आंदोलन, टिहरी बांध विरोध और सामाजिक समरसता के लिए किया आजीवन संघर्ष, भतीजे धर्मेंद्र ने साझा की अनसुनी यादें

बहुचर्चित केतन लाल हत्याकांड के बाद प्रतापनगर क्षेत्र में सामाजिक और जातिगत तनाव का माहौल बना हुआ है।

इसी बीच क्षेत्र के लोग गांधीवादी और सर्वोदयी समाजसेवी भवानी भाई को याद कर रहे हैं। देवल गांव में जन्मे भवानी भाई ने

अपने पूरे जीवन में जातिवाद, छुआछूत और सामाजिक भेदभाव के खिलाफ संघर्ष किया तथा समाज में समरसता स्थापित करने का प्रयास किया।

देवल गांव से शुरू हुआ समाज सेवा का सफर

भवानी भाई का जन्म वर्ष 1942 में टिहरी गढ़वाल के प्रतापनगर क्षेत्र स्थित देवल गांव में रूपलाल और अशरफी देवी के घर

हुआ था। प्रारंभिक शिक्षा के बाद वे कम उम्र में ही घर छोड़कर समाज सेवा के मार्ग पर निकल पड़े। उनके भतीजे धर्मेंद्र

कुमार ने बताया कि बचपन से ही भवानी भाई सामंती व्यवस्था और जातिगत भेदभाव के विरोधी थे। उन्होंने विवाह नहीं किया

और अपना पूरा जीवन समाज सेवा को समर्पित कर दिया।

सुंदरलाल बहुगुणा के साथ जुड़े, आंदोलनों में निभाई अहम भूमिका

धर्मेंद्र कुमार के अनुसार भवानी भाई प्रसिद्ध पर्यावरणविद् और चिपको आंदोलन के नेता सुंदरलाल बहुगुणा के संपर्क में आए

और उनके साथ कई सामाजिक आंदोलनों में सक्रिय भूमिका निभाई। चिपको आंदोलन, टिहरी बांध विरोध आंदोलन और

शराबबंदी आंदोलन जैसे कई जन आंदोलनों में उनका महत्वपूर्ण योगदान रहा।

ठक्कर बापा छात्रावास से जुड़कर किया सामाजिक उत्थान का कार्य

भवानी भाई लंबे समय तक ठक्कर बापा छात्रावास से जुड़े रहे, जहां उन्होंने अनुसूचित जाति और आर्थिक रूप से कमजोर

छात्रों के शिक्षा और सामाजिक विकास के लिए कार्य किया। समाज के वंचित वर्गों को मुख्यधारा से जोड़ने के लिए उन्होंने

निरंतर प्रयास किए और समानता का संदेश दिया।

जातिवाद और छुआछूत के खिलाफ आजीवन संघर्ष

धर्मेंद्र कुमार ने बताया कि भवानी भाई कभी भी जातिगत भेदभाव में विश्वास नहीं करते थे।

वे समाज में व्याप्त छुआछूत, ऊंच-नीच और अन्य कुरीतियों के खिलाफ लगातार आवाज उठाते रहे।

उनका मानना था कि समाज का विकास समानता और आपसी सम्मान से ही संभव है।

प्रतापनगर में आज भी जीवित हैं उनकी यादें

भवानी भाई के नाम पर प्रतापनगर क्षेत्र में एक प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र स्थापित किया गया है।

हालांकि परिजनों का कहना है कि वहां आज भी अपेक्षित स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध नहीं हैं। उन्होंने यह भी बताया कि

प्रतापनगर इंटर कॉलेज का नाम भवानी भाई के नाम पर रखने का प्रयास किया गया था, लेकिन स्थानीय स्तर पर इसका विरोध हुआ।

केतन हत्याकांड के बाद फिर चर्चा में आए भवानी भाई

केतन लाल हत्याकांड के बाद क्षेत्र में सामाजिक सौहार्द और भाईचारे की चर्चा के बीच भवानी भाई का जीवन एक बार फिर

लोगों के लिए प्रेरणा बनकर सामने आया है। स्थानीय लोगों का मानना है कि यदि समाज उनके विचारों को अपनाए तो जातीय

तनाव और सामाजिक विभाजन जैसी परिस्थितियों से बचा जा सकता है।

भवानी भाई की विरासत आज भी प्रेरणा

वर्ष 2006 में भवानी भाई का निधन हो गया, लेकिन सामाजिक समरसता, समानता और जनसेवा के उनके विचार आज भी

लोगों को प्रेरित करते हैं। क्षेत्र के वरिष्ठ नागरिकों का कहना है कि वर्तमान समय में उनके जैसे समाजसेवियों की सोच और

कार्यशैली की पहले से अधिक आवश्यकता महसूस की जा रही है।

https://regionalreporter.in/ketan-hatyakand-lambgaon-taxi-union-clarification/
https://youtu.be/xdaFOe9t2fU?si=E-g1aomfxutphc-N
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