रुड़की में वेश्यावृत्ति के अड्डों पर कार्रवाई और पिरान कलियर मेले की तवायफ महफिलों पर रोक लगाने वाले पूर्व आईएएस अधिकारी ने ली अंतिम सांस।
उत्तराखंड के वरिष्ठ पूर्व आईएएस अधिकारी चंद्र सिंह का गुरुवार सुबह निधन हो गया।
वे लंबे समय से आयु संबंधी स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहे थे और देहरादून के मैक्स अस्पताल में उनका उपचार चल रहा था।
वहीं उन्होंने अंतिम सांस ली। उनके निधन से प्रशासनिक सेवा और उत्तराखंड ने एक ईमानदार एवं कर्मठ अधिकारी को खो दिया है।
उत्तरकाशी के भंकोली गांव से निकले थे चंद्र सिंह
पूर्व आईएएस चंद्र सिंह मूल रूप से उत्तरकाशी जनपद की भटवाड़ी तहसील के केलसू भंकोली गांव के निवासी थे।
उन्होंने अपने प्रशासनिक जीवन में ईमानदारी, सादगी और निष्पक्ष कार्यशैली से अलग पहचान बनाई।
गरीबों और वंचितों के हित में लिए गए उनके फैसलों को आज भी याद किया जाता है।
रुड़की में लिए थे ऐतिहासिक फैसले
सत्तर के दशक में संयुक्त मजिस्ट्रेट के रूप में रुड़की में तैनाती के दौरान चंद्र सिंह ने मछली बाजार क्षेत्र में संचालित वेश्यावृत्ति
के अड्डों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की थी। इसके अलावा पिरान कलियर मेले में वर्षों से आयोजित तवायफों की गीत-संगीत
महफिलों पर स्थायी रोक लगाने का निर्णय भी उनके सबसे चर्चित प्रशासनिक कदमों में शामिल रहा।
प्रशासनिक सेवा में बनाई अलग पहचान
अपने पूरे प्रशासनिक कार्यकाल में चंद्र सिंह ने कई महत्वपूर्ण और जनहित से जुड़े निर्णय लिए।
उनकी कार्यशैली को हमेशा निष्पक्ष, अनुशासित और जनकल्याणकारी माना गया। प्रशासनिक ईमानदारी के कारण वे
अधिकारियों और आम जनता के बीच समान रूप से सम्मानित रहे।
पत्रकारों और समाज ने जताया शोक
रुड़की के वरिष्ठ पत्रकार अहमद भारती, अमजद उस्मानी, सुभाष सैनी और तपन सुशील सहित कई लोगों ने उनके निधन पर
गहरा शोक व्यक्त किया। सभी ने उन्हें एक आदर्श प्रशासनिक अधिकारी और प्रेरणास्रोत बताया।
उत्तराखंड ने खोया एक सादगीपूर्ण व्यक्तित्व
चंद्र सिंह का निधन उत्तराखंड के लिए अपूरणीय क्षति माना जा रहा है। सामाजिक सुधारों, प्रशासनिक ईमानदारी और जनसेवा
के प्रति उनका योगदान लंबे समय तक याद किया जाएगा।















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