विवादों में घिरी प्रवेश परीक्षा
बिजली गुल होते ही शुरू हुआ हंगामा
गंगा असनोडा
हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल केंद्रीय विश्वविद्यालय में आज 12 जुलाई ,2026 को आयोजित पीएचडी प्रवेश परीक्षा सुरक्षा और गोपनीयता के दावों के बीच बड़े विवाद में घिर गई।
परीक्षा के दौरान अचानक बिजली गुल होने से उपजे अंधेरे और सफोकेशन के बीच परीक्षा की पवित्रता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए।
आरोप है कि इसी अंधेरे और अव्यवस्था का लाभ उठाकर परीक्षा में धांधली की कोशिश की गई, जिसके बाद छात्र नेताओं और परीक्षार्थियों ने जमकर हंगामा किया।
मौके पर पहुंची पुलिस ने केंद्र व्यवस्थापक प्रो. आर.एस. नेगी और ऑब्जर्वर (सहायक निबंधक) के मोबाइल फोन सीज कर लिए हैं।

बिजली गुल होते ही सुरक्षा घेरा हुआ ‘धुंधला’
परीक्षा शुरू होने के ठीक एक घंटे बाद जब बिजली कटी, तो परीक्षा केंद्र का पूरा सुरक्षा ढांचा चरमरा गया।
भीषण गर्मी और सफोकेशन के बीच परीक्षार्थियों का ध्यान भटकने लगा।
छात्रों का आरोप है कि बिजली जाने के बाद परीक्षा कक्षों में जो अफरातफरी मची, उसी दौरान परीक्षा की गोपनीयता से खिलवाड़ किया गया।
छात्रों ने केंद्र के भीतर मोबाइल फोन की मौजूदगी और ऑब्जर्वर की संदेहास्पद भूमिका पर सीधा हमला बोला है।
विवाद का केंद्र: ‘ऑब्जर्वर’ का मोबाइल और वीडियो
हंगामे की चिंगारी तब भड़की जब छात्र संघ महासचिव अनुरोध पुरोहित ने सफोकेशन की शिकायत करते हुए राहत की मांग की।
छात्रों का आरोप है कि इस जायज मांग पर मदद करने के बजाय परीक्षा ऑब्जर्वर ने उनका वीडियो बनाना शुरू कर दिया।
परीक्षा केंद्र जैसे अति-संवेदनशील स्थान पर ऑब्जर्वर के हाथ में मोबाइल का होना और उसका वीडियो रिकॉर्ड करना छात्रों के गुस्से को भड़काने के लिए पर्याप्त था।
पुलिस की सख्ती: साक्ष्यों को किया सुरक्षित
मामले की गंभीरता को देखते हुए कीर्तिनगर थाना अध्यक्ष संजय मिश्रा भारी पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे।
छात्र नेताओं ने पेपर लीक और नकल की आशंका जताते हुए परीक्षा केंद्र की पूरी कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए।
पुलिस ने आक्रोशित छात्रों को शांत कराया और मामले की निष्पक्ष जांच का भरोसा दिलाते हुए
केंद्र व्यवस्थापक प्रो. आर.एस. नेगी और ऑब्जर्वर के मोबाइल फोन को सीज कर दिया ताकि डिजिटल साक्ष्यों के साथ कोई छेड़छाड़ न हो सके।

छात्रों की दो टूक: ‘जांच हो तो सार्वजनिक हो’
घटना के बाद विश्वविद्यालय परिसर में भारी तनाव है।
छात्र संघ का कहना है कि बिजली गुल होने का समय और उसी दौरान मोबाइल का उपयोग मात्र एक संयोग नहीं, बल्कि एक सुनियोजित साजिश हो सकती है।
छात्रों ने मांग की है कि इस पूरी घटना की उच्च स्तरीय जांच हो और रिपोर्ट को सार्वजनिक किया जाए।


















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