CBI जांच की मांग वाली याचिकाएं होंगी सूचीबद्ध
अयोध्या राम मंदिर में दान और चढ़ावे में कथित अनियमितताओं को लेकर दायर तीन याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट 13 जुलाई
को सुनवाई करेगा। भारत के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ इस मामले की सुनवाई
करेगी। याचिकाओं में कथित दान चोरी, हेराफेरी और गबन की CBI जांच कराने की मांग की गई है।
CBI जांच की उठी मांग
याचिकाकर्ताओं का कहना है कि मामले की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच के लिए उत्तर प्रदेश पुलिस और राज्य एसआईटी पर
भरोसा नहीं किया जा सकता। इसलिए पूरे प्रकरण की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) से कराई जाए। इससे पहले सुप्रीम कोर्ट
की अवकाशकालीन पीठ ने तत्काल सुनवाई से इनकार किया था, लेकिन अदालत खुलने के बाद मामले को सूचीबद्ध करने का आश्वासन दिया था।
दान और चढ़ावे का पूरा ब्योरा मांगने की अपील
याचिकाओं में सुप्रीम कोर्ट से अनुरोध किया गया है कि श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को 5 फरवरी 2020 से अब तक
प्राप्त सभी दान और चढ़ावे का विस्तृत विवरण प्रस्तुत करने का निर्देश दिया जाए। इसमें नकद दान, बैंक ट्रांसफर, डिजिटल
भुगतान, विदेशी योगदान, सोना, चांदी और अन्य कीमती वस्तुओं का पूरा लेखा-जोखा शामिल करने की मांग की गई है।
भक्तों के विश्वास से जुड़ा बताया मामला
याचिकाकर्ताओं का कहना है कि यह मामला करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था और देश के प्रमुख धार्मिक संस्थान की पारदर्शिता से
जुड़ा है। उनका तर्क है कि दान राशि और मूल्यवान वस्तुओं के प्रबंधन में किसी भी तरह की अनियमितता की स्वतंत्र और
निष्पक्ष जांच आवश्यक है, ताकि जनता का भरोसा बना रहे।
वित्तीय अनियमितताओं की स्वतंत्र जांच की मांग
याचिकाओं में कहा गया है कि कथित वित्तीय अनियमितताओं और लेखांकन संबंधी आरोपों की सच्चाई सामने लाने के लिए
विशेषज्ञ एजेंसी द्वारा व्यापक जांच कराई जानी चाहिए। साथ ही मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा दिए गए सभी दान के सुरक्षित प्रबंधन
और जवाबदेही सुनिश्चित करने की भी मांग की गई है।















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