फोर्स फीडिंग की मांग वाली याचिका पर केंद्र से जवाब तलब
18 दिन से भूख हड़ताल पर हैं सोनम वांगचुक, स्वास्थ्य बिगड़ने पर कोर्ट में याचिका
प्रसिद्ध शिक्षाविद और सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की भूख हड़ताल को लेकर मामला अब दिल्ली हाई कोर्ट पहुंच गया है।
उनकी बिगड़ती सेहत को देखते हुए अदालत में एक याचिका दायर कर मांग की गई है कि उन्हें अस्पताल में
भर्ती कर आवश्यक चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई जाए और जरूरत पड़ने पर फोर्स फीडिंग (जबरन पोषण) के जरिए उनका अनशन समाप्त कराया जाए।
दो दिन में जान का खतरा होने का दावा
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, यह याचिका एक्टिविस्ट और अधिवक्ता राकेश कुमार सैनी ने दायर की है।
याचिका में दावा किया गया है कि यदि सोनम वांगचुक ने भूख हड़ताल जारी रखी तो उनकी जान को गंभीर खतरा हो सकता है।
केंद्र सरकार और दिल्ली सरकार को निर्देश देने की मांग की गई है कि उन्हें तत्काल अस्पताल ले जाकर चिकित्सकीय निगरानी में रखा जाए।
दिल्ली हाई कोर्ट ने मांगा जवाब
दिल्ली हाई कोर्ट ने इस याचिका पर केंद्र सरकार और दिल्ली सरकार को नोटिस जारी करते हुए अपना पक्ष रखने को कहा है।
मामले की अगली सुनवाई 16 जुलाई को प्रस्तावित है।
क्या है फोर्स फीडिंग
फोर्स फीडिंग ऐसी चिकित्सकीय प्रक्रिया है, जिसमें यदि कोई व्यक्ति स्वयं भोजन नहीं कर पा रहा हो या खाने से इनकार कर रहा हो,
तो उसे नली (नासोगैस्ट्रिक ट्यूब) या अन्य चिकित्सकीय माध्यम से तरल पोषण और आवश्यक पोषक तत्व दिए जाते हैं।
इसका उद्देश्य शरीर को आवश्यक ऊर्जा और पोषण उपलब्ध कराना होता है।
सोनम वांगचुक की स्वास्थ्य स्थिति
रिपोर्टों के अनुसार, 28 जून से अनशन पर बैठे सोनम वांगचुक का वजन करीब 8.5 किलोग्राम घट चुका है
और उनका रक्तचाप भी सामान्य से कम दर्ज किया गया है।
उनके आंदोलन को शिक्षाविदों, विपक्षी नेताओं और फिल्म जगत की कई हस्तियों का समर्थन मिला है।















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