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सरोकारों से साक्षात्कार

हरेला से पहले ‘ब्लैक हरेला’ अभियान

ऋषिकेश-देहरादून हाईवे पर 3000 पेड़ों की कटाई के विरोध में सड़क से सोशल मीडिया तक प्रदर्शन

हरेला पर्व से ठीक पहले उत्तराखंड में पर्यावरण संरक्षण को लेकर एक नया विवाद सामने आया है।

ऋषिकेश-देहरादून राष्ट्रीय राजमार्ग के सात मोड़ क्षेत्र में सड़क चौड़ीकरण और फ्लाईओवर परियोजना के लिए

करीब 3,000 पेड़ों की प्रस्तावित कटाई के विरोध में पर्यावरण प्रेमियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और युवाओं ने

‘ब्लैक हरेला अभियान’ शुरू किया है।

विरोध प्रदर्शन सड़कों से लेकर सोशल मीडिया तक पहुंच गया है।

पर्यावरण प्रेमियों का विरोध, सोशल मीडिया पर भी अभियान

अभियान से जुड़े लोगों का कहना है कि वे विकास परियोजनाओं के विरोध में नहीं हैं, बल्कि चाहते हैं कि सड़क निर्माण के ऐसे विकल्प तलाशे जाएं, जिनसे पेड़ों की कटाई न्यूनतम हो।

उनका आरोप है कि लगातार विकास परियोजनाओं के नाम पर राज्य की हरित संपदा को नुकसान पहुंचाया जा रहा है।

प्रदर्शनकारियों ने काले रंग के प्रतीकों और संदेशों के साथ सोशल मीडिया अभियान भी शुरू किया है।

कई स्थानों पर पर्यावरण संरक्षण के समर्थन में जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं।

3000 पेड़ों की कटाई पर उठे सवाल

सात मोड़ क्षेत्र में सड़क चौड़ीकरण परियोजना के लिए पेड़ों का चिह्नीकरण किया जा चुका है और कटाई की प्रक्रिया भी शुरू हो गई है।

पर्यावरण संगठनों का कहना है कि यह इलाका पर्यावरणीय दृष्टि से संवेदनशील है।

बड़ी संख्या में पेड़ों की कटाई से जैव विविधता, वन्यजीवों और स्थानीय जलवायु पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है।

‘भविष्य की पीढ़ियों के साथ अन्याय’

समाजसेवी जगमोहन मेहंदीरत्ता ने कहा कि यह आंदोलन विकास का विरोध नहीं बल्कि प्रकृति संरक्षण की आवाज है।

उनका कहना है कि हजारों पुराने पेड़ों की कटाई भविष्य की पीढ़ियों के साथ अन्याय होगी।

उन्होंने लोगों से ब्लैक हरेला अभियान से जुड़कर हरियाली बचाने की अपील की।

हरेला पर्व के बीच विरोधाभास का मुद्दा

16 जुलाई से पूरे उत्तराखंड में हरेला पर्व मनाया जाएगा, जिसे हरियाली और पर्यावरण संरक्षण का प्रतीक माना जाता है।

राज्य सरकार हर साल बड़े पैमाने पर पौधारोपण अभियान चलाती है।

हालांकि, पर्यावरण प्रेमियों का कहना है कि एक ओर लाखों पौधे लगाने की बात की जाती है, वहीं दूसरी ओर हजारों परिपक्व पेड़ों की कटाई की जा रही है।

इसी विरोधाभास को उजागर करने के लिए इस बार ‘ब्लैक हरेला’ मनाने का निर्णय लिया गया है।

वन मंत्री सुबोध उनियाल ने क्या कहा

वन मंत्री सुबोध उनियाल ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ विकास कार्य भी आवश्यक हैं।

उनके अनुसार, इकोलॉजी, इकोनॉमी और विकास के बीच संतुलन बनाकर आगे बढ़ना ही समय की जरूरत है।

उन्होंने लोगों से विकास परियोजनाओं को व्यापक दृष्टिकोण से देखने की अपील की।

बहस फिर तेज

हरेला पर्व से पहले शुरू हुए ब्लैक हरेला अभियान ने उत्तराखंड में विकास और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन को लेकर नई बहस छेड़ दी है।

सरकार इसे जनहित की महत्वपूर्ण परियोजना बता रही है, जबकि पर्यावरण प्रेमी इसे राज्य की हरित विरासत के लिए गंभीर खतरा मान रहे हैं।

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