प्रदेश सरकार की ओर से अंतिम गांव तक गुणवत्तापूर्ण शिक्षा पहुंचाने के दावों के बीच
विकासखंड ऊखीमठ के सीमांत क्षेत्र स्थित राजकीय जूनियर हाई स्कूल तोषी की स्थिति शिक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर रही है।
विद्यालय में नियमित शिक्षक न होने के कारण यहां पढ़ने वाले छह छात्रों का भविष्य अधर में लटक गया है।
प्राथमिक विद्यालय के शिक्षक को सौंपा गया प्रभार
विद्यालय में नियमित शिक्षकों की कमी के चलते शिक्षा विभाग ने गांव के प्राथमिक विद्यालय के एक शिक्षक को जूनियर हाई स्कूल का अतिरिक्त प्रभार सौंप दिया है।
इससे एक ही शिक्षक को दो विद्यालयों की जिम्मेदारी निभानी पड़ रही है।
परिणामस्वरूप दोनों विद्यालयों में पढ़ाई प्रभावित हो रही है और छात्रों को नियमित कक्षाएं नहीं मिल पा रही हैं।
ग्रामीण बोले- छह छात्र हैं, लेकिन भविष्य उतना ही महत्वपूर्ण
ग्रामीणों का कहना है कि पहाड़ के दुर्गम क्षेत्रों में शिक्षा पहले से ही कई चुनौतियों का सामना कर रही है।
ऐसे में शिक्षक विहीन विद्यालय सरकारी शिक्षा व्यवस्था पर लोगों का भरोसा कमजोर कर रहे हैं।
ग्रामीण गीता राम सेमवाल ने कहा कि विद्यालय में भले ही छह छात्र हों,
लेकिन उनका भविष्य भी किसी बड़े विद्यालय के छात्रों जितना ही महत्वपूर्ण है।
शिक्षक न होने से बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है और आगे की शिक्षा तथा प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी का आधार भी कमजोर पड़ता जा रहा है।
स्थायी शिक्षक नियुक्त करने की मांग
ग्रामीणों और अभिभावकों ने शिक्षा विभाग से जल्द नियमित शिक्षकों की नियुक्ति करने की मांग की है।
उनका कहना है कि केवल योजनाओं और घोषणाओं से शिक्षा व्यवस्था मजबूत नहीं होगी,
बल्कि प्रत्येक विद्यालय में पर्याप्त शिक्षक, संसाधन और नियमित शैक्षणिक गतिविधियां सुनिश्चित करनी होंगी।
उन्होंने चेतावनी दी कि यदि जल्द स्थायी शिक्षक की नियुक्ति नहीं की गई तो शिक्षा विभाग
और जिला प्रशासन के खिलाफ आंदोलन किया जाएगा।
क्या बोले खंड शिक्षा अधिकारी
प्रभारी खंड शिक्षा अधिकारी यशवीर सिंह रावत ने बताया कि विद्यालय में तैनात प्रधानाध्यापक के सेवानिवृत्त होने के बाद शिक्षकों की कमी बनी हुई है। उ
न्होंने कहा कि विद्यालय में अस्थायी शिक्षक की तैनाती के लिए उच्चाधिकारियों को पत्र भेजा जाएगा और जल्द व्यवस्था बनाने का प्रयास किया जाएगा।














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