रेसलिंग-बैडमिंटन बाहर, कॉमनवेल्थ गेम्स में भारत की चुनौती बढ़ी
कॉमनवेल्थ गेम्स में भारत हमेशा मजबूत प्रदर्शन करता रहा है।
खासकर 2010 दिल्ली कॉमनवेल्थ गेम्स के बाद भारतीय खिलाड़ियों ने हर संस्करण में बड़ी संख्या में पदक जीतकर देश का गौरव बढ़ाया।
लेकिन इस बार 23 जुलाई से 2 अगस्त तक स्कॉटलैंड के ग्लासगो में होने वाले कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारत के पदकों की संख्या पहले के मुकाबले कम रहने की संभावना जताई जा रही है।
इसकी सबसे बड़ी वजह खिलाड़ियों का प्रदर्शन नहीं, बल्कि प्रतियोगिता में शामिल खेलों की संख्या में भारी कटौती है।
20 की जगह सिर्फ 10 खेल होंगे
आमतौर पर कॉमनवेल्थ गेम्स में करीब 20 खेल शामिल होते हैं, लेकिन इस बार केवल 10 खेलों में मुकाबले होंगे।
इनमें एथलेटिक्स, स्विमिंग, ट्रैक साइक्लिंग, वेटलिफ्टिंग, 3×3 बास्केटबॉल, लॉन बॉल्स, नेटबॉल, आर्टिस्टिक जिम्नास्टिक्स, जूडो और बॉक्सिंग को जगह मिली है।
भारत को सबसे ज्यादा उम्मीद वेटलिफ्टिंग, बॉक्सिंग और एथलेटिक्स से रहेगी, क्योंकि इन खेलों में भारतीय खिलाड़ी लगातार अच्छा प्रदर्शन करते रहे हैं।
इन खेलों के बाहर होने से भारत को बड़ा नुकसान
इस बार कई ऐसे खेल कार्यक्रम से बाहर कर दिए गए हैं, जिनमें भारत पारंपरिक रूप से मजबूत रहा है।
इनमें रेसलिंग, बैडमिंटन, हॉकी, टेबल टेनिस, क्रिकेट, स्क्वाश, बीच वॉलीबॉल और रग्बी सेवन्स शामिल हैं।
बर्मिंघम कॉमनवेल्थ गेम्स 2022 में भारत ने कुल 61 पदक जीते थे।
इनमें से 30 पदक इन्हीं खेलों से आए थे, जो इस बार प्रतियोगिता का हिस्सा नहीं हैं। ऐसे में भारत के लिए उन पदकों की भरपाई करना मुश्किल माना जा रहा है।
कई स्टार खिलाड़ी इस बार नहीं दिखेंगे
खेलों के बाहर होने का असर केवल पदक तालिका पर ही नहीं पड़ेगा, बल्कि कई बड़े भारतीय खिलाड़ी भी इस बार कॉमनवेल्थ गेम्स में हिस्सा नहीं ले सकेंगे।
बैडमिंटन स्टार पीवी सिंधु, लक्ष्य सेन, सात्विकसाईराज रंकीरेड्डी-चिराग शेट्टी, रेसलिंग के अमन सेहरावत, रवि दहिया,
अंतिम पंघाल और टेबल टेनिस व हॉकी के कई दिग्गज खिलाड़ी इस बार प्रतियोगिता से बाहर रहेंगे।
खिलाड़ियों के करियर पर भी पड़ेगा असर
कॉमनवेल्थ गेम्स केवल पदक जीतने का मंच नहीं है।
यहां मिलने वाली सफलता के आधार पर कई खिलाड़ियों को सरकारी नौकरी, पदोन्नति, नकद पुरस्कार और आर्थिक सहायता मिलती है।
खासकर उन खेलों के खिलाड़ियों के लिए, जिन्हें ओलंपिक या विश्व स्तर पर सीमित अवसर मिलते हैं, यह प्रतियोगिता बेहद अहम होती है।
युवा खिलाड़ियों के लिए भी यह मंच अंतरराष्ट्रीय पहचान बनाने का अवसर रहा है। नीरज चोपड़ा, विनेश फोगाट, बजरंग पूनिया
और मनु भाकर जैसे कई खिलाड़ियों ने शुरुआती बड़ी सफलता कॉमनवेल्थ गेम्स से ही हासिल की थी।
आखिर क्यों घटाए गए खेल
कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 की मेजबानी पहले ऑस्ट्रेलिया के विक्टोरिया राज्य को करनी थी।
लेकिन बढ़ती लागत और बजट संबंधी समस्याओं के कारण विक्टोरिया ने आयोजन से पीछे हटने का फैसला कर लिया।
इसके बाद स्कॉटलैंड के ग्लासगो ने मेजबानी स्वीकार की, लेकिन सीमित बजट और उपलब्ध खेल परिसरों को देखते हुए केवल उन्हीं खेलों को शामिल किया गया, जिनके लिए पहले से बुनियादी ढांचा मौजूद था।
इसी कारण प्रतियोगिता का स्वरूप छोटा कर दिया गया।
भारत के लिए राहत की खबर
हालांकि भारतीय खेल प्रेमियों के लिए अच्छी खबर यह है कि अगले कॉमनवेल्थ गेम्स की मेजबानी भारत करेगा।
उम्मीद है कि उस संस्करण में अधिक खेल शामिल किए जाएंगे, जिनमें भारत की पदक संभावनाएं भी मजबूत रहती हैं।















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