उग्र आंदोलन का ऐलान
अंकिता भंडारी हत्याकांड में दोषियों को कड़ी सजा दिलाने और जांच प्रक्रिया में तेजी लाने की मांग को लेकर
‘अंकिता न्याय यात्रा संयुक्त संघर्ष मंच’ ने देहरादून में पत्रकार वार्ता आयोजित की।
मंच ने प्रदेश सरकार को चेतावनी दी कि यदि अंकिता भंडारी केस में जल्द न्याय नहीं मिला और दोषियों को राहत मिलने से रोकने के लिए प्रभावी पैरवी नहीं की गई,
तो पूरे उत्तराखंड में उग्र आंदोलन शुरू किया जाएगा।
20 जुलाई की सुनवाई को बताया अहम
संघर्ष मंच ने कहा कि 20 जुलाई को दोषियों की जमानत और सजा कम करने संबंधी याचिका पर सुनवाई प्रस्तावित है।
मंच ने सरकार से मांग की कि अदालत में मजबूत कानूनी पक्ष रखा जाए ताकि आरोपियों को किसी भी प्रकार की राहत न मिल सके।
सीबीआई जांच की धीमी रफ्तार पर उठाए सवाल
पत्रकार वार्ता के दौरान वक्ताओं ने सीबीआई की जांच प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए
कहा कि लंबे समय बीत जाने के बावजूद जांच की प्रगति को लेकर कोई स्पष्ट जानकारी सामने नहीं आई है।
उन्होंने मांग की कि जांच जल्द पूरी कर निष्कर्ष सार्वजनिक किए जाएं।
कथित VIP एंगल और साक्ष्य नष्ट करने के आरोपों की जांच की मांग
संघर्ष मंच ने मामले में सामने आए कथित VIP एंगल की निष्पक्ष जांच की मांग दोहराई।
साथ ही घटना के बाद बुलडोजर चलाकर कथित रूप से साक्ष्य नष्ट किए जाने के आरोपों की भी स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच कराने की मांग की।
18 सितंबर तक कार्रवाई नहीं हुई तो होगा उग्र आंदोलन
मंच ने कहा कि घटना को चार वर्ष पूरे होने वाले हैं। यदि 18 सितंबर से पहले सीबीआई जांच पूरी कर दोषियों के खिलाफ
प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई, तो पूरे प्रदेश में व्यापक जन आंदोलन शुरू किया जाएगा।
पत्रकार वार्ता में कई सामाजिक कार्यकर्ता रहे मौजूद
पत्रकार वार्ता में निर्मला बिष्ट, सुजाता पॉल, मोहित डिमरी, उमा भट्ट, हरिओम पाली
और विमला कोहली सहित अन्य सदस्यों ने कहा कि बेटियों की सुरक्षा
और सम्मान के मुद्दे पर अब किसी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी। उन्होंने निष्पक्ष जांच और शीघ्र न्याय सुनिश्चित करने की मांग दोहराई।
















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