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ईरान पर अमेरिकी हमले में चाबहार पोर्ट प्रभावित

भारत ने कहा- हमारे टर्मिनल को नुकसान नहीं

अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य संघर्ष का असर अब रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण चाबहार पोर्ट तक पहुंच गया है।

ईरानी सरकारी मीडिया और अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, अमेरिकी सेना ने शुक्रवार को चाबहार बंदरगाह के आसपास सैन्य कार्रवाई की,

जिसमें पोर्ट के कुछ इंफ्रास्ट्रक्चर को नुकसान पहुंचा।

हालांकि भारत ने स्पष्ट किया है कि उसके संचालन वाले शहीद बेहेश्ती टर्मिनल को कोई नुकसान नहीं हुआ है।

क्या कहा भारत ने

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि भारत ने हमलों की खबरें देखी हैं, लेकिन पुष्टि की है कि भारतीय संचालन वाला टर्मिनल सुरक्षित है।

उन्होंने यह भी बताया कि चाबहार परियोजना से जुड़े मुद्दों पर भारत संबंधित पक्षों के साथ लगातार बातचीत कर रहा है।

क्या हुआ चाबहार पोर्ट पर

रिपोर्टों के मुताबिक अमेरिकी हमले में व्यावसायिक जहाजों की निगरानी करने वाले एक वॉच टावर को नुकसान पहुंचा।

ईरान का कहना है कि यह ढांचा नागरिक समुद्री यातायात की निगरानी के लिए इस्तेमाल होता था।

हालांकि अमेरिकी पक्ष ने कहा कि कार्रवाई का उद्देश्य ईरान की सैन्य क्षमताओं को कमजोर करना था।

भारत के लिए क्यों अहम है चाबहार पोर्ट

चाबहार पोर्ट भारत के लिए रणनीतिक और आर्थिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण है।

  • अफगानिस्तान और मध्य एशिया तक व्यापार का वैकल्पिक मार्ग।
  • पाकिस्तान के ग्वादर पोर्ट का रणनीतिक विकल्प।
  • भारत, ईरान और मध्य एशिया के बीच व्यापार बढ़ाने की अहम परियोजना।
  • हिंद महासागर क्षेत्र में भारत की कनेक्टिविटी रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा।

पूर्व विदेश सचिव ने क्या कहा

पूर्व विदेश सचिव कंवल सिब्बल ने कहा कि चाबहार परियोजना को नुकसान पहुंचने से सबसे अधिक फायदा चीन और पाकिस्तान के ग्वादर पोर्ट को हो सकता है।

उन्होंने इसे भारत के रणनीतिक हितों से जुड़ा मुद्दा बताया।

ईरान-अमेरिका संघर्ष और तेज

अमेरिका ने होर्मोजगन प्रांत, बंदर अब्बास, रेलवे स्टेशन, पुलों और अन्य सैन्य एवं परिवहन ढांचों पर भी हमले किए।

इसके जवाब में ईरान ने कतर, बहरीन और कुवैत की ओर मिसाइलें दागीं।

कई मिसाइलों को एयर डिफेंस सिस्टम ने हवा में ही नष्ट कर दिया, जबकि कुछ जगहों पर मलबा गिरने से नुकसान की खबरें सामने आई हैं।

भारत के लिए क्यों बढ़ी चिंता?

चाबहार पोर्ट भारत की विदेश नीति और व्यापारिक रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा है।

ऐसे में यदि पश्चिम एशिया में संघर्ष लंबा खिंचता है, तो इसका असर भारत की क्षेत्रीय कनेक्टिविटी, व्यापार और रणनीतिक परियोजनाओं पर भी पड़ सकता है।

हालांकि फिलहाल भारत ने साफ किया है कि उसके संचालन वाले टर्मिनल को कोई नुकसान नहीं पहुंचा है।

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