उत्तराखंड में बढ़ते मानव-वन्यजीव संघर्ष से निपटने के लिए राज्य सरकार अब स्थानीय लोगों की भागीदारी बढ़ाने जा रही है।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देश पर प्रत्येक जनपद में मानव-वन्यजीव संघर्ष निवारण समिति गठित करने की तैयारी शुरू कर दी गई है।
इन समितियों में वन विभाग और जिला प्रशासन के अधिकारियों के साथ पंचायत प्रतिनिधियों तथा स्थानीय लोगों को भी शामिल किया जाएगा।
सरकार का उद्देश्य केवल वन्यजीव हमलों के बाद राहत और बचाव तक सीमित नहीं रहेगा,
बल्कि स्थानीय स्तर पर पहले से रणनीति बनाकर ऐसी घटनाओं को रोकने पर भी जोर दिया जाएगा।
ग्रामीणों के सुझावों के आधार पर संघर्ष प्रभावित क्षेत्रों की पहचान कर वहां की परिस्थितियों के अनुरूप समाधान तैयार किए जाएंगे।
स्थानीय लोगों की होगी अहम भूमिका
वन विभाग का मानना है कि हर क्षेत्र में मानव-वन्यजीव संघर्ष की प्रकृति अलग है।
कहीं गुलदार का खतरा अधिक है तो कहीं हाथी और बाघ ग्रामीणों के लिए चुनौती बने हुए हैं।
ऐसे में स्थानीय लोगों के अनुभव और सुझाव समाधान तैयार करने में महत्वपूर्ण साबित होंगे।
प्रस्तावित समितियां उन क्षेत्रों की पहचान करेंगी जहां वन्यजीवों की आवाजाही अधिक रहती है।
साथ ही संवेदनशील इलाकों की निगरानी, जागरूकता अभियान, त्वरित सूचना प्रणाली और वन विभाग व ग्रामीणों के बीच बेहतर समन्वय पर भी काम किया जाएगा।
मुख्य वन संरक्षक (वन पंचायत) पराग मधुकर धकाते ने बताया कि मुख्यमंत्री के निर्देश पर जनपद स्तर पर समितियों के गठन की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
जल्द ही इन समितियों की संरचना और सदस्यों का खाका तैयार किया जाएगा।















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