बोले- तथ्य और प्रमाण सामने रखे कांग्रेस
हल्द्वानी के शुद्धिकरण मामले को लेकर सियासी विवाद लगातार बढ़ता जा रहा है।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने एक बार फिर कांग्रेस पर निशाना साधा है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि कांग्रेस के पास ऐसा कोई तथ्य या प्रमाण नहीं है, जिससे यह साबित हो कि हल्द्वानी में किसी व्यक्ति को अपमानित करने के उद्देश्य से शुद्धिकरण कराया गया था।
धामी ने आरोप लगाया कि इस मामले को तूल देकर समाज में भ्रम और विभाजन की स्थिति पैदा करने की कोशिश की जा रही है।
उन्होंने कांग्रेस से संवेदनशील मुद्दे पर राजनीति करने के बजाय तथ्य सामने रखने की अपील की।
FIR दर्ज होने के बाद CM का बयान
खास बात यह है कि हल्द्वानी शुद्धिकरण मामले में एक दिन पहले ही अज्ञात लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है।
इसके अगले दिन मुख्यमंत्री ने मामले को लेकर कांग्रेस की भूमिका पर सवाल उठाए हैं।
मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि राजनीतिक लाभ के लिए संवेदनशील विषयों को हवा देने के बजाय कांग्रेस को तथ्यों और प्रमाणों के आधार पर अपनी बात रखनी चाहिए।
उन्होंने कांग्रेस से समाज को जोड़ने की जिम्मेदारी निभाने की अपील भी की।
मुख्यमंत्री का यह बयान भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन के उत्तराखंड दौरे के बीच आया है।
खरगे की रैली के बाद शुरू हुआ विवाद
हल्द्वानी के रामलीला मैदान में 8 अगस्त को कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे की रैली हुई थी।
रैली के बाद मैदान में कथित तौर पर शुद्धिकरण अनुष्ठान किए जाने को लेकर विवाद शुरू हुआ।
कांग्रेस ने आरोप लगाया कि शुद्धिकरण की घटना खरगे और दलित समाज के अपमान से जुड़ी है।
पार्टी नेताओं ने इसे सामाजिक भेदभाव और संविधान की भावना के खिलाफ बताते हुए कार्रवाई की मांग की।
विवाद बढ़ने के बाद कांग्रेस नेताओं ने प्रदेश सरकार पर कार्रवाई नहीं करने का आरोप लगाया।
मामला उत्तराखंड की राजनीति से निकलकर राष्ट्रीय स्तर पर भी चर्चा में आ गया।
80 शिकायतों के बाद दर्ज हुई FIR
मामले में हल्द्वानी कोतवाली पुलिस ने अज्ञात लोगों के खिलाफ FIR दर्ज की है।
यह कार्रवाई कांग्रेस कार्यकर्ता और अधिवक्ता अंजू की शिकायत पर की गई।
नैनीताल SSP मंजूनाथ टीसी के अनुसार पुलिस को पूरे उत्तराखंड से करीब 80 शिकायतें और याचिकाएं मिली थीं।
इनमें नैनीताल जिले से 19 शिकायतें शामिल थीं।
शिकायतों के कानूनी परीक्षण के बाद अंजू की शिकायत पर FIR दर्ज की गई। पुलिस ने मामले की जांच SP क्राइम जगदीश चंद्र को सौंपी है।
किन धाराओं में दर्ज हुआ मुकदमा?
मामले में भारतीय न्याय संहिता यानी BNS की धारा 196 और 299 के साथ SC/ST एक्ट की धारा 3(1)(R) लगाई गई है।
फिलहाल FIR में आरोपी अज्ञात हैं। पुलिस की जांच में यह सामने आना बाकी है कि कथित शुद्धिकरण किसने कराया और इसके पीछे वास्तविक वजह क्या थी।
कांग्रेस और भाजपा आमने-सामने
इस मामले को लेकर कांग्रेस लगातार भाजपा और राज्य सरकार पर हमलावर है।
कांग्रेस नेताओं ने शुद्धिकरण को सामाजिक भेदभाव से जोड़ते हुए आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।
वहीं मुख्यमंत्री धामी का कहना है कि कांग्रेस को अपने आरोपों के समर्थन में तथ्य और प्रमाण सामने रखने चाहिए।
उनका आरोप है कि मामले को राजनीतिक रूप देकर समाज में भ्रम और विभाजन पैदा करने की कोशिश हो रही है।
इस बीच कांग्रेस की ओर से भी विरोध प्रदर्शन और कानूनी कार्रवाई की मांग जारी रही है। ऐसे में FIR के बाद अब पुलिस जांच इस पूरे विवाद का अगला बड़ा पड़ाव बन गई है।
अब पुलिस जांच पर टिकी नजर
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि रामलीला मैदान में कथित शुद्धिकरण किसने कराया था। साथ ही पुलिस जांच में इसके पीछे की वास्तविक मंशा क्या सामने आती है, इस पर नजर रहेगी।
फिलहाल FIR दर्ज होने के बाद मामला जांच के चरण में है।
मुख्यमंत्री धामी के ताजा बयान ने इस विवाद को एक बार फिर उत्तराखंड की सियासत के केंद्र में ला दिया है।















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