2047 तक विकसित भारत का संकल्प, नक्सलवाद से लेकर न्यूक्लियर एनर्जी तक कई मुद्दों पर बोले
देश आज अपना 80वां स्वतंत्रता दिवस मना रहा है।
इस ऐतिहासिक मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लाल किले की प्राचीर से राष्ट्रीय ध्वज फहराया
और लगातार 13वीं बार देश को संबोधित किया।
अपने करीब डेढ़ घंटे से अधिक के संबोधन में प्रधानमंत्री ने भारत के भविष्य की दिशा, विकास,
आत्मनिर्भरता, राष्ट्रीय सुरक्षा और युवाओं की भूमिका समेत कई अहम मुद्दों पर बात की।
इस वर्ष स्वतंत्रता दिवस समारोह का मुख्य विषय ‘वंदे मातरम के 150 साल’ और ‘विकसित भारत के लिए युवा शक्ति@2047’ रखा गया है।
प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में 2047 तक भारत को विकसित देश बनाने का लक्ष्य दोहराते हुए
कहा कि यह सपना देश के 140 करोड़ नागरिकों के सामूहिक प्रयास से पूरा होगा।
2047 तक भारत को विकसित देश बनाने का संकल्प
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि आजादी के 100 वर्ष पूरे होने तक यानी 2047 तक भारत को विकसित देश बनाना देश का बड़ा सपना है।
उन्होंने कहा कि जब दुनिया का सबसे अधिक आबादी वाला देश विकसित राष्ट्र बनने का संकल्प लेता है
तो इससे दुनिया में भारत के प्रति नजरिया भी बदलता है।
उन्होंने जोर दिया कि विकसित भारत का सपना तभी पूरा होगा, जब विकास का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे और देश का हर नागरिक इसमें अपनी भूमिका निभाए।

हर दिल में गूंज रहा वंदे मातरम
प्रधानमंत्री ने कहा कि आज ‘वंदे मातरम’ का नारा हर भारतीय के दिल में गूंज रहा है।
देशभर में हर घर पर तिरंगा लहरा रहा है और तिरंगा लोगों के मन में भी बसा हुआ है।
उन्होंने कहा कि उत्तर से दक्षिण और पूरब से पश्चिम तक देश तिरंगे के रंग में रंगा है।
इस बार का स्वतंत्रता दिवस राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम’ के 150 वर्ष पूरे होने के अवसर को भी समर्पित है।
नक्सल-माओवादी हिंसा अंतिम सांसें ले रही है: पीएम मोदी
लाल किले से प्रधानमंत्री ने नक्सलवाद और माओवाद को लेकर भी बड़ा दावा किया।
उन्होंने कहा कि दशकों से चली आ रही नक्सल-माओवादी हिंसा ने लाखों युवाओं का भविष्य बर्बाद किया
और हजारों सुरक्षाकर्मियों तथा आम नागरिकों की जान गई।
प्रधानमंत्री ने कहा कि 2014 में सत्ता में आने के बाद उनकी सरकार ने देश को नक्सलवाद से मुक्त करने का संकल्प लिया था।
आज नक्सल-माओवादी हिंसा अपनी ताकत खो चुकी है और शायद अपनी आखिरी सांसें ले रही है।
उन्होंने कहा कि जिन इलाकों में कभी नक्सलियों की गोलियां चलती थीं, वहां अब विकास, विश्वास और सामूहिक प्रयास का तिरंगा लहरा रहा है।
‘हथियारबंद नक्सली खत्म, लेकिन दिमागी नक्सल अब भी मौजूद’
प्रधानमंत्री ने कहा कि जंगलों में हथियार उठाने वाले नक्सलियों के खिलाफ बड़ी सफलता मिली है, लेकिन ‘दिमागी नक्सल’ अब भी मौजूद हैं।
उन्होंने आरोप लगाया कि माओवादी सोच रखने वाले लोगों ने लंबे समय तक सत्ता और नीतियों को प्रभावित करने का प्रयास किया।
पीएम ने कहा कि ऐसी विचारधारा को पहचानने और अलग-थलग करने की जरूरत है, साथ ही युवाओं को विकसित भारत के निर्माण की मुख्यधारा से जोड़ना होगा।

दुनिया में भारत का सम्मान बढ़ा
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि आज भारत दुनिया के मंच पर एक सम्मानित और प्रभावशाली देश के रूप में उभर रहा है।
उन्होंने भारत की स्थिर राजनीतिक व्यवस्था, जीवंत लोकतंत्र, मजबूत न्याय व्यवस्था और संविधान को देश की बड़ी ताकत बताया।
पीएम ने कहा कि भारत ने 2014 से अब तक करीब 40 देशों के साथ फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) की दिशा में काम किया है।
उन्होंने भारतीय MSME सेक्टर से वैश्विक बाजार में अपनी जगह बनाने का आह्वान किया।
उन्होंने कहा कि टेक्सटाइल, मशीनरी और फार्मास्यूटिकल्स समेत भारतीय उत्पादों को दुनिया के बाजार तक पहुंचाना होगा और इस अवसर को गंवाना नहीं चाहिए।
कोविड, यूक्रेन और पश्चिम एशिया संकट का किया जिक्र
प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में पिछले वर्षों में सामने आई वैश्विक चुनौतियों का भी उल्लेख किया।
उन्होंने कहा कि दुनिया ने कोविड-19 महामारी का सामना किया और इसके बाद यूक्रेन युद्ध तथा पश्चिम एशिया के संकट ने वैश्विक परिस्थितियों को और चुनौतीपूर्ण बनाया।
पीएम मोदी ने कहा कि इन संकटों के बीच भारत ने तैयारी और रणनीतिक फैसलों के जरिए परिस्थितियों का सामना किया।
उन्होंने कहा कि संकट के समय भारत ने नागरिकों के हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता दी।
‘समुद्र मंथन’ से गहरे समुद्र में संसाधनों की खोज
प्रधानमंत्री ने ऊर्जा सुरक्षा पर भी बड़ा ऐलान किया।
उन्होंने कहा कि देश को लंबे समय तक कच्चे तेल पर निर्भर रहने की सोच से बाहर निकलना होगा।
पीएम के मुताबिक, भारत के समुद्री क्षेत्र के करीब 99 फीसदी हिस्से को पहले ‘नो-गो एरिया’ माना जाता था, लेकिन अब उसे खोज और अन्वेषण के लिए खोल दिया गया है।
उन्होंने बताया कि गहरे समुद्र में नए संसाधनों और रिजर्व की खोज को गति देने के लिए ‘समुद्र मंथन’ पहल शुरू की गई है
और हाल ही में इस दिशा में 85 हजार करोड़ रुपये की राशि से काम को तेज करने का फैसला किया गया है।
2047 तक 100 GW न्यूक्लियर पावर का लक्ष्य
प्रधानमंत्री ने परमाणु ऊर्जा को भारत की ऊर्जा सुरक्षा का महत्वपूर्ण आधार बताया।
उन्होंने कहा कि भारत ने परमाणु ऊर्जा के क्षेत्र में बड़ा लक्ष्य तय किया है।
उन्होंने कहा कि 2047 तक 100 GW न्यूक्लियर पावर के लक्ष्य के साथ भारत आगे बढ़ रहा है।
इसी दशक में पांच नए न्यूक्लियर रिएक्टर शुरू करने का लक्ष्य भी रखा गया है।
पीएम ने फास्ट ब्रीडर न्यूक्लियर टेक्नोलॉजी में भारत की उपलब्धि को परमाणु ईंधन के क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया।
रक्षा उत्पादन से इलेक्ट्रॉनिक मैन्युफैक्चरिंग तक बढ़ी क्षमता
प्रधानमंत्री ने पिछले वर्षों में देश की उत्पादन क्षमता में हुई वृद्धि का भी उल्लेख किया।
उन्होंने कहा कि पिछले 12 वर्षों में रक्षा उत्पादन चार गुना बढ़ा है।
इसके अलावा खादी और ग्रामोद्योग का उत्पादन पांच गुना तथा इलेक्ट्रॉनिक मैन्युफैक्चरिंग सात गुना बढ़ने की बात उन्होंने कही।
पीएम ने डिजिटल लेनदेन और मोबाइल फोन उत्पादन में भी हुई वृद्धि का उल्लेख किया।
उन्होंने कहा कि देश को अब छोटे सपनों तक सीमित नहीं रहना चाहिए। बड़े सपने ही सोच और संभावनाओं का दायरा बढ़ाते हैं।

बाढ़ प्रभावित परिवारों के साथ खड़े होने का भरोसा
स्वतंत्रता दिवस के संबोधन की शुरुआत में प्रधानमंत्री ने देश के कुछ हिस्सों में आई बाढ़ का भी जिक्र किया।
उन्होंने कहा कि प्राकृतिक आपदाओं से प्रभावित परिवारों के साथ पूरा देश खड़ा है और उन्हें हरसंभव सहायता दी जाएगी।
राजघाट पहुंचकर महात्मा गांधी को दी श्रद्धांजलि
स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सबसे पहले राजघाट पहुंचकर महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि अर्पित की।
इसके बाद वह लाल किले पहुंचे, जहां रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ और रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह ने उनका स्वागत किया।
लाल किले पर प्रधानमंत्री को गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया। इसके बाद उन्होंने राष्ट्रीय ध्वज फहराया।
इस दौरान कैप्टन सोनिया सिंह चौहान ने ध्वजारोहण में प्रधानमंत्री की सहायता की।
स्वतंत्रता सेनानियों को किया नमन
स्वतंत्रता दिवस पर देशवासियों को शुभकामनाएं देते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने उन अनगिनत स्वतंत्रता सेनानियों को श्रद्धांजलि दी,
जिनके साहस, बलिदान और संघर्ष के कारण भारत को औपनिवेशिक शासन से आजादी मिली।
उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता सेनानियों के सपने आज भी देश को प्रेरणा देते हैं और विकसित भारत के निर्माण के संकल्प को नई ऊर्जा देते हैं।
युवा शक्ति होगी विकसित भारत की आधारशिला
इस वर्ष स्वतंत्रता दिवस समारोह में ‘युवा शक्ति@2047’ पर विशेष जोर दिया गया।
प्रधानमंत्री ने युवाओं को विकसित भारत के निर्माण की सबसे बड़ी शक्ति बताते हुए उन्हें देश की विकास यात्रा से जोड़ने का आह्वान किया।
उन्होंने कहा कि भारत के बड़े सपने तभी पूरे होंगे, जब देश की युवा शक्ति अपनी ऊर्जा, प्रतिभा और नवाचार को राष्ट्र निर्माण में लगाएगी।
प्रधानमंत्री के भाषण का संदेश
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्वतंत्रता दिवस संबोधन का केंद्रीय संदेश साफ रहा—2047 तक विकसित भारत का निर्माण।
इसके लिए उन्होंने मजबूत अर्थव्यवस्था, आत्मनिर्भर ऊर्जा व्यवस्था, आधुनिक तकनीक,
रक्षा उत्पादन, वैश्विक व्यापार, युवा शक्ति और राष्ट्रीय एकता को महत्वपूर्ण आधार बताया।
लाल किले से पीएम मोदी ने देशवासियों से बड़े सपने देखने, मजबूत संकल्प लेने और सामूहिक प्रयासों के जरिए भारत को विकसित राष्ट्र बनाने की अपील की।
















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