सोनम वांगचुक ने देवेंद्र महतो के संघर्ष को किया सलाम
झारखंड में JPSC-JSSC परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर चल रहे छात्र आंदोलन को बड़ा मोड़ मिल गया है।
हेमंत सोरेन सरकार ने JSSC-CGL परीक्षा को रद्द करने के साथ ही TDPL के जरिए कराई गई अन्य भर्ती परीक्षाओं को भी रद्द करने का फैसला लिया है।
इसके बाद छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो ने अपनी 16 दिन की भूख हड़ताल खत्म कर दी।
इसी बीच सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने देवेंद्र नाथ महतो से वीडियो कॉल पर बातचीत की।
वांगचुक ने छात्रों के संघर्ष की सराहना की और झारखंड सरकार के फैसले के लिए धन्यवाद दिया।
सोनम वांगचुक ने देवेंद्र महतो को किया सलाम
वीडियो कॉल के दौरान सोनम वांगचुक ने देवेंद्र नाथ महतो से आंदोलन और छात्रों की स्थिति को लेकर बातचीत की।
उन्होंने लंबे समय तक अपनी मांगों को लेकर संघर्ष करने और छात्रों के मुद्दे पर मजबूती से खड़े रहने के लिए महतो की तारीफ की।
वांगचुक ने कहा कि लंबे समय तक आंदोलन में डटे रहना आसान नहीं होता।
उन्होंने महतो के जज्बे, निष्ठा और छात्रों के हित में किए जा रहे प्रयासों की सराहना की।
दरअसल, इससे पहले भी सोनम वांगचुक ने महतो के आंदोलन को लेकर उनसे बातचीत की थी।
एक बातचीत के दौरान वांगचुक की अपील के बाद महतो ने पानी ग्रहण किया था, जबकि उनका अनशन जारी रहा था।

सरकार ने मानी बड़ी मांग, JSSC-CGL परीक्षा रद्द
छात्रों के लंबे आंदोलन के बाद झारखंड सरकार ने बड़ा फैसला लेते हुए JSSC-CGL परीक्षा रद्द करने की घोषणा की।
इसके साथ ही TDPL से जुड़ी अन्य परीक्षाओं, परिणामों और चयन प्रक्रियाओं को भी रद्द करने का फैसला लिया गया है।
सरकार ने भर्ती परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों की जांच कराने की बात भी कही है।
यह फैसला रांची में करीब 24 दिन तक चले छात्र आंदोलन के बाद सामने आया।
16 दिन की भूख हड़ताल के बाद देवेंद्र महतो ने तोड़ा अनशन
सरकार के फैसले के बाद छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो ने अपनी 16 दिन की भूख हड़ताल खत्म कर दी।
उन्होंने रांची के सदर अस्पताल में अनशन समाप्त किया। उनके साथ आंदोलन में शामिल अन्य प्रदर्शनकारियों ने भी भूख हड़ताल खत्म की।
महतो ने सरकार के फैसले को छात्रों के संघर्ष की बड़ी सफलता बताया।
हालांकि, छात्रों की ओर से परीक्षा व्यवस्था में स्थायी सुधार और पारदर्शी व्यवस्था की मांग अभी भी प्रमुख मुद्दा बनी हुई है।
क्यों हुई थी आंदोलन की शुरुआत
JPSC और JSSC की विभिन्न भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर छात्र लंबे समय से आंदोलन कर रहे थे।
छात्रों की मांग थी कि विवादित परीक्षाओं की जांच हो और भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित की जाए।
आंदोलन के दौरान देवेंद्र नाथ महतो ने अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू की थी। धीरे-धीरे यह आंदोलन रांची में बड़ा छात्र आंदोलन बन गया।
सरकार के फैसले के बाद प्रदर्शन स्थल पर जश्न
JSSC-CGL और TDPL से जुड़ी परीक्षाओं को रद्द किए जाने की घोषणा के बाद आंदोलनरत छात्रों में खुशी का माहौल देखने को मिला।
प्रदर्शन स्थल पर छात्रों ने जश्न मनाया और इसे अपने लंबे संघर्ष की बड़ी जीत बताया।
हालांकि, परीक्षा रद्द होने के बाद उन अभ्यर्थियों के भविष्य को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं,
जिन्होंने JSSC-CGL में सफलता हासिल की थी।
रिपोर्टों के मुताबिक करीब 2,000 चयनित अभ्यर्थियों पर इस फैसले का असर पड़ सकता है।
सोनम वांगचुक की बातचीत ने बढ़ाया आंदोलन का संदेश
सरकार के फैसले और देवेंद्र महतो के अनशन खत्म करने के बीच सोनम वांगचुक की बातचीत ने इस पूरे घटनाक्रम को एक अलग पहचान दी है।
वांगचुक ने छात्रों के संघर्ष की सराहना करते हुए देवेंद्र महतो के नेतृत्व और धैर्य की तारीफ की।
वहीं महतो पहले भी बता चुके हैं कि सोनम वांगचुक से उन्हें आंदोलन के दौरान प्रेरणा मिली थी।
आगे क्या?
JSSC-CGL और TDPL से जुड़ी परीक्षाओं को रद्द करने के बाद अब सबसे बड़ी चुनौती नई और पारदर्शी परीक्षा व्यवस्था तैयार करने की होगी।
छात्रों की ओर से अब इस बात पर नजर रहेगी कि सरकार जांच को किस तरह आगे बढ़ाती है
और भविष्य में भर्ती परीक्षाओं में अनियमितताओं को रोकने के लिए क्या ठोस व्यवस्था लागू करती है।
फिलहाल इतना जरूर है कि लंबे छात्र आंदोलन के बाद सरकार के फैसले ने देवेंद्र नाथ महतो की भूख हड़ताल खत्म करा दी है और आंदोलन को एक बड़ी सफलता मिली है।
वहीं सोनम वांगचुक ने भी इस संघर्ष को समर्थन देते हुए महतो के जज्बे को सलाम किया है।















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