2,400 से ज्यादा लापता; 320 भारतीयों से संपर्क नहीं
हिमालयी सीमा क्षेत्र में तबाही के बाद चौथे दिन भी बड़ा रेस्क्यू ऑपरेशन, भारत ने बढ़ाई राहत और बचाव सहायता
नेपाल और तिब्बत के सीमा क्षेत्र में आई विनाशकारी बाढ़ ने भारी तबाही मचाई है।
ताजा रिपोर्टों के अनुसार, इस आपदा में अब तक कम से कम 586 लोगों की मौत हो चुकी है।
वहीं, 2,400 से अधिक लोग अभी भी लापता बताए जा रहे हैं। नेपाल में राहत और बचाव अभियान लगातार जारी है।
बचावकर्मी दुर्गम इलाकों, नदी किनारों, सुरंगों और मलबे के बीच फंसे लोगों की तलाश कर रहे हैं। खराब मौसम और टूटे संपर्क मार्ग रेस्क्यू ऑपरेशन की बड़ी चुनौती बने हुए हैं।
नेपाल में 1,924 लोग लापता, विदेशी नागरिक भी शामिल
नेपाल की आपदा प्रबंधन एजेंसियों के अनुसार, देश में करीब 1,924 लोग लापता हैं।
इनमें हाइड्रोपावर परियोजनाओं के कर्मचारी, पर्यटक और विदेशी नागरिक शामिल हैं।
रिपोर्टों के मुताबिक, बड़ी संख्या में लोग बिजली परियोजनाओं और निर्माण स्थलों से भी लापता हैं।
कई इलाकों में बाढ़ ने सड़कें, पुल और अन्य महत्वपूर्ण ढांचा पूरी तरह नष्ट कर दिया।
नेपाल में अब तक हजारों सुरक्षाकर्मियों को राहत और बचाव अभियान में लगाया गया है।
सेना, पुलिस और सशस्त्र पुलिस बल संयुक्त रूप से अभियान चला रहे हैं।
नेपाल-चीन सीमा क्षेत्र में लगातार निगरानी भी की जा रही है। हिमालयी क्षेत्र में नई बाढ़ की आशंका को देखते हुए प्रशासन अलर्ट मोड में है।
320 भारतीय अभी भी लापता या संपर्क से बाहर
भारत के विदेश मंत्रालय के अनुसार, नेपाल में आई इस विनाशकारी आपदा के बाद 320 भारतीय नागरिक अभी भी लापता या संपर्क से बाहर हैं।
विदेश मंत्रालय लगातार नेपाल और चीन में मौजूद भारतीय दूतावासों के माध्यम से प्रभावित भारतीयों की जानकारी जुटा रहा है।
तिब्बत की ओर मौजूद करीब 400 भारतीय नागरिक सुरक्षित बताए गए हैं और उनसे संपर्क स्थापित किया गया है। उन्हें सुरक्षित निकालने की प्रक्रिया भी जारी है।
कई भारतीय नागरिक कैलाश मानसरोवर यात्रा, पर्यटन और विभिन्न परियोजनाओं के काम के लिए प्रभावित क्षेत्रों में मौजूद थे।
भारत ने भेजी राहत सामग्री की तीसरी खेप
भारत ने नेपाल के लिए मानवीय सहायता बढ़ाते हुए राहत सामग्री की एक और खेप भेजी है।
राहत सामग्री के साथ डॉक्टरों, पैरामेडिक्स और टनल रेस्क्यू से जुड़े विशेषज्ञों की टीम भी भेजी गई है।
सहायता में पोर्टेबल जनरेटर, खाद्य सामग्री, जरूरी दवाएं और पानी शुद्ध करने की सामग्री शामिल है।
भारत ने नेपाल को जरूरत पड़ने पर अतिरिक्त राहत और बचाव सहायता देने की बात भी कही है।
भारत सरकार ने विदेश मंत्रालय में कंट्रोल रूम सक्रिय किया है।
नेपाल और चीन में भारतीय मिशन भी प्रभावित नागरिकों के लिए लगातार समन्वय कर रहे हैं।
सुरंगों और मलबे में फंसे लोगों की तलाश सबसे बड़ी चुनौती
रेस्क्यू टीमों के सामने सबसे बड़ी चुनौती दुर्गम पहाड़ी भूभाग और मलबे से भरे इलाकों में लोगों तक पहुंचना है।
कुछ हाइड्रोपावर परियोजनाओं और सुरंग क्षेत्रों में भी बड़े पैमाने पर तलाशी अभियान चल रहा है।
मौसम खराब होने के कारण कई जगह हवाई बचाव अभियान प्रभावित हुआ है।
सीमा क्षेत्र में अचानक आई बाढ़ के बाद बने अस्थिर जलाशयों और नदी प्रवाह को लेकर भी चिंता बनी हुई है।
अधिकारी संभावित नई बाढ़ के खतरे पर लगातार नजर रखे हुए हैं।
असम, महाराष्ट्र और अन्य राज्यों के परिवारों की बढ़ी चिंता
नेपाल में फंसे और लापता भारतीयों को लेकर कई राज्यों में परिवारों की चिंता बढ़ गई है।
अलग-अलग राज्यों के पर्यटकों और यात्रियों से संपर्क स्थापित करने की कोशिशें जारी हैं।
विशेष रूप से कैलाश मानसरोवर यात्रा और सीमा क्षेत्र में मौजूद भारतीय नागरिकों की जानकारी जुटाई जा रही है।
सरकारों और दूतावासों के बीच लगातार समन्वय बनाया गया है।
नेपाल-तिब्बत सीमा क्षेत्र में आई यह त्रासदी हाल के वर्षों की सबसे बड़ी हिमालयी आपदाओं में शामिल हो गई है।
राहत और बचाव अभियान के साथ अब लापता लोगों की तलाश सबसे बड़ी प्राथमिकता बनी हुई है।















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