अब दस्तावेजों की होगी गहन जांच
नए फॉर्म में जमीन, छात्र संख्या, ऑडिट रिपोर्ट और शिक्षण व्यवस्था की देनी होगी जानकारी
उत्तराखंड में मदरसा शिक्षा व्यवस्था और मदरसों की तस्दीक प्रक्रिया को लेकर बड़ा बदलाव किया जा रहा है।
मदारिस-ए-अरबिया के तस्दीकनामा जारी करने की व्यवस्था को अधिक पारदर्शी, व्यवस्थित और विश्वसनीय बनाने के लिए नई प्रक्रिया तैयार की जा रही है।
ईद के बाद से देहरादून में इस विषय पर लगातार अध्ययन और आवश्यक सुधारों पर काम किया जा रहा है।
विभिन्न संस्थाओं के सत्यापन फॉर्म और उनकी प्रक्रियाओं का अध्ययन करने के बाद मदरसों की जरूरतों के अनुरूप नया फॉर्म तैयार किया गया है।
इस नए फॉर्म को जल्द सार्वजनिक किए जाने की तैयारी है।
अब सिर्फ औपचारिकता नहीं होगी तस्दीक प्रक्रिया
रमजान के महीने में देहरादून और आसपास के क्षेत्रों में मदरसों के सफीर चंदा एकत्र करने के लिए बड़ी संख्या में पहुंचते हैं।
इन सफीरों के लिए तस्दीकनामा जारी किए जाने की व्यवस्था पहले से चली आ रही है।
अब इस प्रक्रिया को केवल औपचारिकता तक सीमित रखने के बजाय दस्तावेजी जांच और विस्तृत सत्यापन से जोड़ा जाएगा।
नई व्यवस्था के तहत मदरसे से जुड़ी हर जरूरी जानकारी निर्धारित फॉर्म में देनी होगी।
मदरसे की पूरी जानकारी देनी होगी
नए फॉर्म में मदरसे का नाम, पूरा पता और उसके मुखिया, यानी मोहतमिम या नाजिम की जानकारी दर्ज करनी होगी।
ट्रस्ट के रजिस्ट्रेशन, मान्यता और जमीन तथा इमारत से जुड़े दस्तावेज भी प्रस्तुत करने होंगे।
मदरसे में पढ़ने वाले कुल छात्रों की संख्या और स्थानीय व बाहरी छात्रों की अलग-अलग जानकारी देनी होगी।
पढ़ाई की व्यवस्था, शिक्षकों और अन्य स्टाफ की संख्या का विवरण भी अनिवार्य होगा।
खर्च और ऑडिट रिपोर्ट की भी होगी जांच
मदरसे के वार्षिक खर्च, ऑडिट रिपोर्ट, परीक्षा परिणाम और रसीद बुक से जुड़ी जानकारी भी प्रस्तुत करनी होगी।
पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए मदरसे की इमारत और बोर्ड की तस्वीरें GPS कैमरे से उपलब्ध करानी होंगी।
इसके अलावा कक्षा में चल रही शिक्षण गतिविधियों का वीडियो भी देना होगा।
फॉर्म में स्थानीय स्तर के सम्मानित लोगों से संबंधित जानकारी भी शामिल की जाएगी।
जरूरत पड़ने पर मौके पर जाकर होगी जांच
फॉर्म और सभी आवश्यक दस्तावेज मिलने के बाद उनकी बारीकी से जांच-पड़ताल की जाएगी।
आवश्यकता पड़ने पर संबंधित मदरसे में जाकर उसकी वास्तविक स्थिति और शिक्षण गतिविधियों का भी सत्यापन किया जाएगा।
दस्तावेजों और अन्य जानकारियों से संतुष्ट होने के बाद ही तस्दीक प्रमाण पत्र जारी किया जाएगा।
हर मदरसे का रिकॉर्ड सुरक्षित रखा जाएगा
नई व्यवस्था के तहत प्रत्येक मदरसे का बाकायदा रिकॉर्ड शहर काजी के कार्यालय में सुरक्षित रखा जाएगा।
सालाना तजदीद के समय पिछले वर्ष का तस्दीकनामा और ऑडिट रिपोर्ट या बैलेंस शीट प्रस्तुत करनी होगी।
देहरादून काजी हशीम अहमद सिद्दीकी के अनुसार, इस पहल का उद्देश्य किसी मदरसे के लिए परेशानी पैदा करना नहीं है।
उन्होंने कहा कि नई व्यवस्था का मकसद तस्दीक प्रक्रिया में पारदर्शिता और भरोसा बढ़ाना है।
साथ ही सही और जरूरतमंद मदरसों तक सुविधाएं और सहयोग पहुंचाने के लिए भी व्यवस्था को अधिक व्यवस्थित बनाया जा रहा है।
नई व्यवस्था की अहम बातें
- मदरसों की पहले से चली आ रही तस्दीक व्यवस्था में बदलाव किया जा रहा है।
- निर्धारित फॉर्म के साथ सभी आवश्यक दस्तावेज जमा करना अनिवार्य होगा।
- दस्तावेजों और दी गई जानकारी की बारीकी से जांच की जाएगी।
- संतुष्टि के बाद ही शहर काजी की ओर से तस्दीकनामा जारी किया जाएगा।
- आवश्यकता पड़ने पर मौके पर जाकर मदरसे की जांच की जाएगी।
- प्रत्येक मदरसे का रिकॉर्ड बाकायदा सुरक्षित रखा जाएगा।
- सालाना तजदीद के दौरान पिछले वर्ष का तस्दीकनामा और ऑडिट रिपोर्ट या बैलेंस शीट देनी होगी।















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