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SSC नकल केस में प्रदीप चौहान की जमानत खारिज

कर्मचारी चयन आयोग (SSC) की ऑनलाइन परीक्षा में कथित तौर पर रिमोट एक्सेस के जरिए नकल कराने के

मामले में आरोपी प्रदीप चौहान को देहरादून सत्र न्यायालय से राहत नहीं मिली है।

कोर्ट ने उसकी जमानत याचिका खारिज कर दी है।

कोर्ट ने मामले को गंभीर प्रकृति का मानते हुए कहा कि प्रथम दृष्टया आरोपी की भूमिका प्रतियोगी परीक्षा के

प्रश्नपत्र को रिमोट एक्सेस के जरिए बाहर बैठे सॉल्वर से हल कराने की कथित साजिश में सामने आती है।

SSC परीक्षा में हाईटेक तरीके से नकल का आरोप

मामला कर्मचारी चयन आयोग की ऑनलाइन परीक्षा में कथित तौर पर तकनीक के जरिए नकल कराने से जुड़ा है।

आरोप है कि परीक्षा केंद्र के नेटवर्क को रिमोट एक्सेस के माध्यम से बाहर बैठे सॉल्वर से जोड़ा गया।

इसके बाद परीक्षा में शामिल अभ्यर्थियों के प्रश्नों को बाहर बैठे सॉल्वर से हल कराए जाने की व्यवस्था की गई।

अभियोजन के अनुसार, इस कथित व्यवस्था के बदले परीक्षार्थियों से पैसे भी लिए जाते थे।

14 फरवरी को दर्ज हुई थी एफआईआर

पुलिस उपाधीक्षक जगदीश चंद्र पंत की ओर से 14 फरवरी 2026 को देहरादून नगर कोतवाली में मुकदमा दर्ज कराया गया था।

एफआईआर के अनुसार, 13 फरवरी को महादेव डिजिटल जोन, एमकेपी इंटर कॉलेज में SSC मल्टी टास्किंग स्टाफ और हवलदार परीक्षा-2025 आयोजित की जा रही थी।

आरोप है कि परीक्षा के दौरान संगठित तरीके से रिमोट एक्सेस समेत अन्य

तकनीकी संसाधनों का इस्तेमाल कर अभ्यर्थियों को अनुचित लाभ पहुंचाने की कोशिश की गई।

बाहर बैठे सॉल्वर से हल कराने की थी कथित व्यवस्था

अभियोजन पक्ष के अनुसार, प्रदीप चौहान अन्य आरोपियों के साथ मिलकर परीक्षा केंद्रों को ऐसी तकनीकी सुविधा

उपलब्ध कराता था, जिससे परीक्षा केंद्र का नेटवर्क बाहर बैठे सॉल्वर से जोड़ा जा सके।

आरोप है कि इसके माध्यम से अभ्यर्थियों के प्रश्नपत्र बाहर भेजे जाते थे और वहां बैठे सॉल्वर प्रश्नों के उत्तर उपलब्ध कराते थे।

मामले की गंभीरता इस बात से भी जुड़ी है कि प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित तौर पर

तकनीक का इस्तेमाल कर पारंपरिक नकल से अलग एक संगठित व्यवस्था तैयार करने का आरोप सामने आया है।

बचाव पक्ष बोला- झूठा फंसाया गया

जमानत याचिका पर सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष ने प्रदीप चौहान को निर्दोष बताया।

बचाव पक्ष का कहना था कि उसे मामले में झूठा फंसाया गया है।

बचाव पक्ष ने तर्क दिया कि प्रदीप चौहान न तो परीक्षा केंद्र का मालिक था, न पर्यवेक्षक और न ही परीक्षार्थी।

उसके पास से कोई आपत्तिजनक सामग्री या अन्य बरामदगी होने से भी इनकार किया गया।

बचाव पक्ष ने मामले के एक सह-आरोपी को हाईकोर्ट से जमानत मिलने का हवाला देते हुए आरोपी को भी राहत देने की मांग की।

अभियोजन ने कहा- सुनियोजित तरीके से पहुंचाया अनुचित लाभ

वहीं अभियोजन पक्ष ने जमानत याचिका का विरोध करते हुए कहा कि आरोपी ने अन्य लोगों के साथ मिलकर

परीक्षार्थियों को अनुचित लाभ पहुंचाने के लिए सुनियोजित तरीके से व्यवस्था तैयार की।

अभियोजन ने कोर्ट को यह भी बताया कि आरोपी के खिलाफ परीक्षा में नकल कराने से जुड़ा एक अन्य मामला भी दर्ज है।

अभियोजन पक्ष का कहना था कि आरोपों की प्रकृति और मामले से जुड़े रिकॉर्ड को देखते हुए आरोपी को जमानत देना उचित नहीं होगा।

कोर्ट ने माना मामला गंभीर

दोनों पक्षों की दलीलें सुनने और उपलब्ध रिकॉर्ड पर विचार करने के बाद देहरादून सत्र न्यायालय ने आरोपी की जमानत याचिका खारिज कर दी।

कोर्ट ने प्रथम दृष्टया मामले को गंभीर माना और कहा कि आरोपी की कथित भूमिका परीक्षा के प्रश्नपत्र को

रिमोट एक्सेस के जरिए बाहर बैठे सॉल्वर से हल कराने की साजिश से जुड़ी दिखाई देती है।

इस फैसले के बाद एक बार फिर प्रतियोगी परीक्षाओं की सुरक्षा और हाईटेक माध्यमों से होने वाली कथित नकल पर सवाल खड़े हो गए हैं।

मामला यह भी दिखाता है कि ऑनलाइन परीक्षाओं में तकनीकी सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत करना कितना जरूरी है।

https://regionalreporter.in/gairsain-tehsil-diwas-34-complaints-30-officers/
https://youtu.be/LwK69aMkayY?si=uGvoIRT2e2H2YeaA
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