उत्तराखंड में एमबीबीएस दाखिले की नीट-यूजी काउंसलिंग के बीच अब एससी-एसटी प्रमाणपत्रों की वैधता को लेकर सवाल उठे हैं।
प्रथम चरण की काउंसलिंग में सीट हासिल करने वाले आठ अभ्यर्थियों के जाति प्रमाणपत्रों को लेकर शिकायतें मिली हैं।
शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए एचएनबी उत्तराखंड चिकित्सा शिक्षा विश्वविद्यालय प्रशासन ने
सभी आठ अभ्यर्थियों को मूल दस्तावेजों के साथ तलब किया है।
विश्वविद्यालय प्रशासन मंगलवार को अभ्यर्थियों के मूल जाति प्रमाणपत्रों समेत अन्य संबंधित दस्तावेजों की जांच करेगा।
आठ अभ्यर्थियों के प्रमाणपत्रों की होगी जांच
विश्वविद्यालय के अनुसार, शिकायतों में अभ्यर्थियों के एससी-एसटी आरक्षण से जुड़े प्रमाणपत्रों की वैधता पर सवाल उठाए गए हैं।
इसके बाद प्रशासन ने सभी संबंधित दस्तावेजों का विस्तृत सत्यापन कराने का निर्णय लिया है।
जांच के दौरान यह देखा जाएगा कि प्रमाणपत्र सक्षम प्राधिकारी की ओर से जारी किए गए हैं या नहीं।
इसके साथ ही प्रमाणपत्रों की वैधता और आरक्षण का लाभ लेने के लिए निर्धारित पात्रता की भी जांच होगी।
सत्यापन के बाद सामने आएगी शिकायतों की सच्चाई
विश्वविद्यालय प्रशासन का कहना है कि दस्तावेजों के सत्यापन के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि शिकायतों में कितनी सच्चाई है।
फिलहाल किसी अभ्यर्थी के प्रमाणपत्र को गलत या फर्जी घोषित नहीं किया गया है।
विश्वविद्यालय के परीक्षा नियंत्रक प्रो. विजय जुयाल ने आठ अभ्यर्थियों को मूल दस्तावेजों के साथ बुलाए जाने की पुष्टि की है।
उन्होंने कहा कि सभी प्रमाणपत्रों की गहनता से जांच की जाएगी।
नियमों के विपरीत मिले प्रमाणपत्र तो होगी कार्रवाई
दस्तावेज सत्यापन के दौरान यदि किसी अभ्यर्थी का प्रमाणपत्र निर्धारित नियमों के अनुरूप नहीं पाया जाता है,
तो नियमानुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी।
फिलहाल विश्वविद्यालय प्रशासन जांच पूरी होने का इंतजार कर रहा है।
एमबीबीएस दाखिले की काउंसलिंग में पहले ही प्रमाणपत्रों को लेकर सवाल उठ चुके हैं।
अब एससी-एसटी प्रमाणपत्रों की जांच शुरू होने से इस मामले पर भी विश्वविद्यालय प्रशासन की कार्रवाई महत्वपूर्ण मानी जा रही है।















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