केंद्र सरकार की चारधाम-चार वेद महाविद्यालय योजना के तहत उत्तराखंड में वेद महाविद्यालय स्थापित करने की प्रक्रिया शुरू हो गई है।
इसके लिए बदरी केदार मंदिर समिति (बीकेटीसी) ने रुद्रप्रयाग जिले के संसारी में 22 नाली भूमि का चयन किया है।
केंद्र सरकार की योजना के तहत देश के चारधाम क्षेत्रों में चार वेद महाविद्यालय स्थापित किए जाने प्रस्तावित हैं।
इन संस्थानों का उद्देश्य युवा पीढ़ी को वेद, पुराण और भारतीय संस्कृति से जुड़ी शिक्षा उपलब्ध कराना है।
उत्तराखंड में प्रस्तावित महाविद्यालय बदरीनाथ धाम क्षेत्र के लिए तय किया गया है।
मंडल और सिमली में नहीं मिली पर्याप्त भूमि
संस्कृत शिक्षा विभाग की ओर से वेद महाविद्यालय स्थापित करने को लेकर प्रस्ताव तैयार किया गया था।
इसके तहत बीकेटीसी के अधीन संचालित महाविद्यालयों में उपलब्ध भूमि और संभावनाओं का परीक्षण किया गया।
चमोली जिले के मंडल और सिमली में भूमि की उपलब्धता देखी गई। हालांकि, इन स्थानों पर महाविद्यालय के लिए आवश्यक भूमि पर्याप्त नहीं पाई गई।
इसके बाद रुद्रप्रयाग जिले के संसारी में बीकेटीसी की भूमि को उपयुक्त विकल्प के रूप में चिन्हित किया गया।
बीकेटीसी बोर्ड बैठक में प्रस्ताव पारित
संसारी में मंदिर समिति की करीब 22 नाली भूमि का चयन किए जाने के बाद
इसकी स्वीकृति के लिए प्रस्ताव बीकेटीसी की बोर्ड बैठक में रखा गया।
बोर्ड ने चयनित भूमि से संबंधित प्रस्ताव को पारित कर दिया है।
अब प्रस्तावित भूमि को वेद महाविद्यालय की स्थापना के लिए आगे की प्रक्रिया में शामिल किया जाएगा।
महाविद्यालय के निर्माण और संचालन से जुड़ी आगामी कार्रवाई संस्कृत शिक्षा विभाग की योजना के अनुसार आगे बढ़ेगी।
युवाओं को मिलेगी वेद-पुराणों की शिक्षा
बीकेटीसी अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी ने कहा कि देवभूमि उत्तराखंड में वेद महाविद्यालय की स्थापना केंद्र और राज्य सरकार का सराहनीय कदम है।
इससे प्रदेश के युवाओं को प्राचीन भारतीय संस्कृति और वेद-पुराणों की शिक्षा प्राप्त करने का अवसर मिलेगा।
उन्होंने कहा कि बीकेटीसी ने बोर्ड बैठक में महाविद्यालय के लिए चयनित भूमि का प्रस्ताव पारित कर दिया है।
संस्कृत शिक्षा विभाग की ओर से महाविद्यालय खोलने की योजना पर काम किया जा रहा है।















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