अंकिता भंडारी हत्याकांड में तीन दोषियों को उम्रकैद की सजा सुनाए जाने के बावजूद कथित VIP की भूमिका को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
श्रीनगर गढ़वाल में जस्टिस फॉर अंकिता कमेटी से जुड़े कार्यकर्ताओं ने पीड़ित परिवार को सरकारी नौकरी
और आर्थिक सहायता मिलने के दावों पर सवाल उठाए।
साथ ही कथित VIP एंगल की निष्पक्ष जांच, दुष्यंत कुमार गौतम की राज्यपाल नियुक्ति वापस लेने और अंकिता के माता-पिता को न्याय दिलाने की मांग दोहराई।
कमेटी से जुड़ी डॉ. रेशमा पंवार, मुकेश सेमवाल और अनिल तिवारी ने अलग-अलग बयानों में मामले के विभिन्न पहलुओं पर अपनी बात रखी।
उन्होंने कहा कि दोषियों को सजा मिलने के बाद भी परिवार की न्याय की लड़ाई पूरी नहीं हुई है।
उनके मुताबिक, जब तक कथित VIP एंगल और घटनाक्रम से जुड़े अनसुलझे सवालों की जांच नहीं होती, तब तक न्याय की मांग जारी रहेगी।
परिवार को नौकरी और करोड़ों की सहायता मिलने के दावों पर सवाल
जस्टिस फॉर अंकिता कमेटी से जुड़ीं और AIDSO की काउंसिल सदस्य डॉ. रेशमा पंवार ने कहा कि वह
अंकिता के माता-पिता के लगातार संपर्क में हैं और उनके गांव भी जाती रहती हैं।
उन्होंने दावा किया कि अंकिता के भाई को अब तक सरकारी नौकरी नहीं मिली है।
उन्होंने परिवार को करोड़ों रुपये की आर्थिक सहायता दिए जाने की चर्चाओं पर भी सवाल उठाए।
डॉ. पंवार ने कहा कि अंकिता के माता-पिता स्वाभिमानी हैं और अपनी बेटी को न्याय दिलाने के लिए लगातार संघर्ष कर रहे हैं।
उनके अनुसार, परिवार की आर्थिक स्थिति को लेकर किए जा रहे दावों और जमीनी परिस्थितियों में अंतर दिखाई देता है।
उन्होंने सरकार पर परिवार के समझौता कर लेने का नैरेटिव फैलाने का आरोप भी लगाया।
अंकिता की अंत्येष्टि के समय के घटनाक्रम का जिक्र करते हुए डॉ. पंवार ने आरोप लगाया कि उस दौरान
अंकिता की मां को अस्पताल में भर्ती कराया गया और उनके पिता को पुलिस हिरासत में रखा गया।
उन्होंने परिवार पर अंतिम संस्कार के लिए दबाव बनाए जाने का दावा भी किया।
साथ ही, परिवार पर एक करोड़ रुपये की मांग करने के आरोपों को गलत बताया। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।

VIP एंगल पर हाईकोर्ट में कानूनी लड़ाई का दावा
जस्टिस फॉर अंकिता कमेटी, श्रीनगर गढ़वाल से जुड़े मुकेश सेमवाल ने कहा कि अंकिता को न्याय दिलाने की
लड़ाई केवल दोषियों को सजा मिलने तक सीमित नहीं है।
उनके मुताबिक, यह पहाड़ की बेटियों की अस्मिता, सुरक्षा और सम्मान से भी जुड़ा सवाल है।
सेमवाल ने बताया कि मामले की सुनवाई के दौरान 37 गवाह पेश हुए थे
और अदालत ने उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर तीनों दोषियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई।
उन्होंने दावा किया कि करीब 180 पन्नों के फैसले में कथित VIP का उल्लेख कई बार हुआ है।
हालांकि, फैसले में किसी व्यक्ति का उल्लेख होना अपने आप में उसकी आपराधिक भूमिका साबित नहीं करता।
सेमवाल ने दावा किया कि 16 सितंबर को कथित VIP के रिसॉर्ट में आने और अंकिता के साथ विवाद होने से संबंधित बातें दो गवाहों ने कही थीं।
उन्होंने रिसॉर्ट के एक कमरे को तोड़े जाने और साक्ष्य जुटाने की प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए।
कमेटी के अनुसार, कथित VIP एंगल की जांच को लेकर हाईकोर्ट में कानूनी लड़ाई जारी है।
उन्होंने बताया कि कमेटी ने CBI जांच की मांग को लेकर आंदोलन किया था।
अब ऑनलाइन और ऑफलाइन माध्यमों से जनसमर्थन जुटाने की कोशिश की जा रही है, ताकि मामले की निष्पक्ष जांच और परिवार को न्याय दिलाने की मांग आगे बढ़ाई जा सके।

दुष्यंत गौतम की राज्यपाल नियुक्ति वापस लेने की मांग
कमेटी से जुड़े सामाजिक कार्यकर्ता अनिल तिवारी ने दुष्यंत कुमार गौतम को सिक्किम का राज्यपाल बनाए जाने पर सवाल उठाए।
उन्होंने कहा कि अंकिता हत्याकांड में कथित VIP एंगल को लेकर विवाद के बीच इस नियुक्ति से लोगों के मन में सवाल उठ रहे हैं।
तिवारी ने दावा किया कि सोशल मीडिया पर भी नियुक्ति के विरोध में पोस्ट साझा की जा रही हैं।
उन्होंने नियुक्ति वापस लेने की मांग करते हुए कहा कि जनता को इस मुद्दे पर अपनी आवाज उठानी चाहिए।
हालांकि, सिक्किम में विरोध-प्रदर्शन होने के उनके दावे की स्वतंत्र पुष्टि जरूरी है।
उन्होंने कहा कि अंकिता हत्याकांड में कथित VIP की पहचान, उसकी गतिविधियों और उससे संबंधित जानकारियों को लेकर स्थिति स्पष्ट होनी चाहिए।
तिवारी ने पटवारी पुलिस से नियमित पुलिस को मामला सौंपने में हुई देरी और साक्ष्य जुटाने की प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए।
उनके अनुसार, CBI जांच में इन पहलुओं की निष्पक्ष पड़ताल होनी चाहिए।
CBI जांच पर टिकी नजरें, परिवार के संघर्ष का दिया हवाला
डॉ. रेशमा पंवार ने कहा कि अंकिता के माता-पिता आज भी अपनी बेटी को न्याय दिलाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं।
उन्होंने दिल्ली के इंडिया गेट पर प्रदर्शन के दौरान परिवार को हिरासत में लिए जाने का जिक्र करते हुए इसे सरकार का दमनकारी रवैया बताया।
वहीं, मुकेश सेमवाल ने स्पष्ट किया कि कमेटी का उद्देश्य किसी राजनीतिक दल को सत्ता से हटाना नहीं,
बल्कि अंकिता को न्याय दिलाना और पहाड़ की बेटियों के सम्मान की रक्षा करना है।
अनिल तिवारी ने भी मामले के सभी अनसुलझे पहलुओं की जांच और जवाबदेही तय करने की मांग की।
कमेटी से जुड़े कार्यकर्ताओं का कहना है कि दोषियों को सजा मिलने के बावजूद कथित VIP एंगल पर उठ रहे सवालों के जवाब सामने आना जरूरी है।
अब इस मामले में CBI जांच की प्रगति और जांच एजेंसी की ओर से सामने आने वाले तथ्यों पर नजर रहेगी।
महत्वपूर्ण तथ्यात्मक सावधानी: यह रिपोर्ट कार्यकर्ताओं के बयानों और दावों पर आधारित है।
सरकारी नौकरी, आर्थिक सहायता, गवाहों के बयानों, अदालत के फैसले में कथित VIP के उल्लेख, हाईकोर्ट में
चल रही कार्यवाही और सिक्किम में विरोध से संबंधित विवरणों की स्वतंत्र पुष्टि के बाद ही उन्हें स्थापित तथ्य के रूप में प्रकाशित किया जाना चाहिए।















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