आध्यात्मिक एकता का बना प्रतीक
सनातन संस्कृति की अखंडता और भारत की आध्यात्मिक एकता का अद्भुत उदाहरण उस समय देखने को मिला,
जब तमिलनाडु से भगवान मुरुगन (कार्तिकेय स्वामी) की दुर्लभ पंचधातु प्रतिमा उत्तराखंड के प्राचीन कार्तिक स्वामी मंदिर में
भेंट की गई। यह ऐतिहासिक पहल तमिलनाडु के प्रसिद्ध मुरुगन भक्त एवं शोधकर्ता जेएसके गोपी द्वारा की गई।
हिमालय और दक्षिण भारत के आध्यात्मिक संबंधों को मिली नई ऊर्जा
भगवान कार्तिकेय की दिव्य उपासना पर वर्षों से शोध कर रहे जेएसके गोपी ने बताया कि उत्तराखंड स्थित कार्तिक स्वामी धाम
केवल एक मंदिर नहीं, बल्कि भगवान मुरुगन की प्राचीन आध्यात्मिक परंपरा से जुड़ा एक दिव्य केंद्र है। मान्यता है कि भगवान
कार्तिकेय का हिमालय स्थित कार्तिक स्वामी धाम और तमिलनाडु के प्रसिद्ध पलानी मुरुगन मंदिर से गहरा आध्यात्मिक संबंध रहा है।
आध्यात्मिक प्रेरणा से मंदिर को समर्पित की गई प्रतिमा
आध्यात्मिक अनुभूति और साधना के दौरान प्राप्त प्रेरणा के बाद जेएसके गोपी ने भगवान मुरुगन की दुर्लभ पंचधातु प्रतिमा
कार्तिक स्वामी मंदिर को समर्पित की। यह प्रतिमा धार्मिक आस्था के साथ-साथ उत्तराखंड और तमिलनाडु के सांस्कृतिक
मिलन का भी जीवंत प्रतीक बन गई है।
आशीर्वाद मुद्रा में विराजमान भगवान मुरुगन
विशेष आकर्षण का केंद्र बनी यह प्रतिमा भगवान मुरुगन की आशीर्वाद मुद्रा में है। यह स्वरूप करुणा, शांति, कृपा और मानव
कल्याण का प्रतीक माना जाता है, जिसने श्रद्धालुओं को गहरे आध्यात्मिक भाव से जोड़ दिया है।
सांस्कृतिक समन्वय को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल
यह आयोजन उत्तराखंड सरकार के उस व्यापक दृष्टिकोण को भी मजबूती देता है, जिसके तहत राज्य की आध्यात्मिक विरासत
के संरक्षण और विभिन्न राज्यों के बीच सांस्कृतिक समन्वय को बढ़ावा देने के प्रयास किए जा रहे हैं।
श्रद्धालुओं ने माना दिव्य संयोग
मान्यता है कि भगवान मुरुगन ने हिमालय स्थित कार्तिक स्वामी धाम से तमिलनाडु तक आध्यात्मिक यात्रा की थी। ऐसे में वर्षों
बाद भगवान मुरुगन की प्रतिमा का तमिलनाडु से पुनः उत्तराखंड पहुंचना श्रद्धालुओं के लिए किसी दिव्य संयोग से कम नहीं माना जा रहा।
मंदिर विकास और सांस्कृतिक संबंधों पर हुई चर्चा
इस अवसर पर जेएसके गोपी की मुलाकात उत्तराखंड के वरिष्ठ आईएएस अधिकारी रविशंकर से भी हुई, जो कार्तिक स्वामी
मंदिर के विकास और उत्तराखंड-तमिलनाडु सांस्कृतिक संबंधों को मजबूत करने की दिशा में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं।
मंदिर समिति ने किया पहल का स्वागत
कार्तिकेय मंदिर समिति के अध्यक्ष विक्रम नेगी ने इस पहल का स्वागत करते हुए कहा कि यह केवल धार्मिक आयोजन नहीं,
बल्कि राष्ट्रीय सांस्कृतिक एकता और आध्यात्मिक समरसता का प्रेरणादायक उदाहरण है।

लेखिका बीते ढाई दशक से पत्रकारिता क्षेत्र में सक्रिय हैं.वर्ष 2015 से रीजनल रिपोर्टर के संपादक के पद पर कार्यरत हैं.















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