नई रिसर्च ने बढ़ाई चिंता, क्लाइमेट चेंज बना वैश्विक संकट
दुनियाभर में जलवायु परिवर्तन यानी क्लाइमेट चेंज का असर लगातार बढ़ता जा रहा है।
बाढ़, बेमौसम बारिश, हीटवेव और रिकॉर्ड तोड़ गर्मी जैसी घटनाएं आम हो चुकी हैं।
अब एक नई रिसर्च ने दावा किया है कि बढ़ता तापमान इंसानों की लंबाई यानी हाइट पर भी असर डाल सकता है।
अमेरिका की University of California की एक नई स्टडी में कहा गया है कि ग्लोबल वार्मिंग के कारण आने वाले समय में इंसानों की औसत लंबाई कम हो सकती है।
प्रेग्नेंसी के दौरान गर्मी का असर
रिसर्चर्स के अनुसार गर्भावस्था के दौरान अत्यधिक तापमान और नमी (Humidity) बच्चे की प्राकृतिक ग्रोथ को प्रभावित कर सकती है।
स्टडी में पाया गया कि 35 डिग्री सेल्सियस से अधिक तापमान में रहने वाली गर्भवती महिलाओं के बच्चों की लंबाई सामान्य से कम पाई गई।
लीड रिसर्चर Katie McMahon के मुताबिक, अत्यधिक गर्मी और नमी के संपर्क में आने वाली माताओं के बच्चों की लंबाई उम्मीद से 13 प्रतिशत तक कम देखी गई।
दक्षिण एशिया को बताया गया हाई-रिस्क क्षेत्र
स्टडी में दक्षिण एशिया के देशों को जलवायु परिवर्तन के लिहाज से “हाई-रिस्क” माना गया है।
इसमें India, Bangladesh, Nepal, Pakistan, Sri Lanka और Afghanistan जैसे देश शामिल हैं।
इसी कारण यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया ने अपनी रिसर्च में 5 साल से कम उम्र के करीब 2 लाख बच्चों का अध्ययन किया।
नीदरलैंड में दिखने लगा असर
दुनिया के सबसे लंबे लोगों वाले देश Netherlands में भी अब हाइट में गिरावट के संकेत मिलने लगे हैं।
रिसर्च के मुताबिक वहां के लोगों की औसत लंबाई पहले की तुलना में कम दर्ज की गई है।
विशेषज्ञों का मानना है कि बढ़ती गर्मी और नमी बच्चों की ग्रोथ पर असर डाल रही है।
बचपन की लंबाई केवल कद नहीं बताती
वैज्ञानिकों के अनुसार किसी बच्चे की लंबाई केवल उसकी बाहरी बनावट नहीं दर्शाती, बल्कि यह उसके दिमाग, आंतरिक अंगों और संपूर्ण स्वास्थ्य का संकेत भी होती है।
स्टडी में कहा गया है कि मौसम का अत्यधिक उतार-चढ़ाव गर्भ में पल रहे बच्चे के अंगों के विकास और वजन पर भी असर डाल सकता है।
120 देशों पर पड़ सकता है असर
World Bank के अनुमान के अनुसार मध्यम और निम्न आय वाले 120 देशों में
क्लाइमेट चेंज का यह प्रभाव देखने को मिल सकता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि गरीब देशों में पोषण की कमी,
स्वास्थ्य सुविधाओं का अभाव और गर्मी से बचाव के सीमित साधन इस खतरे को और बढ़ा सकते हैं।
पहले भी बदलती रही है इंसानों की हाइट
रिसर्च में यह भी बताया गया कि इंसानों की लंबाई इतिहास में कई बार घटती-बढ़ती रही है।
लगभग 10 हजार साल पहले खेती की शुरुआत के बाद लोगों की औसत हाइट में गिरावट देखी गई थी।
वैज्ञानिकों के अनुसार शिकार करने वाले आदिमानव अधिक लंबे और मजबूत होते थे।
बाद में सीमित खानपान, कुपोषण और बीमारियों के कारण लोगों की औसत लंबाई कम होती गई।
भारत में कितनी है औसत लंबाई?
भारत सरकार के आंकड़ों के अनुसार वर्तमान में भारतीय पुरुषों की औसत लंबाई लगभग
165 सेंटीमीटर और महिलाओं की औसत लंबाई करीब 152 सेंटीमीटर है।
वहीं पुरातात्विक अध्ययनों के अनुसार आदिमानव काल में इंसानों की औसत लंबाई लगभग 179 सेंटीमीटर तक होती थी।
केवल आनुवंशिक कारण नहीं हैं जिम्मेदार
विशेषज्ञों का कहना है कि इंसान की लंबाई केवल आनुवंशिक गुणों पर निर्भर नहीं करती।
खानपान, स्वास्थ्य सेवाएं, वातावरण, गरीबी, प्रदूषण और जलवायु भी इसके महत्वपूर्ण कारक हैं।
यही वजह है कि अलग-अलग देशों और क्षेत्रों में लोगों की औसत हाइट में बड़ा अंतर देखने को मिलता है।
क्लाइमेट चेंज केवल इंसानों की लंबाई ही नहीं बल्कि स्वास्थ्य, अर्थव्यवस्था और जीवनशैली पर भी गहरा असर डाल रहा है।
बढ़ रही हैं बीमारियां
विशेषज्ञों के अनुसार हर साल जलवायु परिवर्तन से जुड़ी बीमारियों के कारण दुनियाभर में लाखों लोगों की मौत हो रही है।
जंगलों में बढ़ीं आग की घटनाएं
बढ़ती गर्मी के कारण जंगलों में आग लगने की घटनाएं तेजी से बढ़ रही हैं।
इससे पर्यावरण और मानव जीवन दोनों को खतरा बढ़ रहा है।
मानसिक तनाव भी बढ़ा
हीटवेव, प्रदूषण और खराब मौसम लोगों में तनाव और नींद की समस्याएं भी बढ़ा रहे हैं।
2050 तक बढ़ सकते हैं गंभीर खतरे
कई अंतरराष्ट्रीय स्टडी में चेतावनी दी गई है कि अगर ग्लोबल तापमान 1.5 डिग्री सेल्सियस से अधिक बढ़ता है
तो आने वाले दशकों में स्थिति और गंभीर हो सकती है।
रिपोर्ट्स के मुताबिक साल 2050 तक करोड़ों बच्चे उम्र के हिसाब से छोटे कद के रह सकते हैं
और हीट स्ट्रेस के मामलों में भारी बढ़ोतरी हो सकती है।
एक्सपर्ट्स ने दी चेतावनी
विशेषज्ञों का कहना है कि अगर समय रहते जलवायु परिवर्तन को नियंत्रित करने के लिए बड़े कदम नहीं उठाए गए
तो आने वाली पीढ़ियों के स्वास्थ्य, जीवनशैली और शारीरिक विकास पर गंभीर प्रभाव पड़ सकते हैं।
















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