सुप्रीम कोर्ट पहुंचा मामला, NEET पेपर लीक विवाद पर बढ़ा राजनीतिक और छात्र संगठनों का विरोध
NEET UG 2026 पेपर लीक विवाद के बाद देशभर में विरोध प्रदर्शन तेज हो गए हैं।
Indian Youth Congress (IYC) और National Students’ Union of India (NSUI) ने केंद्र सरकार
और National Testing Agency (NTA) के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है।
छात्र संगठनों ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री Dharmendra Pradhan और NTA चेयरमैन के इस्तीफे की मांग की है।
दूसरी ओर United Doctors Front (UDF) ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर
NTA के मौजूदा स्वरूप को समाप्त करने की मांग उठाई है।
दिल्ली में NTA मुख्यालय के बाहर प्रदर्शन
रिपोर्ट्स के अनुसार, NSUI कार्यकर्ताओं ने दिल्ली के ओखला स्थित NTA मुख्यालय का घेराव कर जोरदार प्रदर्शन किया।
प्रदर्शन के दौरान सैकड़ों कार्यकर्ताओं ने बैरिकेड्स तोड़कर अंदर जाने की कोशिश की।
स्थिति को नियंत्रित करने के लिए भारी पुलिस बल तैनात किया गया। पुलिस ने कई प्रदर्शनकारियों को हिरासत में भी लिया।
शिक्षा मंत्री के आवास की ओर बढ़े IYC कार्यकर्ता
वहीं IYC कार्यकर्ताओं ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के आवास की ओर मार्च निकाला।
प्रदर्शनकारियों के हाथों में संगठन के झंडे, बैनर और “22 लाख छात्रों के सपनों का सौदा बंद करो” जैसे पोस्टर दिखाई दिए।
तीन मूर्ति मार्ग पर पुलिस और कार्यकर्ताओं के बीच धक्का-मुक्की भी हुई।
प्रदर्शनकारियों ने शिक्षा मंत्री का पुतला जलाने की कोशिश की, लेकिन पुलिस ने तुरंत आग बुझाकर स्थिति संभाल ली।
रिपोर्ट्स के मुताबिक IYC अध्यक्ष Uday Bhanu Chib समेत कई कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया गया है।
कई शहरों में जारी है विरोध प्रदर्शन
दिल्ली के अलावा Mumbai, Lucknow, Jaipur और Ranchi समेत कई शहरों में भी यूथ कांग्रेस और NSUI कार्यकर्ता प्रदर्शन कर रहे हैं।
छात्र संगठनों का आरोप है कि पेपर लीक मामले ने लाखों छात्रों के भविष्य को संकट में डाल दिया है।
सुप्रीम कोर्ट में दायर हुई याचिका
इस बीच यूनाइटेड डॉक्टर्स फ्रंट ने Supreme Court of India में याचिका दायर कर NTA को भंग करने की मांग की है।
याचिका में कहा गया है कि मेडिकल प्रवेश परीक्षाओं के संचालन में NTA लगातार विफल साबित हुआ है।
संगठन ने संसद के विशेष कानून के जरिए एक स्वतंत्र और वैधानिक नेशनल टेस्टिंग बॉडी बनाने की मांग की है।
NTA के मौजूदा ढांचे पर सवाल
याचिका में यह भी कहा गया है कि NTA फिलहाल ‘सोसायटी पंजीकरण अधिनियम 1860’ के तहत एक सोसायटी के रूप में पंजीकृत है।
ऐसे में संस्था के पास पर्याप्त कानूनी शक्तियां और संसद के प्रति जवाबदेही नहीं है।
याचिकाकर्ताओं का तर्क है कि नई संस्था को University Grants Commission (UGC) की तरह संसद के कानून के तहत स्थापित किया जाना चाहिए।
संविधान के अधिकारों के उल्लंघन का आरोप
याचिका में दावा किया गया है कि परीक्षा प्रक्रिया में बार-बार हो रही गड़बड़ियां संविधान के अनुच्छेद 14 और 21 का उल्लंघन हैं, जो समानता और जीवन व आजीविका के अधिकार से जुड़े हैं।
छात्र संगठनों ने पूरे मामले की सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है।
NEET विवाद पर बढ़ा दबाव
पेपर लीक विवाद के बाद केंद्र सरकार और NTA पर लगातार दबाव बढ़ता जा रहा है।
लाखों छात्र और अभिभावक परीक्षा प्रणाली की पारदर्शिता को लेकर सवाल उठा रहे हैं।
आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर राजनीतिक और कानूनी हलचल और तेज होने की संभावना है।
















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