मुख्यमंत्री के हाथों सम्मान मिलने के बाद आशा फैसिलिटेटर दुर्गा देवी ने खुशी जाहिर की।
उन्होंने कहा कि यह सम्मान उनके लिए सिर्फ उपलब्धि नहीं, बल्कि आगे भी सामाजिक क्षेत्र में बेहतर काम करने की प्रेरणा है।
दुर्गा देवी लंबे समय से स्वास्थ्य, स्वच्छता और महिला जागरूकता के क्षेत्र में काम कर रही हैं।
2005 से स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़ी हैं दुर्गा देवी
दुर्गा देवी ने बताया कि उन्होंने वर्ष 2005 से 2017 तक आशा कार्यकर्ता के रूप में काम किया।
इसके बाद वर्ष 2017 से वह आशा फैसिलिटेटर के पद पर सेवाएं दे रही हैं।
इस दौरान उन्होंने ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं को स्वास्थ्य और स्वच्छता के प्रति जागरूक
करने के साथ ही परिवारों तक जरूरी स्वास्थ्य संबंधी जानकारी पहुंचाने का काम किया।
वह महिला समूहों के साथ मिलकर भी लगातार काम करती रही हैं।
महिलाओं और परिवारों को किया जागरूक
दुर्गा देवी के मुताबिक, सामाजिक कार्यों के दौरान उनका मुख्य उद्देश्य महिलाओं और परिवारों को स्वास्थ्य से जुड़े मुद्दों के प्रति जागरूक करना रहा।
उनके प्रयासों से कई परिवारों में स्वास्थ्य और स्वच्छता को लेकर जागरूकता बढ़ी और लोगों ने इन मुद्दों को गंभीरता से लेना शुरू किया।
उन्होंने कहा कि जब कोई व्यक्ति उनसे यह कहता है कि “आपने हमें बचाया है”, तो यही शब्द उनके लिए सबसे बड़ी प्रेरणा बन जाते हैं।
रात में भी घर-घर पहुंचती थीं
दुर्गा देवी ने अपने संघर्ष के दिनों को याद करते हुए बताया कि आशा कार्यकर्ता के तौर पर शुरुआत में उन्हें रात के समय भी घर-घर जाना पड़ता था।
उस समय सड़क और यातायात की सुविधाएं भी सीमित थीं।
ऐसे मुश्किल हालात में उनके पति ने हमेशा उनका सहयोग किया। उन्होंने परिवार के समर्थन को अपने लंबे सफर में महत्वपूर्ण बताया।
सम्मान के साथ मानदेय को लेकर भी चिंता
मुख्यमंत्री के हाथों सम्मान मिलने की खुशी के बीच दुर्गा देवी ने आशा कार्यकर्ताओं और आशा फैसिलिटेटरों के मानदेय का मुद्दा भी उठाया।
उन्होंने कहा कि लंबे समय तक सेवाएं देने के बावजूद उन्हें मिलने वाला मानदेय काफी कम है।
दुर्गा देवी ने कहा कि आज एक दिहाड़ी मजदूर को भी करीब 800 रुपये प्रतिदिन मिल जाते हैं,
जबकि आशा कार्यकर्ताओं को बेहद कम मानदेय में लगातार स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़ी जिम्मेदारियां निभानी पड़ती हैं।
उन्होंने उम्मीद जताई कि सरकार आशा कार्यकर्ताओं और फैसिलिटेटरों के मानदेय पर भी गंभीरता से विचार करेगी,
ताकि लंबे समय से स्वास्थ्य सेवाओं में योगदान दे रहीं महिलाओं को उनकी मेहनत के अनुरूप सम्मान और आर्थिक सुरक्षा मिल सके।















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