जानें वर्तिका जोशी के मिशन से कितना अलग था अभियान
भारतीय सशस्त्र बलों के इतिहास में एक और स्वर्णिम अध्याय जुड़ गया है।
स्क्वाड्रन लीडर वैशाली भंडारी के नेतृत्व में त्रि-सेवा महिला दल ने ऐतिहासिक वैश्विक समुद्री परिक्रमा अभियान सफलतापूर्वक पूरा किया है।
इस अभियान में भारतीय सेना, नौसेना और वायुसेना की महिला अधिकारियों ने संयुक्त रूप से हिस्सा लिया।
स्क्वाड्रन लीडर वैशाली भंडारी और उनकी 9 सदस्यीय टीम ने स्वदेशी नौका IASV त्रिवेणी पर सवार होकर करीब 314 दिनों में 25,500 नॉटिकल मील की दूरी तय की।
यह सफर लगभग 47 हजार किलोमीटर के बराबर है। अभियान के दौरान टीम ने चार महासागरों,
दुनिया के तीन सबसे दुर्गम और चुनौतीपूर्ण केप्स के साथ ही बेहद खतरनाक ड्रेक पैसेज को भी पार किया।
चार महासागरों और ड्रेक पैसेज को किया पार
वैशाली भंडारी के नेतृत्व में पूरा हुआ यह अभियान कई मायनों में बेहद चुनौतीपूर्ण रहा।
टीम को समुद्र के ऐसे हिस्सों से गुजरना पड़ा जहां तेज हवाएं, ऊंची लहरें, बेहद ठंडा मौसम और खराब समुद्री परिस्थितियां लगातार चुनौती बनी रहीं।
खास तौर पर ड्रेक पैसेज को दुनिया के सबसे खतरनाक समुद्री मार्गों में माना जाता है।
यहां समुद्री लहरें कई मंजिला इमारत जितनी ऊंची उठ सकती हैं और बर्फीले तूफान भी सामान्य स्थिति का हिस्सा हैं।
ऐसी परिस्थितियों के बीच एक छोटी नौका पर लगातार कई महीनों तक रहना टीम के लिए शारीरिक ही नहीं, बल्कि मानसिक रूप से भी बड़ी चुनौती था।
इसके बावजूद टीम ने हिम्मत और बेहतर तालमेल के साथ अभियान को सफलतापूर्वक पूरा किया।
वैशाली भंडारी का मिशन क्यों है खास?
इस पूरे अभियान की सबसे बड़ी खासियत इसका त्रि-सेवा स्वरूप रहा।
भारतीय सेना, नौसेना और वायुसेना की महिला अधिकारियों ने पहली बार इस तरह के वैश्विक समुद्री अभियान में एक साथ हिस्सा लिया।
यही वजह है कि वैशाली भंडारी के नेतृत्व वाला यह अभियान भारतीय सशस्त्र बलों में महिलाओं की बढ़ती भूमिका और तीनों सेनाओं के बीच संयुक्त तालमेल की महत्वपूर्ण मिसाल माना जा रहा है।

इससे पहले वर्तिका जोशी ने चलाया था नाविका सागर परिक्रमा अभियान
वैशाली भंडारी के अभियान से पहले भारतीय नौसेना की महिला अधिकारियों ने भी समुद्री परिक्रमा के क्षेत्र में इतिहास रचा था।
लेफ्टिनेंट कमांडर वर्तिका जोशी के नेतृत्व में महिला अधिकारियों की टीम ने ‘नाविका सागर परिक्रमा’ अभियान पूरा किया था।
इस अभियान के लिए टीम ने INSV तारिणी पोत का इस्तेमाल किया था।
वर्तिका जोशी की टीम ने करीब 254 दिनों में लगभग 22,000 समुद्री मील की दूरी तय की थी।
अभियान के दौरान टीम ने पांच प्रमुख विदेशी बंदरगाहों पर भी पड़ाव किया था। इनमें फ्रेमेंटल, लिटलेटन, पोर्ट स्टेनली, केप टाउन और पोर्ट लुईस शामिल थे।
वर्तिका जोशी और वैशाली भंडारी के मिशन में अंतर
दोनों अभियान भारतीय महिला अधिकारियों के लिए बड़ी उपलब्धि रहे, लेकिन इनके स्वरूप और चुनौतियों में महत्वपूर्ण अंतर था।
वर्तिका जोशी के नेतृत्व वाला नाविका सागर परिक्रमा अभियान मुख्य रूप से भारतीय नौसेना की महिला अधिकारियों तक सीमित था।
वहीं वैशाली भंडारी के नेतृत्व वाला अभियान तीनों सेनाओं की महिला अधिकारियों का संयुक्त मिशन रहा।
दूरी और अवधि के लिहाज से भी वैशाली भंडारी का अभियान बड़ा रहा। वर्तिका जोशी की टीम ने करीब 254 दिनों में 22,000 समुद्री मील की दूरी तय की थी,
जबकि वैशाली भंडारी की 10 सदस्यीय टीम ने करीब 314 दिनों में 25,500 नॉटिकल मील का सफर पूरा किया।
| बिंदु | वर्तिका जोशी का अभियान | वैशाली भंडारी का अभियान |
|---|---|---|
| अभियान | नाविका सागर परिक्रमा | वैश्विक समुद्री परिक्रमा |
| नौका | INSV तारिणी | IASV त्रिवेणी |
| अवधि | करीब 254 दिन | करीब 314 दिन |
| दूरी | करीब 22,000 समुद्री मील | करीब 25,500 नॉटिकल मील |
| दल | भारतीय नौसेना की महिला अधिकारी | सेना, नौसेना और वायुसेना की महिला अधिकारी |
| प्रमुख चुनौती | लंबी वैश्विक समुद्री यात्रा | ड्रेक पैसेज समेत कई कठिन समुद्री क्षेत्र |
नारी शक्ति और सैन्य तालमेल की मिसाल
वैशाली भंडारी के नेतृत्व में पूरा हुआ यह अभियान सिर्फ एक समुद्री यात्रा नहीं है, बल्कि भारतीय महिला सैन्य अधिकारियों के साहस, प्रशिक्षण और क्षमता का भी बड़ा उदाहरण है।
करीब 10 महीने तक समुद्र में रहकर कठिन परिस्थितियों का सामना करना और 25,500 नॉटिकल मील की यात्रा पूरी करना टीम की दृढ़ता को दिखाता है।
वहीं वर्तिका जोशी के ‘नाविका सागर परिक्रमा’ अभियान से शुरू हुई यह यात्रा अब त्रि-सेवा महिला दल के ऐतिहासिक अभियान तक पहुंच चुकी है।
दोनों अभियानों ने अलग-अलग स्तर पर भारतीय महिलाओं की क्षमता और नारी शक्ति को दुनिया के सामने रखा है।
वैशाली भंडारी का यह मिशन भारतीय सशस्त्र बलों में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी और तीनों सेनाओं के बेहतर समन्वय का एक और महत्वपूर्ण उदाहरण बन गया है।
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