चौरास स्टेडियम प्रकरण में 9.90 करोड़ रुपये की रॉयल्टी और अर्थदंड माफ करने का प्रस्ताव कैबिनेट में लाने का आश्वासन
हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल केंद्रीय विश्वविद्यालय को चौरास स्टेडियम प्रकरण में बड़ी राहत मिलने की उम्मीद जगी है।
विश्वविद्यालय के एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से मुलाकात कर
जिला प्रशासन टिहरी द्वारा लगाए गए 9.90 करोड़ रुपये की रॉयल्टी एवं अर्थदंड को पूरी तरह माफ करने का अनुरोध किया।
मुख्यमंत्री ने इस मामले में सकारात्मक रुख अपनाते हुए आगामी कैबिनेट बैठक में प्रस्ताव लाने का आश्वासन दिया।
कुलपति के नेतृत्व में मुख्यमंत्री से मिला प्रतिनिधिमंडल
कुलपति प्रो. श्रीप्रकाश सिंह के नेतृत्व में मुख्यमंत्री से मिले प्रतिनिधिमंडल में डीन, स्कूल ऑफ अर्थ साइंस प्रो. महावीर सिंह नेगी, डीन (नियुक्ति एवं पदोन्नति) प्रो. एम.एस. पवार तथा जनसंपर्क अधिकारी आशुतोष बहुगुणा शामिल रहे।
प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री को बताया कि शुरुआत में इस प्रकरण में 1.90 करोड़ रुपये की रॉयल्टी निर्धारित की गई थी,
जिसे बाद में पांच गुना बढ़ाकर 9.90 करोड़ रुपये कर दिया गया।

जनहित में हुआ था मलबे का उपयोग
विश्वविद्यालय प्रशासन ने स्पष्ट किया कि जिस स्थान पर ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल परियोजना की सुरंगों से निकले मलबे का भराव किया गया, वह पूरी तरह जनहित का कार्य था।
वर्तमान में उसी समतल क्षेत्र के ऊपर से कई गांवों को जोड़ने वाली सड़क का निर्माण किया जा रहा है।
इस कार्य से विश्वविद्यालय को किसी प्रकार का व्यावसायिक लाभ नहीं हुआ।
प्रतिनिधिमंडल ने बताया कि वर्ष 2013 की केदारनाथ आपदा के दौरान अलकनंदा नदी के कटाव से
श्रीनगर-चौरास मार्ग और विश्वविद्यालय का खेल मैदान क्षतिग्रस्त हो गया था।
इसके बाद क्षेत्र की सुरक्षा, तटबंधों की मजबूती और आवागमन बहाल करने के उद्देश्य से
रेल विकास निगम लिमिटेड (RVNL) की सुरंगों से निकले मलबे का उपयोग पुनर्भरण कार्य में किया गया था।
पहले भी दिया था राहत का भरोसा
विश्वविद्यालय प्रशासन ने मुख्यमंत्री को याद दिलाया कि इससे पहले एक छात्र कार्यक्रम में भी उन्होंने
इस मामले को सकारात्मक रूप से लेते हुए कैबिनेट में प्रस्ताव लाकर राहत दिलाने का आश्वासन दिया था।
प्रतिनिधिमंडल ने अनुरोध किया कि आगामी कैबिनेट बैठक में 9.90 करोड़ रुपये की रॉयल्टी एवं अर्थदंड को पूर्णतः माफ किया जाए।
जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों से भी हो चुकी है चर्चा
विश्वविद्यालय प्रशासन ने बताया कि इस मामले में कैबिनेट मंत्री सुबोध उनियाल, देवप्रयाग विधायक विनोद कंडारी सहित कई जनप्रतिनिधि लगातार सहयोग कर रहे हैं।
जुलाई 2023 में जिलाधिकारी टिहरी ने भी शासन को रॉयल्टी माफी का प्रस्ताव भेजा था।
हाल ही में विश्वविद्यालय का प्रतिनिधिमंडल मुख्य सचिव आनंद वर्धन, सचिव (खनन) बृजेश कुमार संत
तथा निदेशक (खनन) राजपाल लेघा से भी मिलकर मामले की वस्तुस्थिति से अवगत करा चुका है।
विश्वविद्यालय को कैबिनेट के फैसले का इंतजार
विश्वविद्यालय प्रशासन ने उम्मीद जताई कि राज्य सरकार जनहित, छात्रहित और विश्वविद्यालय हित को
ध्यान में रखते हुए इस गैर-लाभकारी केंद्रीय शिक्षण संस्थान को राहत देगी
तथा आगामी कैबिनेट बैठक में 9.90 करोड़ रुपये की रॉयल्टी एवं अर्थदंड माफ करने का निर्णय लिया जाएगा।















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