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सरोकारों से साक्षात्कार

गढ़वाल विश्वविद्यालय में छात्रों का धरना जारी

रीडिंग रूम की टाइमिंग बढ़ाने की मांग तेज

सुबह 6 से रात 12 बजे तक लाइब्रेरी खोलने की मांग को लेकर आंदोलन

हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल विश्वविद्यालय में छात्रों का धरना लगातार दूसरे दिन भी जारी रहा।

छात्र सुबह 6 बजे से रात 12 बजे तक लाइब्रेरी के रीडिंग रूम की टाइमिंग बढ़ाने की मांग को लेकर

लाइब्रेरी परिसर में प्रदर्शन कर रहे हैं।

छात्रों का आरोप है कि उन्होंने इस मांग को लेकर तीन महीने पहले ही कुलपति, कुलसचिव,

अधिष्ठाता छात्र कल्याण और पुस्तकालयाध्यक्ष को ज्ञापन सौंपा था, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है।

“कुलपति और कुलसचिव नहीं हैं उपलब्ध” – छात्रों का आरोप

धरने पर बैठे छात्रों का कहना है कि जब भी वे अपनी समस्याओं को लेकर अधिकारियों से मिलने की कोशिश करते हैं,

तो उन्हें यही जवाब मिलता है कि कुलपति और कुलसचिव विश्वविद्यालय में मौजूद नहीं हैं।

छात्रों ने यह भी आरोप लगाया कि विश्वविद्यालय के कुलपति अक्सर परिसर से बाहर रहते हैं,

जिससे छात्रों की समस्याओं का समाधान नहीं हो पा रहा है।

मंत्री के सामने भी उठ चुकी है मांग

छात्रों के अनुसार, छात्रसंघ समारोह के दौरान उन्होंने उच्च शिक्षा मंत्री धन सिंह रावत के सामने भी यह मुद्दा उठाया था।

उस समय मंत्री ने इस मांग को जायज बताते हुए कहा था कि श्रीकोट मेडिकल कॉलेज की लाइब्रेरी 24 घंटे खुलती है।

इसके बावजूद विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा अब तक कोई निर्णय नहीं लिया गया है।

“रैलियों के लिए छात्र, पढ़ाई के लिए नहीं?”

छात्रों ने विश्वविद्यालय प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि जब भी किसी राजनीतिक कार्यक्रम या मुख्यमंत्री

के दौरे के लिए भीड़ जुटाने की जरूरत होती है, तब प्रशासन सक्रिय हो जाता है और नोटिस जारी किए जाते हैं।

लेकिन छात्रों की पढ़ाई और सुविधाओं से जुड़ी मांगों को नजरअंदाज किया जा रहा है।

शैक्षणिक व्यवस्था पर भी उठाए सवाल

छात्रों ने विश्वविद्यालय की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि:

  • कक्षाएं नियमित रूप से संचालित नहीं हो रहीं
  • परीक्षा परिणाम समय पर घोषित नहीं होते
  • लाइब्रेरी की सुविधाएं सीमित हैं

उन्होंने यह भी कहा कि विश्वविद्यालय में कई महत्वपूर्ण पद जैसे कुलसचिव और परीक्षा नियंत्रक लंबे समय से रिक्त हैं,

जिससे प्रशासनिक कार्य प्रभावित हो रहे हैं।

भर्ती प्रक्रिया और प्रशासनिक लापरवाही पर सवाल

छात्रों ने 2023 की असिस्टेंट प्रोफेसर भर्ती प्रक्रिया का उदाहरण देते हुए कहा कि 2025 में आरटीआई के तहत

मांगी गई जानकारी का जवाब 2026 में दिया जा रहा है, जिसमें कहा गया कि रोस्टर प्रक्रिया अभी भी जारी है।

छात्रों के अनुसार, यह विश्वविद्यालय की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करता है।

आंदोलन जारी रखने का ऐलान

छात्रों ने साफ कहा है कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होतीं, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा।

उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय केवल अधिकारियों का नहीं, बल्कि छात्रों का भी है, और इसकी छवि को बचाने की जिम्मेदारी सभी की है।

https://regionalreporter.in/dates-for-the-opening-of-the-gates-of-the-panch-kedars-announced/
https://youtu.be/qUTHnPnwFL4?si=y_bk-VKEL5y5JKjN

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