श्रीनगर गढ़वाल। गढ़वाल विश्वविद्यालय में छात्रसंघ चुनाव को लेकर कैंपस का माहौल लगातार गरमा रहा है।
प्रत्याशी और छात्र संगठन प्रचार में पूरी ताकत झोंक रहे हैं।
चुनावी माहौल के बीच छात्रों से यह जानने की कोशिश की गई कि उनके लिए इस बार छात्रसंघ चुनाव में सबसे बड़े मुद्दे क्या हैं।
छात्रों से पढ़ाई, रिजल्ट, सफाई, छात्र सुविधाओं और चुनाव प्रचार को लेकर सवाल किए गए।
बातचीत में छात्रों ने अपनी प्राथमिकताएं और चुनाव को लेकर अपनी राय सामने रखी।
समय पर रिजल्ट और शैक्षणिक व्यवस्था सबसे बड़ा मुद्दा
एमए टूरिज्म के रिसर्च स्कॉलर कैवल्य ने छात्रसंघ की प्राथमिकताओं पर अपनी राय रखी।
उन्होंने कहा कि बड़े वादों से पहले विश्वविद्यालय की बुनियादी व्यवस्थाएं दुरुस्त होना जरूरी है।
उनके मुताबिक एकेडमिक कैलेंडर समय पर चले और परीक्षाएं निर्धारित समय पर हों।
इसके साथ ही छात्रों को रिजल्ट के लिए लंबे समय तक इंतजार नहीं करना पड़े।
कैवल्य ने अपने पिछले छात्र राजनीति के अनुभव का भी जिक्र किया।
उन्होंने कैंपस-टू-कैंपस बस सेवा और बीकॉम विभाग के सामने बस स्टॉप बनवाने जैसे कार्यों का दावा किया।
उनका कहना है कि छात्रसंघ का पहला फोकस विश्वविद्यालय की मूल शैक्षणिक व्यवस्था को मजबूत करने पर होना चाहिए।

चुनाव प्रचार से पढ़ाई प्रभावित न हो
जूलॉजी के छात्रा कनक ने चुनावी माहौल को उत्साहजनक बताया। हालांकि, उन्होंने चुनाव प्रचार के दौरान पढ़ाई प्रभावित नहीं होने की बात कही।
कनक के मुताबिक प्रचार अपनी जगह जरूरी है, लेकिन कक्षाओं का संचालन प्रभावित नहीं होना चाहिए।
उनका सुझाव है कि प्रचार क्लास से पहले या बाद में किया जाए।
उन्होंने कहा कि चुनाव के कारण छात्रों की पढ़ाई और शैक्षणिक गतिविधियां बाधित नहीं होनी चाहिए।
सफाई और छात्र हित के मुद्दे भी अहम
एमए के छात्र नीरज ने छात्रों के लिए सफाई और समय पर रिजल्ट को महत्वपूर्ण मुद्दा बताया।
वे आर्यन छात्र संगठन के प्रत्याशी पंकज के समर्थन में हैं।
नीरज के मुताबिक छात्रों के हक की लड़ाई ने उन्हें छात्र संगठन से जुड़ने के लिए प्रेरित किया।
उनका कहना है कि छात्रसंघ को छात्रों की वास्तविक समस्याओं को प्राथमिकता देनी चाहिए।
संगठन और प्रत्याशी को लेकर भी छात्रों की राय
एमए मास कम्युनिकेशन के छात्र सारांश ने छात्र राजनीति में संगठन की भूमिका पर भी अपनी बात रखी।
उन्होंने बताया कि इस बार उन्होंने अध्यक्ष पद के लिए दावेदारी की थी।
हालांकि, संगठन की ओर से भुवन चमोली को अधिकृत प्रत्याशी बनाए जाने के बाद वे संगठन के प्रत्याशी के समर्थन में प्रचार कर रहे हैं।
संगठन के भीतर दावेदारों के अलग होने और दूसरे संगठनों में जाने के सवाल पर उन्होंने कहा कि कार्यकर्ता की पहचान व्यक्ति से नहीं, बल्कि संगठन के प्रति उसकी प्रतिबद्धता से होती है।
छात्रों की प्राथमिकताएं कितनी बदलेंगी चुनावी समीकरण?
गढ़वाल विश्वविद्यालय के चुनावी माहौल में पोस्टर, नारे, रैलियां और सोशल मीडिया प्रचार लगातार बढ़ रहा है। लेकिन छात्रों की बातचीत से उनके मुद्दे भी स्पष्ट नजर आ रहे हैं।
समय पर परीक्षा और रिजल्ट, नियमित कक्षाएं, साफ-सफाई और बेहतर छात्र सुविधाएं उनकी प्रमुख अपेक्षाओं में शामिल हैं।
अब बड़ा सवाल यही है कि छात्र प्रत्याशियों के वादों और प्रचार से कितना प्रभावित होते हैं।
साथ ही यह भी देखना होगा कि छात्रों के वास्तविक मुद्दे चुनावी नतीजों पर कितना असर डालते हैं।















Leave a Reply