प्रमाणपत्रों की पड़ताल से उठे गंभीर सवाल
उत्तराखंड में NEET UG 2026 काउंसलिंग के दौरान फ्रीडम फाइटर कोटे को लेकर विवाद गहराता जा रहा है।
प्रमाणपत्रों और अभ्यर्थियों की पात्रता को लेकर सवाल उठाए गए हैं।
उत्तराखंड चिकित्सा शिक्षा विश्वविद्यालय की ओर से पहले चरण की काउंसलिंग में फ्रीडम फाइटर कोटे के तहत आवेदन करने वाले 24 अभ्यर्थियों की सूची जारी की गई थी।
वरिष्ठ पत्रकार प्रदीप भोगुणा ने इस सूची की पड़ताल की।
उनकी पड़ताल में कुछ अभ्यर्थियों के प्रमाणपत्रों और शैक्षणिक रिकॉर्ड को लेकर सवाल सामने आने का दावा किया गया है।
दूसरे राज्यों से पढ़ाई करने वाले अभ्यर्थियों पर सवाल
पड़ताल के अनुसार, सूची में शामिल कुछ अभ्यर्थियों ने दसवीं और बारहवीं की पढ़ाई उत्तराखंड से बाहर की है।
इनमें बिहार, दिल्ली, उत्तर प्रदेश और तेलंगाना जैसे राज्य शामिल बताए गए हैं।
इसके बाद इन अभ्यर्थियों के फ्रीडम फाइटर कोटे से जुड़े प्रमाणपत्रों को लेकर भी सवाल उठे हैं।
हालांकि, इन दावों की अंतिम पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी।
18 अगस्त को प्रमाणपत्र जारी होने पर सवाल
मामले में प्रमाणपत्र जारी होने की तारीख भी चर्चा में है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, NEET काउंसलिंग की अंतिम तारीख 19 अगस्त बताई गई है।
आरोप है कि कुछ जरूरी प्रमाणपत्र 18 अगस्त को शाम करीब पांच बजे के बाद ऑनलाइन जारी किए गए।
इनमें कुछ प्रमाणपत्र कुछ ही मिनटों के अंतराल में जारी होने की बात कही गई है।
अब सवाल यह है कि इतनी कम अवधि में इन प्रमाणपत्रों की जांच और सत्यापन की प्रक्रिया किस तरह पूरी हुई।
एक ही स्वतंत्रता सेनानी के नाम पर पांच आवेदन
पड़ताल में एक और महत्वपूर्ण बिंदु सामने आने का दावा किया गया है।
एक ही स्वतंत्रता सेनानी के नाम पर पांच अभ्यर्थियों ने प्रमाणपत्र के लिए आवेदन किया।
इनमें से चार अभ्यर्थियों को प्रमाणपत्र जारी होने की बात सामने आई है।
बताया गया है कि इन अभ्यर्थियों में अलग-अलग आरक्षण श्रेणियों के उम्मीदवार शामिल हैं।
पड़ताल में यह भी दावा किया गया है कि इनमें से तीन अभ्यर्थियों के पते एक जैसे हैं। इस बिंदु ने भी फ्रीडम फाइटर कोटे की प्रक्रिया पर सवाल खड़े किए हैं।
अब डीएम की जांच से खुलेगा पूरा मामला
मामले की गंभीरता को देखते हुए देहरादून जिलाधिकारी ने जांच बैठा दी है। ऐसे में अब जांच रिपोर्ट से ही यह स्पष्ट होगा कि प्रमाणपत्र नियमों के तहत जारी हुए या नहीं।
साथ ही यह भी साफ होगा कि संबंधित अभ्यर्थी फ्रीडम फाइटर कोटे के लिए निर्धारित पात्रता पूरी करते हैं या नहीं।
फिलहाल उपलब्ध जानकारी के आधार पर यह कहना जल्दबाजी होगी कि किसी अभ्यर्थी ने फर्जी प्रमाणपत्र का इस्तेमाल किया है।
जांच पूरी होने के बाद ही आरोपों की वास्तविक स्थिति स्पष्ट होगी।
हालांकि, NEET काउंसलिंग में फ्रीडम फाइटर कोटे के प्रमाणपत्रों को लेकर उठे सवालों ने पूरी प्रक्रिया की पारदर्शिता पर बहस जरूर शुरू कर दी है।















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